जयपुर(गंगा प्रकाश)।:-राजस्थान में गहलोत-पायलट के बीच तकरार जारी है। गहलोत किसी भी हाल में सचिन पायलट को सीएम की कुर्सी सौंपने के मूड में नहीं है। चर्चा है कि गहलोत कैंप ने पायलट को छोड़ 5 नाम पार्टी आलाकमान को भेजे हैं।बता दें कि राजस्थान में गहलोत-पायलट के बीच तकरार जारी है। गहलोत किसी भी हाल में सचिन पायलट को सीएम की कुर्सी सौंपने के मूड में नहीं है। लेकिन पार्टी शीर्ष नेतृत्व पायलट के साथ खड़ी है। यही कारण है कि अब राजस्थान में गहलोत बनाम आलाकमान के बीच तकरार की स्थिति बन गई है। गहलोत समर्थक विधायकों ने स्पष्ट कर दिया है कि वो सचिन पायलट को किसी भी सूरत में स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। साथ ही सूबे में अगले सीएम के तौर पर कुछ नामों की सूची आलाकमान को भेजी गई है, जिसमें सीपी जोशी, गोविंद सिंह डोटासरा, रघु शर्मा, हरीश चौधरी और भंवर सिंह भाटी का नाम शामिल है। कांग्रेस के दोनों पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन दिल्ली के लिए रवाना हो गए है। दिल्ली जाने से पहले सीएम अशोक गहलोत ने दोनों पर्यवेक्षकों से एक निजी होटल में मुलाकात की। चर्चा है कि गहलोत ने साफ कह दिया है कि उन्हें पायलट मंजूर नहीं है। गहलोत ने अजय माकन को बतौर सीएम के लिए 5 नामों की सिफारिश की है। कांग्रेस पर्यवेक्षक सोनिया गांधी को राजस्थान की घटनाक्रम से अवगत कराएंगे।

सीएम गहलोत का करियर दांव पर

राजस्थान में जिस तरह से सियाली बवंडर खड़ा हो गया है। उससे सीएम गहलोत का करियर दांव पर है। अब पूरे देश की राजनीति के केंद्र में राजस्थान आ खड़ा हुआ है। आपको बता दें इससे पहले 2020 में सचिन पायलट की बगावत के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुर्सी खतरे में आई थी। उस बगावत से तो गहलोत अपनी राजनीतिक कुशलता से बच गए थे, लेकिन वर्तमान में गहलोत और पायलट के बीच पैदा हुई कड़वाहट ने अब यह साफ कर दिया है कि सीएम गहलोत, सचिन पायलट को रोकने के लिए किसी भी हद से गुजरने को तैयार हैं। यहां तक कि गहलोत ने अपने 50 सालों के राजनीतिक करियर को भी दांव पर लगा दिया है। ऐसे में भले ही इस कदम से सीएम गहलोत को अपनी राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी ही क्यों न गंवानी पड़े, वो हर कुर्बानी तक को तैयार नजर आ रहे हैं।

सीएम गहलोत को पार्टी अध्यक्ष नहीं बनना चाहिए

गहलोत कैंप के विधायकों का कहना है कि सीएम गहलोत को पार्टी अध्यक्ष नहीं बनना चाहिए। उल्लेखनीय है कि सीएम गहलोत भी पार्टी अध्यक्ष नहीं बनना चाहते थे। लेकिन कांग्रेस आलाकमान के दबाव में तैयार हुए। वहीं, सवाल यह भी है कि अगर अशोक गहलोत राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनते हैं तो फिर उन्हें किस आधार पर मुख्यमंत्री पद से हटने को कहा जाएगा। सीएम गहलोत के साथ 70 से अधिक विधायक है। ऐसे में पार्टी आलाकमान सचिन पायलट को सीएम बनाता भी है तो उनके पास बहुमत नहीं होगा। मतलब साफ है कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आ जाएगी।

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