Bhishma Ashtami 2026 , नई दिल्ली — माघ शुक्ल अष्टमी को मनाई जाने वाली भीष्म अष्टमी 2026 में श्रद्धा और नियमों के साथ मनाई जाएगी। मान्यता है कि इसी तिथि को महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह ने शरीर त्याग किया था। यही वजह है कि यह दिन पितरों और पूर्वजों के लिए समर्पित माना जाता है।
भीष्म अष्टमी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, भीष्म पितामह ने जीवन भर ब्रह्मचर्य और धर्म का पालन किया। उनकी स्मृति में इस दिन तर्पण और दान करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
भीष्म अष्टमी पर क्या करें
- सूर्योदय से पहले स्नान करें, संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में
- भीष्म पितामह का ध्यान करते हुए पितरों का तर्पण करें
- जल, तिल और कुश से तर्पण करना शुभ माना जाता है
- ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा का दान करें
- गीता या महाभारत के श्लोकों का पाठ करें
भीष्म अष्टमी पर क्या न करें
- मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूरी रखें
- झूठ, क्रोध और विवाद से बचें
- बाल और नाखून काटने से परहेज करें
- इस दिन नकारात्मक सोच और अपशब्दों से बचना चाहिए
शास्त्र क्या कहते हैं
धर्म ग्रंथों के अनुसार, भीष्म अष्टमी पर श्रद्धा से किया गया तर्पण सात पीढ़ियों तक पितरों को तृप्त करता है।
इसका असर क्या होता है
मान्यता है कि भीष्म अष्टमी पर नियमों का पालन करने से जीवन में बाधाएं कम होती हैं। परिवार में स्वास्थ्य, धन और सम्मान बना रहता है। इसे पितृ पक्ष जैसा ही महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, फर्क सिर्फ इतना है कि यह एक विशेष तिथि तक सीमित है।
आगे क्या करें
अगर आपने पहले कभी भीष्म अष्टमी पर तर्पण नहीं किया है, तो 2026 से इसकी शुरुआत कर सकते हैं। साधारण विधि से भी किया गया कर्म श्रद्धा के कारण फलदायी माना जाता है।
There is no ads to display, Please add some


