रायपुर/तेलंगाना। देश के सबसे कुख्यात नक्सली नेताओं में शामिल हिड़मा की हाल ही में हुई मुठभेड़ में मौत अब नए विवादों में घिरती दिखाई दे रही है। तेलंगाना के नागरिक अधिकार मंच ने इस मुठभेड़ को पूरी तरह फर्जी बताते हुए सुरक्षा बलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन के प्रमुख एन. नारायण राव ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि मुठभेड़ की कहानी में कई संदेह हैं और पूरा मामला हिरासत में लेकर की गई हत्या जैसा प्रतीत होता है।
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नारायण राव के अनुसार, जिस अल्लूरी-मारेडुमिल्लि टाइगर ज़ोन में यह मुठभेड़ होने का दावा किया गया है, वहां परिस्थितियां और घटनाक्रम सुरक्षा एजेंसियों के बयान से मेल नहीं खाते। उनके मुताबिक, “यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि हिड़मा को पहले ही पकड़ा जा चुका था और उसे हिरासत में लेकर गोली मारी गई। बाद में इसे मुठभेड़ का रूप दिया गया।” मंच ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के कुछ घंटे बाद तक भी पुलिस घटनास्थल की वास्तविक जानकारी देने से बचती रही।
संगठन का कहना है कि जिस तरह से घटना की सूचना सार्वजनिक हुई और जिस तेजी से मुठभेड़ के विवरण जारी किए गए, उससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध लगती है। राव ने कहा कि सुरक्षा बलों को इस पूरे अभियान का वीडियो, जीपीएस डेटा और ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि सच सामने आ सके।
इस मामले पर छत्तीसगढ़ और तेलंगाना पुलिस का आधिकारिक बयान अभी विस्तृत रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह एक “वास्तविक मुठभेड़” थी और सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का दबाव बढ़ने के बाद अब इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है।
हिड़मा दक्षिण बस्तर में सक्रिय नक्सल संगठन का शीर्ष कमांडर माना जाता था और कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड भी रह चुका था। उसकी मौत को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बड़ी सफलता बताया जा रहा है, लेकिन तेलंगाना के नागरिक अधिकार मंच के आरोपों ने पूरा मामला नए विवाद में डाल दिया है।
फिलहाल दोनों राज्यों में इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर और भी राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
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