रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी गंभीर रूप ले रही है। पिछले सात माह में लगभग 6,434 शिक्षक या तो नौकरी छोड़ चुके हैं या रिटायर हो गए हैं। इससे पहले प्रदेश में 45,229 शिक्षक कम थे, जो अब बढ़कर 51,663 हो गए हैं। रिक्त पदों में सहायक शिक्षक से लेकर प्राचार्य और व्याख्याता तक शामिल हैं।
हालांकि सरकार ने रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन पदों की संख्या रिक्तियों की तुलना में कम है। इस साल लगभग 5 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पहले चरण में शुरू की गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पूर्व माध्यमिक शालाओं के प्रधान पाठक और व्याख्याता पदों पर पदोन्नति की, जिससे कुछ रिक्तियों में कमी आई है।
प्रदेश में 30 ऐसे स्कूल हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है। वहीं 1,79,100 स्कूल ऐसे हैं, जहां केवल एक शिक्षक पदस्थ है। इनमें प्राथमिक स्कूल 1,741, माध्यमिक स्कूल 45 और हायर सेकेंडरी स्कूल 5 शामिल हैं। रायपुर संभाग में 169 प्राथमिक और 11 माध्यमिक स्कूलों में केवल एक शिक्षक है, जबकि गरियाबंद जिले के 4 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं।
रिक्तियों में लगभग 50 प्रतिशत सहायक शिक्षक के पद शामिल हैं। वर्तमान में 24,113 सहायक शिक्षक कम हैं, जबकि अप्रैल में यह संख्या 18,664 थी। यानी सात माह में 6,434 सहायक शिक्षक कम हुए हैं।
2024-25 के बजट सत्र में तत्कालीन स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने 33 हजार शिक्षकों की सीधी भर्ती की घोषणा की थी। इसमें 2,524 व्याख्याता, 8,194 शिक्षक और 22,341 सहायक शिक्षक शामिल थे। राज्य सरकार ने चरणबद्ध तरीके से भर्ती प्रक्रिया शुरू की है और पहले चरण में 5 हजार पदों के लिए चयन चल रहा है।
शिक्षकों की बढ़ती कमी से प्रदेश के शिक्षा ढांचे पर गंभीर असर पड़ रहा है। रिक्त पदों को भरना और स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक सुनिश्चित करना प्राथमिकता बन गई है, ताकि बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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