शराब घोटाला, ट्रांसफर घोटाला, गोबर घोटाला, ग्राम सभा सदस्य घोटाला, चावल घोटाला,खदान घोटाला… छत्तीसगढ़ में हुआ कांग्रेस का हिसाब-किताब

रायपुर(गंगा प्रकाश)। कांग्रेस हर बार 75 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रही थी। पर चुनाव परिणाम एकदम उलट आए। आइए समझते हैं कि उन कारणों को जिनके चलते बीजेपी राज्य में सरकार बनाने जा रही है और अति आत्मविश्वास के पहाड़ पर बैठी कांग्रेस के हाथ से सत्ता छिन गई। 90 सीटों वाले छत्तीसगढ़ में सभी सीटों के परिणाम शाम तक आएंगे लेकिन अब करीब-करीब यह साफ हो गया है कि वहां सत्ता बदलने जा रही है। भूपेश बघेल की विदाई तय हैं। बीजेपी से मुख्यमंत्री कौन होगा यह अभी साफ नहीं हो सका है। पहले बात आज आए परिणामों की। छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है जहां तीन महीने पहले तक खुद बीजेपी के नेता इस बात को अंदर ही अंदर स्वीकार्य कर चुके थे कि इस बार कम से कम वह सत्ता में नहीं लौट रहे हैं। कांग्रेस हर बार 75 से अधिक सीटें जीतने का दावा कर रही थी। पर चुनाव परिणाम एकदम उलट आए। आइए समझते हैं कि उन कारणों को जिनके चलते बीजेपी राज्य में सरकार बनाने जा रही है और अति आत्मविश्वास के पहाड़ पर बैठी कांग्रेस के हाथ से सत्ता छिन गई। बताते चले की राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस सरकार पर घोटालों पर घोटालों को अंजाम देने के आरोप हैं, ऐसे में जनता कांग्रेस से खफा नजर आ रही है। भूपेश बघेल सरकार पर शराब घोटाला, ट्रांसफर घोटाला, गोबर घोटाला, ग्राम सभा सदस्य बनाने के नाम पर घोटाला, चावल घोटाला, खदान से जुड़े माल ढुलाई के काम में घोटाला के साथ ही महादेव बेटिंग ऐप जैसे घोटालों की लंबी फेहरिस्त है।भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ का मुख्यमंंत्री बनाया गया था, तो ऐसी रिपोर्ट्स थी कि उन्हें 2.5 साल के लिए मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है, अगले ढाई साल टीएस सिंहदेव मुख्यमंत्री होंगे। हालाँकि ऐसा नहीं हुआ। भूपेश बघेल तमाम गतिरोधों के बावजूद पूरे 5 साल मुख्यमंत्री बने रहे। टीएस सिंहदेव को आखिरी कुछ महीनों के लिए उपमुख्यमंत्री बनाकर चुप करा दिया गया। ऐसा टीएस सिंहदेव ने क्यों होने दिया, ये तो वही लोग जानें, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो भूपेश बघेल ने खुद को मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत की।

उन पर भारतीय जनता पार्टी आरोप लगाती है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ को कांग्रेस पार्टी के लिए तिजोरी के तौर पर इस्तेमाल कराया। जिन चीजों का वादा करके वो सत्ता में आए थे, किया उसके ठीक विपरीत काम और घोटालों पर घोटालों को अंजाम दिया। कांग्रेस पार्टी के लिए फंडिंग की और खुद को सत्ता में बनाए रखा। हम इस लेख में भूपेश बघेल सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की लंबी सूची प्रकाशित कर रहे हैं, जिसके बाद सारी बातें दूध और पानी की तरह स्पष्ट हो जाएंगी।

महादेव सट्टेबाजी घोटाला

भारतीय जनता पार्टी आरोप लगा रही है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सीधे तौर पर इस घोटाले में शामिल हैं। इस कथित घोटाले के मास्टरमाइंड और एप के मालिक ने अपना एक वीडियो जारी कर कहा कि उसने भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपए नकद पहुँचाए हैं। ये पैसे चुनाव में इस्तेमाल किए गए हैं। उसने बताया कि एक-एक पैसों का हिसाब उसके पास है। बता दें कि महादेव सट्टेबाजी एप मामला 15000 करोड़ का अभी तो ज्ञात है, जाँच जारी है। इतने पैसों की ती मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है, जिसपर ईडी ने केस दर्ज किया है। अभी ये कितना बड़ा घोटाला है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इस मामले में भूपेश बघेल के करीबी लोग जेल में बंद हैं।इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाकायदा चुनावी सभा में भूपेश बघेल से सवाल पूछा है कि वो बताएँ कि इन पैसों को उन्होंने कहाँ इस्तेमाल किया। पीएम मोदी ने पूछा, “मैं कॉन्ग्रेस से कुछ सवाल पूछना चाहता हूँ। महादेव सट्टेबाजी ऐप घोटाला 508 करोड़ रुपए का है और जाँच एजेंसियों ने इस मामले में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की है। छत्तीसगढ़ के सीएम का एक करीबी सहयोगी भी जेल में है। कॉन्ग्रेस को खुलासा करना चाहिए इसमें सीएम को कितना पैसा मिला? दिल्ली दरबार कितना पैसा पहुँचा?”

छत्तीसगढ़ पीसीएस घोटाला

इस घोटाले से जुड़ी हैरान करने वाली जानकारियाँ सामने आई है। छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन में नेताओं और अधिकारियों को बच्चों को सीधे एंट्री मिली, और उन्हें बड़े-बड़े पद भी दिए गए। प्रधानमंत्री ने भी इस घोटाले पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस के गणितबाजों से सवाल PSC घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के युवाओं का भी है… जिन हजारों युवाओं ने दिन-रात पढ़ाई करके, परीक्षा पास की थी, उनको किस फॉर्मूले से बाहर निकाला गया? कॉन्ग्रेस नेताओं के बच्चों को गणित के किस फॉर्मूले से भर्ती किया गया?

2000 करोड़ का शराब घोटाला

 भूपेश बघेल ने वादा किया था कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आएगी तो छत्तीसगढ़ में शराबबंदी करेगी। उल्टा भूपेश बघेल और उनके बेटे पर आरोप है कि उन्होंने कमीशनखोरी करके 2161 करोड़ रुपए का घोटाला किया जबकि अभी इसकी पूरी डिटेल भी सामने नहीं आई है। जो पकड़ा गया और जिसकी रिकवरी हुई है, यह उसकी जानकारी है। सच्चाई यह है कि छत्तीसगढ़ में हजारों करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ है। इस मामले में ईडी चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है और बताया है कि एजाज ढेबर के भाई अनवर ढेबर के आपराधिक सिंडिकेट के जरिए आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ।ज्ञात हो कि मई 2023 में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ में 2,000 करोड़ रुपये के ‘घोटाले’ का भंडाफोड़ किया, जिसके बारे में माना जाता है कि यह शीर्ष राजनेताओं और नौकरशाहों की मदद से संचालित किया गया था। ईडी ने एक मुख्य आरोपी अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया, जिसे रायपुर की एक अदालत ने ईडी की हिरासत में भेज दिया। अनवर ढेबर कांग्रेस नेता और रायपुर के मेयर ऐजाज़ ढेबर के भाई हैं।

गौरतलब है कि ईडी की जांच में इस रैकेट में शामिल पूरे सिंडिकेट का खुलासा हुआ था। ‘पीएमएलए जांच से पता चला कि अनवर ढेबर के नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में काम कर रहा था। अनवर ढेबर, एक निजी नागरिक होते हुए भी,उच्च-स्तरीय राजनीतिक अधिकारियों और वरिष्ठ नौकरशाहों की अवैध संतुष्टि के लिए समर्थित और काम करता था।

सिंडिकेट कैसे संचालित होता था?

प्रत्येक खरीदी गई नकदी के लिए सिंडिकेट द्वारा आपूर्तिकर्ताओं से प्रति केस 75-150 रुपये (शराब के प्रकार के आधार पर) का कमीशन सावधानीपूर्वक वसूला जाता था।ढेबर ऐसे किसी भी नियम का पालन नहीं कर रहे थे और एक निजी संस्था की तरह चल रहे थे। “राजनीतिक अधिकारियों के समर्थन से, अनवर ढेबर सीएसएमसीएल के एक सक्षम आयुक्त और एमडी पाने में कामयाब रहे, और सिस्टम को पूरी तरह से अपने अधीन बनाने के लिए विकास अग्रवाल और अरविंद सिंह जैसे करीबी सहयोगियों को काम पर रखा। उन्होंने शराब व्यापार की पूरी श्रृंखला को नियंत्रित किया।

ढेबर ने अन्य लोगों के साथ साजिश करके बेहिसाब देशी कच्ची शराब का निर्माण कराना शुरू कर दिया और उसे सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचना शुरू कर दिया। इस तरह, वे राज्य के खजाने में कुछ भी जमा किए बिना पूरी बिक्री आय अपने पास रख सकते थे। डुप्लिकेट होलोग्राम उपलब्ध कराए गए. डुप्लीकेट बोतलें नकद में खरीदी गईं, और शराब को राज्य के गोदामों से गुजरते हुए डिस्टिलर से सीधे दुकानों तक पहुंचाया गया।यह एक वार्षिक कमीशन था जिसका भुगतान मुख्य डिस्टिलर्स द्वारा डिस्टिलरी लाइसेंस प्राप्त करने और सीएसएमसीएल की बाजार खरीद में एक निश्चित हिस्सेदारी प्राप्त करने के लिए किया जाता था। विदेशी शराब आपूर्तिकर्ताओं से भी FL-10A लाइसेंस धारकों से कमीशन वसूला जाता था। ये लाइसेंस अनवर ढेबर के सहयोगियों को दिए गए थे।

चावल घोटाला

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार पर सरकारी राशन के बँटवारे में भी घोटाले का आरोप लगा है। पीडीएस व्यवस्था के तहत प्रति व्यक्ति 5 किलो धान देने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कैग रिपोर्ट में आया है कि इसमें 600 करोड़ रुपए की गड़बड़ी की गई है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भूपेश बघेल सरकार ने लगभग 5000 करोड़ रुपये का चावल घोटाला किया है। मई माह में भाजपा ने भूपेश बघेल पर 5000 करोड़ के चावल घोटाले का आरोप लगाते हुए इस्तीफा भी माँगा था। इस मामले में भूपेश बघेल और उनसे जुड़े लोगों ने चुप्पी साधे रखी है।

खदान ढुलाई घोटाला

भूपेश बघेल सरकार ने खदानों से निकलने वाले माल पर भी घोटाला किया है। माल ढुलाई से जुड़ा 2000 करोड़ से अधिक के घोटाले का आरोप उस पर है। बताया जा रहा है कि 25 रुपए प्रति टन की वसूली की गई है। पिछले साल ईडी ने इस मामले में जाँच शुरू की थी और कई लोग इस मामले में भी गिरफ्तार हुए हैं। ईडी ने एक बयान में कहा कि यह मामला एक बड़े घोटाले से संबंधित है, जिसमें छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नौकरशाहों, व्यापारियों, राजनेताओं और बिचौलियों से जुड़ा एक समूह ढुलाई किये जाने वाले प्रति टन कोयले पर अवैध रूप से 25 रुपये का कर वसूल रहा है। अनुमान है कि इससे प्रतिदिन लगभग 2-3 करोड़ रुपये अर्जित किए जाते हैं।

गोबर और गोठान घोटाला

मजे की बात ऐ है कि छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने घोटाला करने मे गोठान और गोबर को भी नहीं छोड़ा था 1300 करोड़ रुपये का गोठान एवं गोबर घोटाला किया। इस मामले में भाजपा ने भी काफी हमला बोला है, खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मामले को उठा चुके हैं। गौ धन के नाम पर इतना बड़ा घोटाला छत्तीसगढ़ में अंजाम दे दिया गया।

क्या छत्तीसगढ़ में दो बैल 1800 किलो गोबर करते हैं

 कांग्रेस सरकार में सिर्फ भ्रष्टाचार किया जा रहा है। ”हाल ऐसा है कि राज्य में 2 बैल एक दिन में 1800 किलो गोबर दे देते हैं।भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़ को लूट का बाजार बना दिया है।इस सरकार में वादे खूब किए जा रहे हैं, लेकिन गरीबों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया हैं।

दरअसल मामला 26 नवंबर का  है।कोटा जनपद पंचायत के खैरा ग्राम के दो बैल वाले एक किसान ने गोठान में एक हफ्ते में 12800 रुपए का गोबर बेच दिया, भुपेश सरकार गौ पालकों से 1.5 रुपए प्रति किलों के हिसाब से गोबर खरीदती है। अगर इस हिसाब से अंदाजा लगाएं तो उस किसान के एक बैल ने रोजाना साढ़े 4 क्विंटल गोबर किया,इस मामले में जांच की बात की जाती रही हैं।

छत्तीसगढ़ में चना सरकारी राशन के वितरण में घोटाला

केंद्र सरकार के पैसों का सही से उपयोग न करने के आरोप, भाई भतीजावाद के आरोप तो लगते ही रहे हैं, साथ ही आदिवासी इलाकों के साथ सौतेला व्यवहार करने के भी आरोप लगे हैं। भूपेश बघेल पर आरोप हैं कि वो छत्तीसगढ़ से मिले घोटालों के पैसों को कॉन्ग्रेस की टॉप लीडरशिप तक पहुँचाते हैं और अन्य राज्यों के चुनावी अभियान में भी खर्च करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि वो पूरे 5 साल तक अपनी सत्ता बचाने में सफल रहे हैं।

जातीय समीकरण बिठाने में असफल

चुनाव में जातीय समीकरण अहम रोल अदा करते हैं। ओबीसी वोटर बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही वोट करता रहा है। लेकिन इस बार कांग्रेस ओबीसी की अलग-अलग जातियों का समीकरण बैठाने में सफल नहीं रही। साहू समाज का एक बड़ा वोट बैंक जिसने 2018 के चुनावों में कांग्रेस को वोट किया था इस बार उससे छिटका दिखा। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ टीवी पत्रकार बरुण सखाजी कहते हैं कि कांग्रेस सोशल इंजीनियरिंग करने में असफल रही। कांग्रेस का सबसे बड़ा वोट बैंक गांवों में था। कांग्रेस उसी को आधार बनाकर चुनाव लड़ रही थी। बीजेपी ने गांव और किसान के उस वोटर में बेहतर चुनावी प्रबंधन किया। कांग्रेस इन जातीय समीकरणों को बिठाने में असफल रही। जो जातियां कांग्रेस को वोट करती रहीं इस बार उससे दूर खड़ी दिखाई दीं। 

संगठन रहा जमीन से दूर

सत्ता में रही पार्टी जब चुनाव में उतरती है तो उसके साथ सरकार और संगठन दोनों होते हैं। छत्तीसगढ़ के चुनावों में लोगों की कुछ नाराजगी सरकार के साथ थी लेकिन बड़ा नुकसान संगठन के सक्रिय ना होने की वजह से हुआ। वरिष्ठ पत्रकार और समालोचक दिवाकर मुक्तिबोध कहते हैं कि संगठन इस बात की खुशफहमी में था कि वह सरकार में आने ही जा रहे हैं। संगठन ने बूथ स्तर पर ना तो मैनेजमेंट किया और ना ही वोटरों को घर से निकालने में दिलचस्पी दिखाई। सरकार और संगठन में एक तरह की दूरी दिखाई दी। संगठन की उपेक्षा भी बीते पांच सालों में दिखी। इसका साफ असर चुनाव परिणामों में दिखा। 

भष्ट्राचार के आरोप हुए नत्थी

कांग्रेस अपनी सफाई में कुछ भी कहती रहे। कोर्ट में क्या साबित हो पाए या नहीं या वक्त बताएगा लेकिन कांग्रेस सरकार के ऊपर भष्ट्राचार के आरोप एक तरह से नत्थी हो गए। ऐन चुनाव के वक्त महादेव ऐप के प्रकरण ने भी इस धारणा की पुष्टि की। मुक्तिबोध कहते हैं कि इससे इंकार नहीं कर सकते कि भष्ट्राचार के आरोपों ने कांग्रेस का नुकसान किया। आम वोटर के दिमाग में यह संदेश गया कि यह सरकार किसी ना किसी रूप में भष्ट्राचार के मामलों में शामिल होती दिख रही है। भूपेश अपनी सरकार की एक नीट एंड क्लीन इमेज नहीं बना रख सके। 

विकास कार्य नहीं हुए

बीते पांच सालों में भूपेश सरकार का मुख्य फोकस छत्तीसगढ़ी संस्कृति और किसान रहे हैं। कांग्रेस शहरी क्षेत्रों के विकास कार्यों से दूर रही है। बरुण सखाजी कहते हैं कि निर्माण के स्तर पर कांग्रेस सरकार ने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसे बताया या दिखाया जा सके। सरकार लगातार छत्तीगसढ़ वाद पर केंद्रित रही। कई सारे सरकारी कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ के त्योहारों को धूम-धाम से मनाया गया। लेकिन कांग्रेस का फोकस कभी भी विकास कार्यों में नहीं दिखा। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के बाकी शहरों में जो योजनाएं बीजेपी पिछली सरकारों में लेकर आई थी कांग्रेस उन्हें आगे नहीं बढ़ा सकी। 

आपस में मनमुटाव

कांग्रेस सरकार खेमों में बंटी नजर आई। मुक्तिबोध कहते हैं कि टीएस सिंह देव और भूपेश बघेल के बीच में खटपट है यह बात कोई सीक्रेट नहीं थी। ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री पद को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिरी के दो साल तक सरकार को दो गुटों में स्पष्ट रुप से बांट चुका था। टीएस और भूपेश में नहीं बनती यह बात कांग्रेस में जगजाहिर थी। टिकट वितरण में भी यह मनमुटाव दिखा। दोनों ही खेमे के लोग यह चाहते थे कि टिकट में उनकी चले ताकि जीतने के बाद मुख्यमंत्री बनने में उनका खेमा मजबूत हो सके। टिकट वितरण में यह रस्साकशी भी हार की एक वजह बनी।


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