गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। 6 नवम्बर की शाम को जंगली सूअर के शिकार के लिए आरोपियों द्वारा अलग अलग जगह पर 4 पोटाश बम लगाए।

7 नवम्बर की सुबह जब आरोपी मौकास्थल पर पहुंचे तब 3 बम साबुत मिले।, 1 बम नहीं मिला जिसके आसपास खून के धब्बे एवं हाथी के पदचिह्न देखकर आरोपी मौके से चले गये।

8 नवम्बर को एन्टी पोचिंग टीम को हाथी के घायल होने की सूचना मिली एवं 6 किलोमीटर तक 2 हाथियों के पद-चिह्नों के साथ खून के धब्बे मिले डॉग स्क्वाड को बुलाया गया। सीसीएफ भी मौके पर पहुंची एवं डॉक्टर की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

9-12 नवम्बर – ड्रोन के माध्यम से घायल हाथी बच्चे (उम्र 4-5 वर्ष) का पता चला जो मादा हाथी के साथ दल से थोडा दूर विचरण कर रहा था किन्तु उपचार नहीं किया जा सका क्युकी हाथी दल साथ में ही पहाड़ी पर मौजूद था. रेस्क्यू टीम ने महुआ और गुड के लड्‌डू बनाकर उसमे दवाई मिलाकर खाने की कोशिश की गयी. POR प्रकरण 79/19 of 2024 दर्ज किया गया।

14 नवम्बर 18 नवम्बर हाथी दल धमतरी एवं गरियाबंद वनमंडल होता हुआ ऑड-आममोरा की 2500 फीट ऊँची पहाड़ी पर चढ़ गया। इसी बीच गरियाबंद पुलिस अधीक्षक निखिल अशोक कुमार राखेचा से घटनास्थल का डंप डाटा उपलब्ध कराने लेख किया गया।

26 नवम्बर – घायल बच्चा रिसगांव (कोर) परिक्षेत्र में दिखाई दिया, उसकी माँ 4-5 किलोमीटर दूर ट्रेस की गयी।

 

27 नवम्बर, 29 नवम्बर 6 दिसम्बर हाथी को ट्रंककुलैय्ज़ कर इलाज किया गया, सुरगुजा से दो महावत भी बुलाये गये। सी सी एफ सतोविशा समाजदार ने घायल बच्चे का नाम रखा “अगहन”. इसी बीच 3 दिसम्बर को घायल हाथी द्वारा ग्राम आमाबहार में एक जनहानि की गयी। हाथी निगरानी ड्यूटी से एस.डी.ओ सीतानदी एवं दो वन रक्षक नदारद पाए गये जिससे हाथी ट्रेस करने में विलम्ब हुआ।

7 दिसम्बर – तौरेगा (बफर) परिक्षेत्र में हाथी की इलाज के दौरान मृत्यु हो गयी।

8 दिसम्बर – पोस्टमोर्टम रिपोर्ट में मुह में विस्फोट की वजह से जीभ का कुछ हिस्सा एवं अंदरूनी निचला जबड़ा क्षतिग्रस्त होना पाया गया।

13 दिसम्बर – गरियाबंद पुलिस से डंप डाटा उपलब्ध होने एवं गोपनीय सूचना के आधार पर एन्टी पोचिंग टीम द्वारा संदेहियो के घर छापामारी कर 7 नग जिंदा पोटाश बम, मयूर का पैर, चीतल/सांबर की हड्डी एवं फंदे जप्त किये गये। तीन आरोपियों 1. टीकमचंद पिता धनसिंह नेताम, 2. रोहित कुमार पिता धनुष राम मंडावी एवं 3. राकेश सोरी पिता रामनाथ सोरी को क्राइम सीन पर ले जाकर पूछताछ कर क्राइम सीन री-क्रिएट किया गया। जहा उनके द्वारा बताया गया कि वे लोग जंगली सूअर के शिकार के प्रयोजन से ओडिशा के किसी व्यक्ति से 700 रूपये प्रति नग के हिसाब से 8 पोटाश बम ख़रीदे थे. दो आरोपियों ने पूर्व में भी जंगली सूअर को पोटाश बम से मारने का कृत्य स्वीकार किया। इसी प्रकरण में 3 अन्य आरोपी – जैतराम, नरेन्द्र एवं ओडिशा का एक व्यापारी (जिसने पोटाश बम बेचा था) फरार है जिनकी पता साजी की जा रही है।

जप्त किये गये पोटाश बमों को गरियाबंद पुलिस के बोम्ब डिस्पोजल स्क्वाड द्वारा सीलबंद कराने उपरांत रायपुर स्थित फॉरेंसिक प्रयोगशाला भेजा जाएगा।

पूरे एन्टी पोचिंग ऑपरेशन के दौरान सूचना होने पर भी एस.डी.ओ सीतानदी एम. आर साहू मौके से नदारद रहे एवं आरोपियों के बयान लेना भी जरुरी नही समझा।

तीनो आरोपियों को पकड़कर विस्तृत पूछताछ के लिए सिहावा स्थित परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया एवं माननीय न्यायलय नगरी के समक्ष प्रस्तुत करने की कारवाई की जा रही है। प्रकरण में फरार अन्य तस्करों/आरोपियों एवं वन्यप्राणी अवयवो की तलाश जारी है।

इस कार्यवाही में गरियाबंद पुलिस के साइबर सेल प्रभारी सतीश यादव, उदंती सीतानदी टाईगर रिजर्व की एन्टी पोचिंग की टीम के नोडल अधिकारी श्री गोपाल कश्यप सहायक संचालक उदंती (मैनपुर), श्री शैलेश बघेल परिक्षेत्र अधिकारी रिसगांव श्रीमती प्रतिभा मेधाम परिक्षेत्र अधिकारी अर्सिकन्हार, श्री सुशील कुमार सागर वन परिक्षेत्र अधिकारी इंदागांव (घुरवागुड़ी) बफर, श्री नरेश चंद नाग परिक्षेत्र अधिकारी सीतानदी, वनरक्षक राजेंद्र सिन्हा, ओम प्रकाश राव, श्रीमती रिकी जोशी, श्रीमती टिकेश्वरी साहू, चुरामन धृतलहरे, पुनीत ध्रुव, देवीसिंह एवं वन अमले का विशेष योगदान रहा।


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