छुरा (गंगा प्रकाश)। जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित सुशासन तिहार 2026 इस बार छुरा विकासखंड में एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। ग्राम पटसिवनी में 05 मई को हुए कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए एक कथित बयान ने न केवल माहौल को गरमा दिया, बल्कि राजस्व अमले और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति भी पैदा कर दी।
कार्यक्रम में मौजूद रोहित साहू के संबोधन के दौरान पटवारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि बयान में “जूता-चप्पल से मारने” जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे पटवारी समुदाय में आक्रोश फैल गया। हालांकि इस बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसका असर तत्काल देखने को मिला।
पटवारियों का विरोध, तिहार का बहिष्कार
घटना के बाद राजस्व पटवारी संघ, तहसील शाखा छुरा ने आपात बैठक कर सर्वसम्मति से सुशासन तिहार 2026 के सभी कार्यक्रमों के बहिष्कार का निर्णय लिया। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल एक बयान नहीं, बल्कि पूरे राजस्व अमले के सम्मान पर चोट है। पटवारी शासन और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, ऐसे में उनके लिए इस तरह की भाषा अस्वीकार्य है, संघ ने स्पष्ट किया।
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कलेक्टर के नाम ज्ञापन, एसडीएम विशाल महाराणा को सौंपा
पटवारी संघ ने इस पूरे मामले को लेकर जिला कलेक्टर के नाम विस्तृत ज्ञापन तैयार कर छुरा के एसडीएम विशाल महाराणा को सौंपा। ज्ञापन में बयान पर आपत्ति दर्ज कराते हुए संबंधित जनप्रतिनिधि से सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कराने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि जब तक संतोषजनक पहल नहीं होती, बहिष्कार जारी रहेगा।
पहले भी विवादों में रहा कार्यकाल
गौरतलब है कि विधायक रोहित साहू का कार्यकाल पहले भी कई विवादों को लेकर चर्चा में रहा है। अवैध रेत खनन के मामले में पत्रकारों के साथ हुई मारपीट की घटना के दौरान माफियाओं के हौसले बुलंद रहने के आरोप लगे थे। बाद में पत्रकारों के साथ सहानुभूति और समर्थन का प्रदर्शन जरूर किया गया, लेकिन उस समय की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल उठे थे।
इसी तरह राजिम कुंभ मेला के दौरान कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाने का मामला भी सुर्खियों में रहा। इसके अलावा विभिन्न बैठकों में उच्च अधिकारियों को सख्त लहजे में फटकार लगाना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा माना जाता रहा है। हालांकि समर्थक इसे “कड़क प्रशासनिक रवैया” बताते हैं, वहीं आलोचक इसे “अनुचित सार्वजनिक व्यवहार” करार देते हैं।
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प्रशासनिक तंत्र पर असर की आशंका
पटवारियों के बहिष्कार के फैसले से प्रशासनिक कार्यों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। नामांतरण, सीमांकन, फसल सर्वेक्षण और राहत वितरण जैसे कार्य सीधे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में सुशासन तिहार के उद्देश्य और उसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
सियासी हलचल तेज, समाधान पर टिकी नजर
पूरा घटनाक्रम अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। कर्मचारी संगठन इसे “सम्मान का मुद्दा” बता रहे हैं, वहीं विपक्ष के लिए यह सरकार को घेरने का अवसर बन सकता है। पटवारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
फिलहाल नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधि इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं। सुशासन तिहार 2026 का यह प्रकरण यह सवाल जरूर खड़ा कर रहा है कि क्या सुशासन के साथ-साथ शासकीय कर्मचारियों का सम्मान भी उतनी ही प्राथमिकता में है।
