शासन ने अटैचमेंट समाप्त करने का दिया आदेश, लेकिन छुरा शिक्षा विभाग में लगातार जारी हो रहे नए-नए प्रशासनिक प्रयोग; विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

छुरा (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ शासन ने शिक्षा विभाग में वर्षों से चली आ रही संलग्नीकरण (अटैचमेंट) व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय इस उद्देश्य से लिया था कि सभी शिक्षक अपने मूल विद्यालयों में रहकर शिक्षण कार्य करें और कार्यालयों तथा अन्य संस्थानों में अनावश्यक पदस्थापनाओं पर रोक लगे। लेकिन गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जारी हो रहे आदेश अब शासन की मंशा और स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था के बीच अंतर को लेकर नई बहस खड़ी कर रहे हैं।

देवभोग में आज भी भगवान जगन्नाथ लेते हैं ‘लगान’, 84 गांवों से जुड़ी है 170 साल पुरानी आस्था की अनूठी परंपरा

 

गंगा प्रकाश की पड़ताल में सामने आया है कि एक ओर शासन संलग्नीकरण समाप्त करने की कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर छुरा विकासखंड में अलग-अलग नामों से ऐसी व्यवस्थाएं जारी हैं, जिनसे विभागीय कर्मचारियों के बीच भ्रम और असंतोष की स्थिति बन रही है।

पहला मामला : शिक्षक को मिला प्रभारी ABEO का दायित्व

सबसे पहले सामने आया मामला शिक्षक (एल.बी.) विनोद कुमार सिन्हा का है। स्कूल शिक्षा विभाग, मंत्रालय द्वारा 10 जून 2026 को जारी आदेश के तहत अतरमरा में पदस्थ शिक्षक विनोद कुमार सिन्हा को प्रशासनिक आधार पर आगामी आदेश तक प्रभारी सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) का दायित्व सौंप दिया गया।
इस आदेश के सामने आने के बाद विभाग में यह चर्चा शुरू हो गई कि शिक्षक संवर्ग के कर्मचारी को प्रशासनिक दायित्व किस आधार पर सौंपा गया और इस प्रक्रिया में वरिष्ठता तथा विभागीय व्यवस्था का किस प्रकार पालन किया गया।

वरिष्ठता सूची ने बढ़ाया विवाद

मामला यहीं नहीं रुका। विभागीय वरिष्ठता सूची के अनुसार विनोद कुमार सिन्हा का नाम क्रमांक 1049 पर दर्ज है। वहीं उनसे पहले वरिष्ठता सूची में शामिल अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद हैं।
इसी कारण विभागीय कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि जब वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध हैं तो प्रशासनिक दायित्व सौंपने का आधार क्या रहा।

हाईकोर्ट के आदेश से भी मिली नई चर्चा

इसी दौरान छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा पारित WPS क्रमांक 4926/2026 के अंतरिम आदेश ने भी विभाग में नई चर्चा छेड़ दी।
इस आदेश में न्यायालय ने एक अन्य मामले में शासन के 04 अगस्त 2011, 16 मई 2012, 07 फरवरी 2013 एवं 14 जुलाई 2014 के परिपत्रों का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की उपेक्षा कर कनिष्ठ को उच्च पद का प्रभार दिए जाने के मुद्दे पर अंतरिम राहत प्रदान की थी। यद्यपि वह मामला अलग है और अभी विचाराधीन है, लेकिन विभागीय कर्मचारी इसे वरिष्ठता के सिद्धांत के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं।

अब नया आदेश फिर चर्चा में

इसी बीच विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, छुरा से एक और आदेश जारी हुआ। आदेश के अनुसार शासकीय प्राथमिक शाला धारतरा में पदस्थ शिक्षक के आकस्मिक निधन के बाद विद्यालय में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बनी। इसके बाद समीपस्थ विद्यालय से सहायक शिक्षक (एल.बी.) कु. दीप्ती साहू को अस्थायी रूप से अध्यापन कार्य के लिए धारतरा भेजने का आदेश जारी किया गया।

रथयात्रा के दौरान मूसलाधार बारिश में ढहा पुराना होटल, 9 से अधिक लोग दबे, बड़ा हादसा टला

आदेश में इसे अस्थायी व्यवस्था बताया गया है, लेकिन विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि एक शिक्षक को उसके मूल विद्यालय से हटाकर दूसरे विद्यालय में कार्य करने भेजा जा रहा है तो यह व्यवस्था व्यवहारिक रूप से पहले की प्रणाली से कितनी अलग है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

क्या बदला केवल नाम?

शासन ने स्पष्ट किया था कि संलग्नीकरण समाप्त होगा और शिक्षक अपने मूल विद्यालयों में कार्य करेंगे। लेकिन छुरा विकासखंड में पहले प्रशासनिक आधार पर प्रभारी पद का आदेश और अब अस्थायी अध्यापन व्यवस्था के आदेश सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या व्यवस्था वास्तव में बदली है या केवल उसका नाम बदला है।

बीईओ कार्यालय के आदेशों पर बढ़ी निगाहें

लगातार सामने आ रहे आदेशों के कारण अब विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली भी चर्चा का विषय बन गई है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि शासन की मंशा और स्थानीय स्तर पर जारी आदेशों में समानता बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और पारदर्शिता आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो।

शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा असर

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालयों में शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे और बार-बार प्रशासनिक व्यवस्थाओं के तहत उनका कार्यस्थल बदलेगा, तो इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ेगा। इसलिए प्रशासनिक निर्णय लेते समय शासन की नीति, स्थानीय आवश्यकता और विद्यार्थियों के हित—तीनों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

WhatsApp Facebook 0 Twitter 0 0Shares
Share.

About Us

Chif Editor – Prakash Kumar yadav

Founder – Gangaprakash

Contact us

📍 Address:
Ward No. 12, Jhulelal Para, Chhura, District Gariyaband (C.G.) – 493996

📞 Mobile: +91-95891 54969
📧 Email: gangaprakashnews@gmail.com
🌐 Website: www.gangaprakash.com

🆔 RNI No.: CHHHIN/2022/83766
🆔 UDYAM No.: CG-25-0001205

Disclaimer

गंगा प्रकाश छत्तीसगढ के गरियाबंद जिले छुरा(न.प.) से दैनिक समाचार पत्रिका/वेब पोर्टल है। गंगा प्रकाश का उद्देश्य सच्ची खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का है। जिसके लिए अनुभवी संवाददाताओं की टीम हमारे साथ जुड़कर कार्य कर रही है। समाचार पत्र/वेब पोर्टल में प्रकाशित समाचार, लेख, विज्ञापन संवाददाताओं द्वारा लिखी कलम व संकलन कर्ता के है। इसके लिए प्रकाशक, मुद्रक, स्वामी, संपादक की कोई जवाबदारी नहीं है। न्यायिक क्षेत्र गरियाबंद जिला है।

Ganga Prakash Copyright © 2025. Designed by Nimble Technology

You cannot copy content of this page

WhatsApp us

Exit mobile version