हो रहा है बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़।

त्रैमासिक आकलन के लिए हार्ड कॉपी में प्रश्न पत्र उपलब्ध न कराने से छत्तीसगढ़ के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों में भारी आक्रोश – दिनेश राजपूत।

तखतपुर (गंगा प्रकाश)। शिक्षा विभाग में अधिकारियों की लापरवाही के कारण परीक्षा जैसी चीज मजाक बन कर रह गई है।शिक्षकों की जवाबदारी और अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले स्वयं कहा खड़े हैं यह नही दिख रहा है।शालेय शिक्षक संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष और भाजपा नेता दिनेश राजपूत ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार की अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में निजी संस्थानों के बच्चे भी एडमिशन लेकर विद्या अध्ययन कर रहे हैं तो वहीं सरकारी हिंदी माध्यम स्कूलों में ध्यान नही दिया जा रहा है।इन विद्यालय में संसाधन का आभाव है। जिस पर सभी अधिकारी मौन हैं। और दुःख की बात है कि इसका कोई सूध लेने वाला नहीं है। त्रैमासिक परीक्षा के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद रायपुर द्वारा त्रैमासिक आकलन का प्रश्न पत्र तैयार तो कराया गया है लेकिन प्रश्न पत्र हार्ड कापी में उपलब्ध नहीं कराया गया है। जिससे सरकारी स्कूल के शिक्षक परीक्षा बोर्ड पर लेने विवश हैं क्योंकि उनके पास फंड का अभाव है और परीक्षा के लिए कोई प्रश्न पत्र हार्ड कापी में उपलब्ध नहीं कराया गया है। प्रश्न पत्र उच्च गुणवत्ता के हैं लेकिन प्रश्न पत्र हार्ड कापी में न होने से बार- बार शिक्षकों को बोर्ड पर लिखकर पेपर लेना पड़ता है जिससे 2 व 2:30 घंटे का होने वाला पेपर 3 से 4 घंटे ले लेता है। जिससे परीक्षा एक मजाक बन कर रह गई है। परीक्षा की गोपनीयता तार तार हो गई है।त्रैमासिक आकलन के लिए हार्ड कॉपी में प्रश्न पत्र उपलब्ध न कराने से छत्तीसगढ़ के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों में भारी आक्रोश है लेकिन उनका यह आक्रोश छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चों के लिए काफी नहीं है क्योंकि उनके इस आक्रोश से प्रश्न पत्र हार्ड कापी में उपलब्ध नहीं हो सकता। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपने ही कापी में प्रश्नों के उत्तर लिखकर जमा करते हैं। जिसका कोई सूध लेने वाला नहीं है। शिक्षक बोर्ड पर बार – बार प्रश्न लिखते जाते हैं और बच्चों के लिखते तक इंतजार करते हैं और जब बच्चे प्रश्न उतार लेते हैं तब शिक्षक बोर्ड पर प्रश्नों को दोबारा लिखते हैं। यह क्रम चलते रहता है। इसे लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है क्योंकि शिक्षकों का मानना है कि परीक्षा परीक्षा जैसी होनी चाहिए लेकिन इस ओर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान नहीं जा रहा है। शिक्षकों में यह आक्रोश और भी बढ़ रहा है क्योंकि इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ है जहां बच्चों को प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका उपलब्ध न कराया गया हो? 

शिक्षक सोचने को मजबूर हैं कि आखिर सरकारी स्कूलों में हार्ड कापी में प्रश्न पत्र उपलब्ध क्यों नहीं करा जा रहा है। श्री राजपूत ने मांग किया कि छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के शिक्षक परीक्षा हेतु प्रश्न पत्र हेतु हार्ड कापी  की मांग मौखिक तौर पर कर रहे हैं लेकिन मौखिक तौर पर मांग करने से अब तक इस दिशा में कोई भी कार्यवाही नहीं हो पाया है जिससे बोर्ड पर लिखकर परीक्षा लेने की नई पद्धति शुरू हो गई है जिससे शिक्षकों में रोष व्याप्त  है क्योंकि परीक्षा परीक्षा जैसी हो तो बेहतर है लेकिन परीक्षा के नाम पर खाना पूर्ति करना उचित नही है।


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