राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वर्चुअल बैठक को बीच में छोड़कर चले जाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। यह घटना पाकिस्तान की एक आपत्तिजनक हरकत के कारण हुई थी, जिसके बाद भारत ने कड़ा विरोध जताया था।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, SCO के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक की मेजबानी रूस कर रहा था। बैठक में सभी सदस्य देशों के NSA वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे। जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने अपना संबोधन देना शुरू किया, तो उन्होंने अपनी स्क्रीन पर एक फर्जी राजनीतिक नक्शा दिखाया, जिसमें भारत के कुछ हिस्से – जैसे जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गुजरात का जूनागढ़ – को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया था।
पाकिस्तान की इस हरकत से डोभाल और भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने तुरंत आपत्ति जताई। यह एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर जानबूझकर की गई भड़काऊ कार्रवाई थी, जो बैठक के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करती थी।
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डोभाल ने क्यों छोड़ा था सम्मेलन?
पाकिस्तान की इस हरकत के बाद अजित डोभाल ने तत्काल कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने मेजबान रूस से कहा कि यह SCO के नियमों और अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों का स्पष्ट उल्लंघन है। जब पाकिस्तान ने अपना नक्शा नहीं हटाया, तो विरोध जताते हुए अजित डोभाल ने बैठक से बाहर निकलने का फैसला लिया।
भारत सरकार ने बाद में एक बयान जारी कर पाकिस्तान की इस हरकत की निंदा की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि पाकिस्तान ने बैठक के दौरान एक “मनगढ़ंत नक्शा” पेश किया, जो कि एक गंभीर उल्लंघन था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने पाकिस्तान के इस कदम के विरोध में बैठक से वॉकआउट किया था।
यह घटना दर्शाती है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा। डोभाल का यह कदम एक मजबूत कूटनीतिक संदेश था कि पाकिस्तान की ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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