देवभाेग में पीएम आवास योजना में फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा – भंकचंद नायक ने समन्वयक पर लगाए गंभीर आरोप, कहा – गरीबों का हक छीन रहे जिम्मेदार

 

गरियाबंद/देवभोग (गंगा प्रकाश)। देवभोग में पीएम आवास योजना में फर्जीवाड़े – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि देश का हर गरीब परिवार पक्के मकान में रहे और किसी के सिर से छत न छिने। इस सपने को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना लागू की गई, लेकिन गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक से जो तस्वीर सामने आई है, उसने एक बार फिर सिस्टम की पोल खोल दी है। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना में खुलेआम फर्जीवाड़ा और लूट का खेल चल रहा है। आरोप है कि गरीबों के हक के पैसे का जमकर दुरुपयोग हो रहा है, और जिम्मेदार अधिकारियों पर पहले से ही कई शिकायतें लंबित हैं, लेकिन अब तक कार्रवाई शून्य है।

मामला देवभोग तहसील के कदलीमुड़ा गांव का है। यहां के सामाजिक कार्यकर्ता भंकचंद नायक ने जिला पंचायत गरियाबंद को ज्ञापन सौंपते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि गांव के कुलेश पिता कोमल नायक के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था। शासन के नियम के मुताबिक, पहले जिओ टैगिंग और निर्माण कार्य का सत्यापन होता है, तभी आवास की किश्तें जारी की जाती हैं। लेकिन यहां कुलेश ने अभी तक मकान निर्माण शुरू ही नहीं किया, बावजूद इसके उसके खाते में दो किश्तों की रकम आ चुकी है।

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भंकचंद नायक का कहना है – “कुलेश ने आवास की राशि निकालने के लिए दूसरे के बने हुए मकान के सामने खड़े होकर फर्जी फोटो खिंचवाया, जिससे उसके खाते में पैसा ट्रांसफर हो गया। वह रकम भी उसने मकान बनाने की बजाय अन्य निजी कामों में खर्च कर दी। अब तक उसका मकान एक ईंट भी नहीं रखा गया है। यह गरीबों के हक की खुली लूट है।”

समन्वयक पर पहले भी लगे हैं आरोप

भंकचंद नायक का आरोप है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में पीएम आवास समन्वयक विकास द्विवेदी की मिलीभगत है। उन्होंने कहा –  “यह पहला मामला नहीं है। विकास द्विवेदी के खिलाफ पहले भी कई लोग ज्ञापन दे चुके हैं। उनकी कार्यशैली पर हमेशा सवाल खड़े हुए हैं। लेकिन न तो जिला पंचायत ने और न ही जिला प्रशासन ने कभी गंभीरता से कार्रवाई की। अब अगर इस बार भी कार्यवाही नहीं होती तो मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन दूंगा। गरीबों के हक को लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”

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कैसे हुआ फर्जीवाड़ा – बड़ा सवाल

पीएम आवास योजना की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी मानी जाती है। जिओ टैगिंग, सत्यापन, फोटो अपलोड और निरीक्षण की लंबी प्रक्रिया के बाद ही पहली किश्त स्वीकृत होती है। फिर दूसरी किश्त के लिए निर्माण कार्य की स्थिति का ऑनलाइन सत्यापन किया जाता है। ऐसे में यदि निर्माण शुरू ही नहीं हुआ, फिर भी दो किश्तें जारी हो गईं, तो यह स्पष्ट करता है कि –

  •  समन्वयक से लेकर उच्च अधिकारियों तक मिलीभगत के बिना ऐसा संभव ही नहीं।
  • फोटो अपलोड, निरीक्षण और भुगतान प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा किया गया।
  • जिम्मेदारों ने गरीबों के हक के पैसों को अपनी जेब भरने का जरिया बना लिया।

भ्रष्ट सिस्टम से नाराज़ ग्रामीण

गांव के अन्य ग्रामीणों का भी कहना है कि पीएम आवास योजना में कमीशनखोरी और दलाली का खेल लंबे समय से चल रहा है। गरीब लोग डर के कारण खुलकर शिकायत नहीं कर पाते। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा –  “यहां आवास की स्वीकृति के लिए भी कमीशन देना पड़ता है। पैसे दो तो काम होगा, नहीं तो सूची से नाम काट देंगे। अब फर्जी फोटो से पैसा निकाल रहे हैं। गरीब के नाम की किश्त निकालकर खर्च कर देंगे, बाद में गरीब को ही दोष देंगे कि उसने मकान नहीं बनाया। यह योजना गरीबों के लिए है या दलालों के लिए?”

मुख्यमंत्री की कड़ी चेतावनी के बावजूद अधिकारी बेलगाम

हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि –  “यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी या समन्वयक आवास दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगे या घोटाला करे तो कलेक्टर पर सीधी जिम्मेदारी होगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

इसके बावजूद देवभोग ब्लॉक से लगातार भ्रष्टाचार की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ दिन पहले सरगीगुड़ा गांव में पांच हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप भी समन्वयक विकास द्विवेदी पर लगा था। अब इस फर्जी किश्त भुगतान मामले ने उनकी कार्यशैली को फिर कटघरे में ला खड़ा किया है।

क्या होगी कार्रवाई?

अब बड़ा सवाल है –

  • क्या कलेक्टर गरियाबंद इस मामले की खुली जांच कराएंगे?
  • क्या पीएम आवास योजना के पैसों का दुरुपयोग करने वालों पर एफआईआर होगी?
  • क्या विकास द्विवेदी जैसे अधिकारियों पर निलंबन और बर्खास्तगी जैसी सख्त कार्रवाई होगी?

भंकचंद नायक ने कहा है कि यदि इस बार भी जांच ठंडे बस्ते में गई तो वे पूरे गांव के साथ रायपुर जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे और आंदोलन भी करेंगे।

गरीबों का हक मत छीनो – भंकचंद नायक की अपील

अपनी बात खत्म करते हुए भंकचंद नायक ने कहा –  “प्रधानमंत्री जी गरीबों के लिए योजनाएं बनाते हैं। लेकिन यहां अधिकारी और कर्मचारी गरीबों का हक मारते हैं। यह व्यवस्था बदलनी होगी। गरीबों का हक मत छीनो।”


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