नई दिल्ली। आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में लोग सेहत को लेकर शॉर्टकट तलाशने लगे हैं। खराब खानपान के बाद एक गोली या कैप्सूल लेना अब आम आदत बन चुकी है। लेकिन क्या वाकई सप्लीमेंट्स आपकी गलत डाइट की भरपाई कर सकते हैं? डॉक्टरों का साफ कहना है— बिल्कुल नहीं। विशेषज्ञों के मुताबिक सेहत का 90 प्रतिशत हिस्सा रोज़ के खानपान और लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है, न कि सप्लीमेंट्स पर।
सप्लीमेंट्स को ‘इरेज़र’ समझने की गलती
अक्सर लोग सोचते हैं कि जंक फूड या अनहेल्दी खाना खाने के बाद विटामिन या मिनरल सप्लीमेंट लेने से नुकसान खत्म हो जाएगा और गिल्ट भी कम हो जाएगा। डॉक्टरों के अनुसार यह सोच पूरी तरह गलत है। सप्लीमेंट्स केवल पोषण की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं, वे खराब डाइट का विकल्प नहीं हो सकते।
असली भोजन की ताकत का कोई मुकाबला नहीं
विशेषज्ञ बताते हैं कि असली भोजन में फाइबर, फाइटोन्यूट्रिएंट्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का एक जटिल संतुलन होता है। प्रकृति ने जिस तरह फल, सब्ज़ियां, दालें और अनाज बनाए हैं, उनकी हूबहू नकल कोई टैबलेट या पाउडर नहीं कर सकता। यही कारण है कि सिर्फ सप्लीमेंट्स पर निर्भर रहना सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
क्या है सेहत का ‘90% नियम’
डॉक्टरों के अनुसार अच्छी सेहत का फॉर्मूला बहुत सरल है—
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90% योगदान: संतुलित डाइट, नियमित एक्सरसाइज, सही नींद और तनाव नियंत्रण
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10% योगदान: सप्लीमेंट्स, वह भी जरूरत पड़ने पर
यानी अगर आपकी प्लेट सही नहीं है, तो कोई भी सप्लीमेंट आपको पूरी तरह स्वस्थ नहीं बना सकता।
कब ज़रूरी होते हैं सप्लीमेंट्स
विशेषज्ञ मानते हैं कि कुछ खास स्थितियों में, जैसे विटामिन D, B12 या आयरन की कमी में, डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लेना जरूरी हो सकता है। लेकिन इन्हें रोज़मर्रा की खराब आदतों की ढाल समझना भारी भूल है।
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