महाराष्ट्र–तेलंगाना सीमा पर अचानक घिरी संदिग्धों की टोली, छह हिरासत में; 43 हड्डियां, दो कैनाइन और तीन बाइक बरामद
महाराष्ट्र/आलापल्ली (गंगा प्रकाश)। जंगल के रास्तों पर सब कुछ सामान्य नजर आ रहा था, लेकिन जांच एजेंसियों को मिली एक खुफिया सूचना ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी। महाराष्ट्र–तेलंगाना सीमा के पास आलापल्ली के जिमेला इलाके में 26 सितंबर को कई एजेंसियों की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की तो सामने आया वन्यजीव तस्करी से जुड़ा कथित नेटवर्क। कार्रवाई के बाद जो बरामदगी हुई, उसने जांच को और गंभीर बना दिया।
मौके से एक जीवित मादा पैंगोलिन और उसका नवजात शिशु, बाघ की 43 संदिग्ध हड्डियां, बाघ के दो कैनाइन दांत और तीन मोटरसाइकिलें जब्त की गईं। कार्रवाई में महाराष्ट्र के जिमेला, कोन्सरी, कोकोपाड़ा, गोमनीटोला और आलापल्ली क्षेत्र से छह संदिग्धों को हिरासत में लिया गया।
मां और नवजात की बरामदगी ने बढ़ाया रहस्य
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा ध्यान जीवित मादा पैंगोलिन और उसके नवजात शिशु की बरामदगी पर है। जांच एजेंसियों के अनुसार, ऑपरेशन सेफ पैसेज 3.0 के तहत कार्रवाई का फोकस जीवित पैंगोलिन और बाघ से जुड़े वन्यजीव अवशेषों की कथित तस्करी पर है।
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अब जांच केवल बरामद सामग्री तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वन्यजीव सामग्री का स्रोत कहां था, इसे कौन संभाल रहा था, परिवहन कौन कर रहा था और इसके पीछे कथित बिचौलियों की भूमिका क्या थी।
43 हड्डियां… और दो कैनाइन ने खड़े किए सवाल
बरामद 43 संदिग्ध बाघ की हड्डियां और दो कैनाइन दांत अब जांच का अहम हिस्सा हैं। इनकी पहचान और प्रकृति की पुष्टि के लिए फोरेंसिक परीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मामले में आलापल्ली वन क्षेत्र के अंतर्गत वन्यप्राणी अपराध क्रमांक 08120/202986 दर्ज किया गया है। जब्त सामग्री को जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए सुरक्षित रखा गया है।
कौन चला रहा था रास्तों का यह नेटवर्क?
ऑपरेशन सेफ पैसेज 1.0 की फॉलो-अप जांच में अहेरी–सिरोंचा–जिंगानूर–बीजापुर बेल्ट को वन्यजीव तस्करी के महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किए जाने का उल्लेख प्रेस नोट में है। यही क्षेत्र महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ से जुड़ता है।
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इसी पृष्ठभूमि में सेफ पैसेज 3.0 के तहत वर्तमान कार्रवाई की गई। जांच का उद्देश्य कथित तस्करी श्रृंखला में स्रोत, हैंडलर, परिवहनकर्ता और बिचौलियों तक पहुंचना बताया गया है।
एक कार्रवाई, कई एजेंसियां
यह कार्रवाई वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) पश्चिमी क्षेत्र, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) MP-CG, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) और आलापल्ली वन प्रभाग की संयुक्त टीम ने की। अलग-अलग एजेंसियों की खुफिया जानकारी और मैदानी अनुभव को एक साथ जोड़कर कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
ऑपरेशन थंडर से भी जुड़ी कड़ी
यह कार्रवाई INTERPOL और World Customs Organization के समन्वय से चल रहे ऑपरेशन थंडर 2026 के दौरान हुई है। यह अभियान 14 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 तक वन्यजीव और वानिकी अपराध के खिलाफ चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय एवं अंतरराज्यीय स्तर पर खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और संगठित वन्यजीव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करना है।
अब असली सवाल बरामदगी से आगे का है—मां और उसके नवजात पैंगोलिन को वहां तक कौन लाया, बाघ के अवशेष कहां से आए और इन सबको आगे कहां ले जाने की तैयारी थी? इन सवालों के जवाब जांच, फोरेंसिक परीक्षण और आगे की कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।
