गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। शहीद भृगुनंदन चौधरी शासकीय औद्योगिक संस्था जिला गरियाबंद में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशनुसार राज्य के सभी जिला मुख्यालयों के सभी निजी एवम शासकीय विद्यालयों में पिछले 2 महीनो से भगवान बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस ( ऐतिहासिक, आध्यात्मिक, सामाजिक ) के रूप में मनाया जा रहा है ताकि विद्यालय में पड़ रहे बच्चे जनजातीय गौरव गाथा को समझ सके उसके इतिहास को जान सके। जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उमेंदी कोर्राम अध्यक्ष अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद गरियाबंद, अध्यक्षता लोकेश्वरी नेताम जिला पंचायत सभापति, अध्यक्ष महिला मोर्चा गरियाबंद,  मुख्य वक्ता अभिमन्यु ध्रुव सरपंच ग्राम पंचायत मरौदा, विशिष्ट अतिथि वीरेंद्र ध्रुव अध्यक्ष तहसील गरियाबंद, डॉ पूरन सिन्हा संचालक सिटी हॉस्पिटल गरियाबंद, विष्णु नेताम जिला सचिव आ.भा.आ.वि.प.गरियाबंद, लक्ष्मण कश्यप जिला मीडिया प्रभारी आ.भा.आ.वि.प.गरियाबंद, संतोष कुमार ध्रुव प्रशिक्षण अधीक्षक शास.आई टी आई मैनपुर, प्रभारी प्राचार्य लीला बिहारी साहू, संयोजक शंकर कांगे, सह संयोजक देवानंद शर्मा आईं टी आई फिंगेशवर, संस्था के प्रशिक्षण अधिकारी राकेश वर्मा, राकेश साहू, युवराज नेताम, पप्पू अनंत, टुकेश साहू , सोहन देवांगन , रिकेश ताम्रकार, कृतिमा साहू , रामाश्रित सोनी, संस्था के सभी पदाधिकारी, एवम छात्र छात्राओं की उपस्थिति में मां सरस्वती, भगवान बिरसा मुंडा की छायाचित्र पर पुष्प गुलाल अर्पित कर सभी अतिथियों का स्वागत कर अर्पा पैरी की धार महानदी हे अपार इंद्रावती हा पखारे तोर पईया…. जय हो जय हो… छत्तीसगढ़ मईया… की सांस्कृतिक पृष्टभूमि को याद दिलाती गीतो से मंचीय कार्यक्रम की शुरुवात की गई।

उद्बोधन में उमेंदी कोर्राम ने कहा की पिछले महीनो भर से जिले के विद्यालयों में जनजातीय गौरव दिवस मनाया जा रहा है। आदिवासी समाज का ऐतिहासिक, सामाजिक, एवम आध्यात्मिक योगदान है इस देश के निर्माण में जिसकी गिनती नहीं की जा सकती अथाह है जनजातीय समाज की गौरव गाथा जिसे कुछ शब्दो में नही कहा जा सकता। आदिवासी वनवासी नही है, इस देश के मूलनिवासी है, जल जंगल जमीन की सुरक्षा एवम संरक्षण करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

लोकेश्वरी नेताम ने कहा की जनजातीय समुदाय का इतिहास अथाह है। भारत के संविधान में जो अधिकार आदिवासी जनजातीय समुदाय को मिला है वह सब हमारे  वीर शहीद क्रांतिकारियों की देन है जिसकी बदौलत आज पूरे देश में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मना रहे हैं। आगे अपनी स्कूल के दिनों की कुछ पुरानी यादें जो जनजातीय समाज की संस्कृति को जोड़ता है, कही मेरी एक सहेली थी परीक्षा की तैयारी के बारे में  उसके पूछने पर कही की पेपर समाज शास्त्र का था जिसमे जनजाति समाज के रीति नीति संस्कृति का बोध कराता है और मैं आदिवासी समाज की बेटी हु ये सब मेरे रग रग में बसी है जिसे पढ़ने और समझने की जरूरत है भगवान बिरसा मुंडा की 24 वर्ष की उम्र में देश और समाज के लिए अंग्रेजो से जल जंगल जमीन की सुरक्षा की खातिर देश एवम समाज को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने लड़ाई लड़ी। भगवान बिरसा चौक का नारा था मावा नाटे.., मावा राज…  इसका अर्थ है हमर गांव में हमर राज को बुलंद करते देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए जिसे पूरा समाज आज जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मना रहे हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अभिमन्यु ध्रुव ने कहा की भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का इतिहास ऐतिहासिक है जिन्होंने देश एवम समाज को जोड़े रखने का अद्भुत नमूना पेश किया जिसे आज जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मना रहे है। ध्रुव जी ने आगे कहा मेरा भारत देश नवी सदी से 18 वीं सदी तक मुगलों का शासन एवं 1857 से 1947 तक ब्रिटिश शासन था जिसमें हमारी शिक्षा संस्कृति सभ्यता को नष्ट किया गया जिसके कारण आज हम सभी भ्रमित हैं। हमारा भारतवर्ष 1857 से 1947 तक गुलाम रहा इस गुलामी की लड़ाई में आदिवासी समाज का बड़ा योगदान रहा लेकिन इतिहास के पन्नों में इसका साहस पराक्रम को छुपाया गया कहीं भी कोई भी जगह इन लोगों का नाम नहीं है आदिवासी समाज बहुत ही अनूठी है। आदिवासी समाज साहस, पराक्रम, धैर्य, सरल भाषा, रहन-सहन, खान पान, सरल हृदय वाले होते हैं। आदिवासी समाज से हमें बहुत कुछ शिक्षा मिलता है हमें इसे बढ़-चढ़कर आत्मसात करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही भारत की यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का धन्यवाद प्रकट किया और कहा की आदिवासी समाज के गौरव को  गौरानवित उसके लिए हृदय से आभार।


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