प्रफुल कुमार बोरकर

औंधी (गंगा प्रकाश)। नवीन जिला मोहला मानपुर के चौकी के भाजपा अल्पसंखयक मोर्चा जिलाध्यक्ष रियाजुद्दीन (राजु) कुरैशी, जिला महामंत्री दिलीप वर्मा,महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष कमलेश सारस्वत मंडल अध्यक्ष गुलाब गोस्वामी, प्रदेश सदस्य आशीष द्विवेदी, अल्पसंखयक जिला प्रभारी सैयद अजहरुद्दीन, महामंत्री ईश्वरी धुर्वे, महामंत्री देवनरायण कुम्भकार, ललित चद्रवंशी, आकाश ताम्रकार नें शुक्रवार को  भगत सिंह चौक मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पुण्यतिथि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया.

इस दौरान मंडल अध्यक्ष गुलाब गोस्वामी  ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक महान शिक्षाविद थे। वह 33 वर्ष की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए थे। देश की आजादी की लड़ाई में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था। वहीं देश के विभाजन की त्रासदी को रोकने के लिए और पूरे बंगाल को अंग्रेजों की कुटिलता से बचाने में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे राष्ट्र नायकों का बड़ा योगदान रहा है। उस दौरान अनेक सामाजिक गतिविधियों के साथ जुड़ने, प्रखर राष्ट्रवादी विचार का नेतृत्व प्रदान करने और देश के अंदर आजादी के पूरे आंदोलन के साथ सक्रिय सहभागिता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पहचान बन गई थी। ये बातें 

तुष्टिकरण की नीतियों का खुलकर किया विरोध

 महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष कमलेश सारस्वत नें कहा कि डॉ. मुखर्जी के देश प्रेम और उनके योगदान का ही नतीजा रहा कि जैसे ही 1947 में देश आजाद हुआ तो देश के प्रथम उद्योग और खाद्य मंत्री के रूप में संयुक्त सरकार में उन्हें भारत की औद्योगिक नीति को आगे बढ़ाने का एक अवसर प्राप्त हुआ था, लेकिन बाद में जब उन्होंने इस बात का अहसास किया कि आजादी जिन मूल्यों और जिन आदर्शों को ले करके प्राप्त हुई थी, तत्कालीन सरकार उससे विमुख हो करके तुष्टीकरण की नीतियों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। इस पर उन्होंने सरकार से हट गए और बाद में भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं अध्यक्ष के रूप में कार्य करना प्रारंभ किया। भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने सरकार के तुष्टिकरण से जुड़े हुए उन सभी नीतियों का खुलकर विरोध किया, जो भारत की एकता के लिए राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा पैदा कर सकती थीं।

प्रधानमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को किया साकार

 भाजपा अल्पसंखयक मोर्चा जिलाध्यक्ष रियाजुद्दीन (राजु) कुरैशी ने कहा कि कश्मीर में उस समय आजादी के बाद कांग्रेस के अदूरदर्शिता के कारण लगातार स्थिति बिगड़ती जा रही थी। ऐसे में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू कश्मीर के लिए अलग से विधान बनाने और उस समय जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री को अलग मान्यता देने के विरोध में देश को एक नारा दिया, वह नारा एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे था। इस नारे को उन्होंने आंदोलन और अभियान का रूप दिया। इस दौरान उनकी गिरफ्तारी होती है। कश्मीर को बचाने और भारत की अखंडता के लिए उनका बलिदान आज भी जाना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर में धारा 370 को सदैव के लिए समाप्त कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपने को साकार किया।


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