जांच टीम बदली, देरी की वजह पर अधिकारियों के अलग-अलग बयान; डीईओ बोले—नई टीम से दो-तीन दिन में रिपोर्ट की उम्मीद
छुरा (गंगा प्रकाश)। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पोंड में 2.50 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अब जांच रिपोर्ट के इंतजार में अटक गया है। शाला समिति अध्यक्ष की शिकायत के बाद गरियाबंद कलेक्टर तक पहुंचे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 7 सितंबर 2026 को तीन सदस्यीय जांच दल गठित कर तीन दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। लेकिन निर्धारित समय-सीमा गुजरने के 17 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी है।
मामले में अब जांच दल में बदलाव किया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर के अनुसार जांच अधिकारी छुरा बीईओ के.एल. मतावले के निवेदन पर जांच दल में शामिल लेखापाल को बदलकर दूसरे कर्मचारी को शामिल किया गया है। नई टीम के माध्यम से जांच कराई जाएगी और दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
देरी की वजह पर दो अधिकारियों के अलग-अलग बयान
जांच में देरी को लेकर जब जांच अधिकारी एवं छुरा बीईओ के.एल. मतावले से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि जांच दल में एक ही कार्यालय से दो सदस्यों को रखे जाने के कारण जांच नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि टीम में बदलाव के लिए जिला कार्यालय को निवेदन किया गया था।
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वहीं जांच प्रस्तुतकर्ता बनाए गए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाटशिवनी के प्राचार्य प्रेमलाल ध्रुव ने जांच में देरी की अलग वजह बताई। उनके अनुसार जांच सहयोगी लेखापाल भागवत राम साहू की तबीयत खराब होने के कारण जांच नहीं हो सकी।
दोनों अधिकारियों की ओर से जांच शुरू नहीं होने की अलग-अलग वजह सामने आने के बाद मामले में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर 7 सितंबर को जारी आदेश के बाद निर्धारित तीन दिनों में जांच शुरू क्यों नहीं हो सकी?
डीईओ बोले—बीईओ के निवेदन पर बदली गई टीम
गरियाबंद जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने बताया कि पोंड स्कूल मामले में पहले ही तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था। जांच अधिकारी के.एल. मतावले ने जांच दल में शामिल लेखापाल को बदलने का निवेदन जिला कार्यालय से किया था। इसी के आधार पर दूसरा जांच आदेश जारी किया गया है।
डीईओ ने कहा कि अब नई टीम जांच करेगी और दो से तीन दिन में जांच रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तीन दिन की समय-सीमा से अब दो-तीन दिन की नई उम्मीद
मामले में सबसे अहम सवाल जांच की समय-सीमा को लेकर है। 7 सितंबर को जारी आदेश में तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। अब 17 दिन गुजरने के बाद जांच दल बदला गया है और विभाग दो-तीन दिन में नई रिपोर्ट आने की उम्मीद जता रहा है।
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ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि नई जांच टीम कब मौके पर पहुंचती है, वित्तीय दस्तावेजों की जांच कब शुरू करती है और क्या इस बार तय समय में रिपोर्ट प्रस्तुत हो पाती है।
2.50 लाख के हिसाब-किताब की होगी पड़ताल
शाला समिति अध्यक्ष की शिकायत में करीब 2.50 लाख की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला उठाया गया है। जांच में स्कूल के बिल-वाउचर, कैशबुक, भुगतान अभिलेख, बैंक संबंधी दस्तावेज तथा अन्य वित्तीय रिकॉर्ड महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
हालांकि, अभी तक आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। वित्तीय अनियमितता के आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। विभाग ने भी जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
अब नई जांच टीम पर टिकी नजर
कलेक्टर तक शिकायत पहुंचने के बाद तीन दिन में जांच पूरी करने का आदेश जारी हुआ था। लेकिन 17 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आने से प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। अब जांच टीम बदले जाने के बाद विभाग ने दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद जताई है।
क्या नई टीम स्कूल के वित्तीय अभिलेखों की बारीकी से जांच करेगी? क्या 2.50 लाख के हिसाब में कोई गड़बड़ी सामने आएगी? या शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में प्रमाणित नहीं होंगे?
इन सवालों का जवाब अब नई जांच टीम की रिपोर्ट से ही सामने आएगा।
जांच में देरी पर तीन अधिकारियों के अलग-अलग पक्ष
बीईओ के.एल. मतावले: जांच टीम में एक ही कार्यालय से दो सदस्यों को रखे जाने के कारण जांच नहीं हो सकी। टीम में बदलाव के लिए जिला कार्यालय को निवेदन किया गया।
प्राचार्य प्रेमलाल ध्रुव: जांच सहयोगी लेखापाल भागवत राम साहू की तबीयत खराब होने के कारण जांच नहीं हो सकी।
डीईओ राजेश चंद्राकर: तीन सदस्यीय जांच दल पहले ही गठित किया गया था। जांच अधिकारी के निवेदन पर लेखापाल को बदलने के लिए दूसरा आदेश जारी किया गया है। नई टीम से दो-तीन दिन में रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
