रायपुर। महादेव सट्टा एप मामले में ईडी ने महादेव एप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर समेत पांच आरोपियों की 91.82 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच कर ली है। अब तक इस मामले में ईडी ने 74 लोगों को आरोपी बनाया है जिनमें 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। कार्रवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय ने कुल 175 स्थानों पर छापा माता और अब तक 2600 करोड़ रूपये की संपत्ति अटैच की है। हाल ही में जिन पांच लोगों की 91.82 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की गई है उनमें सौरभ चंद्राकर के अलावा विकास उपारिया, गगन गुप्ता, अनिल कुमार अग्रवाल,हरिशंकर टिबरेवाल शामिल हैं।

ईडी ने मिस परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट एलएलसी और मेसर्स एक्जिम जनरल ट्रेंडिंग जीवेडसीओ के नाम पर रखे गए कुल 74,28,87,483/- करोड़ रुपए के बैंक बैलेंस को अटैच किया है। दोनों संस्थाएं सौरभ चंद्राकर, अनिल कुमार अग्रवाल और विकास छपारिया की हैं और इन कंपनियों का इस्तेमाल अपराध की कमाई (पीओसी) को बेदाग निवेश के रूप में छिपाने और दिखाने के लिए किया जा रहा था।

इसी तरह आरोपी हरिशंकर टियरेवाल (स्काई एक्सचेंज डॉट काम के मालिक) के करीबी सहयोगी गगन गुप्ता की 17.5 करोड़ रुपये की संपति भी अटैच की गई है। अटैच की गई संपतियों में गगन गुप्ता के परिवार के सदस्यों के नाम पर रखी गई महंगी रियल एस्टेट और लिक्विड एसेट्स शामिल है, जिन्हें कैश (पीओसी) से खरीदा गया पाया गया है। ईडी के मुताबिक आरोपी गगन गुप्ता को मेसर्स सालासार टेक्नो इंजीनियरिंग लिमिटेड और मेसर्स टाइगर लॉजिस्टिक लिमिटेड जैसी कंपनियों से जुड़े ऐसे ट्रांजैक्शन से कम से कम 98 करोड़ रुपये (पीओसी) का लाभ हुआ है।

सट्टेबाजी के पैसे हवाला, क्रिफ्टी व ट्रेड बेस्ट में निवेश:–

ईडी ने आगे बताया कि इन अवैध स‌ट्टेबाजी प्लेटफॉर्म से कमाए गए पैसे हवाला चैनलों, ट्रेड-बेस्ड मनी लॉद्धिरंग ट्रांजैक्शन और क्रिप्टो एसेट्स के इस्तेमाल से भारत के बाहर ट्रांसफर किए गए और बाद में उन्हें वापस लाकर विदेशी एफपीआईएस के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में इन्वेस्ट किया गया। ईडी द्वारा की गई जांच में एक जटिल कैशबैक स्कीम का भी पता चला, जिसमें ये एफपीआई कंपनियों भारतीय लिस्टेड कंपनियों में भारी इन्वेस्ट करती थी और बदले में, इन कंपनियों के प्रमोटरों को इनवेस्टमेंट का 30 प्रतिशत से 40 प्रतिशत कैश में वापस देना होता था।

ऑनलाइन ऐप से हजारों करोड़ किया इकट्ठा:–

ईडी के अनुसार महादेव ऑनलाइन बुक और स्काई एक्सवेज डॉट काम जैसे अवैध सट्टेबाजी ऐप्स ने बड़ी मात्रा में पीओसी जेनरेट किया जिसे बेनामी बैंक खातों के जटिल जाल के माध्यम से लॉन्ड्रिंग की गई। यह भी पता चला है कि सौरभ चंद्राकर और अन्य लोगों ने महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जनता को धोखा दिया और ठगा। महादेव ऑनलाइन बुक एप्लिकेशन को कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइटों या मोबाइल एप्लिकेशन (ऐप) को ग्राहक हासिल करने और इन अवैध सट्टेबाजी खेलों/वेबसाइटों के लिए वित्तीय संचालन का ध्यान रखने की सुविधा के लिए बनाया गया था।

इस प्रक्रिया में, वेबसाइटों को इस तरह से हेरफेर किया गया था कि सभी ग्राहक अंततः पैसे खो देंगे। हजारों करोड रपये का फंड का किया गया और पहले से तय प्रॉफिट-शेयरिंग तरीके से बांटा गया। इसके अलावा बैंक खाते खोलने के लिए जाली क चोरी किए गए केवायसी का भी इस्तेमाल किया गया और अवैध सट्टेबाजी की कमाई को उनके मूल को छिपाने के लिए लेयर किया गया। इन सभी लेनदेन का न तो हिसाब रखा गया और न ही उन्हें टैक्स के दायरे में लाया गया।

 


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