Brekings: “बिहान की ज़मीन पर कब्ज़ा: छुरा में गरीब दीदियों के अधिकारों पर हमला, PRP और रसूखदार दीदियों पर गंभीर आरोप!”

छुरा (गंगा प्रकाश)।बिहान की ज़मीन पर कब्ज़ा: छत्तीसगढ़ सरकार की बहुचर्चित और महिला सशक्तिकरण की प्रतीक योजना “बिहान” इन दिनों गरियाबंद ज़िले के छुरा ब्लॉक के कनसिंधी आदर्श संकुल संगठन (CLF) में सवालों के घेरे में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक भावुक और तीखे शिकायती पत्र ने शासन और प्रशासन दोनों की नींद उड़ा दी है।

इस पत्र में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया गया है कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहीं सैकड़ों दीदियाँ — जिन्हें बिहान योजना के तहत नेतृत्व, स्वरोजगार और सम्मान दिलाने का उद्देश्य था — आज उन्हीं के बनाए संगठन में दबाई जा रही हैं, डराई जा रही हैं, और उन्हें चुप कराया जा रहा है।

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वर्चस्व का खेल: PRP पर आरोप, गरीब दीदियाँ हाशिए पर

शिकायत में मुख्य रूप से PRP (Professional Resource Person) लिकेश्वरी दीदी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दीदियों का कहना है कि वे लगातार गरीब सदस्यों को ऊँचे स्वर में डाँटती हैं, मीटिंग में बोलने नहीं देतीं और अमीर व नौकरीपेशा दीदियों को संरक्षण देकर संगठन का संचालन अपने अनुसार कर रही हैं।

शिकायती पत्र में उल्लेख है:

“गरीब दीदियों को लाल आंख दिखा कर, उंगली दिखा कर, दबाव में रख कर उनकी आवाज़ कुचल दी जा रही है। RBK और FLCRP की कुछ अमीर दीदियाँ भी इसमें मिली हुई हैं।”

गरीब दीदियों का योगदान और आज की हकीकत

पत्र में एक दीदी का अनुभव साझा किया गया है, जो 2012-13 से बिहान योजना से जुड़ी रहीं और बिना किसी मानदेय के वर्षों तक गाँव-गाँव जाकर समूह बनवाने में जुटी रहीं। उन्होंने ADEO और बैंक कर्मियों के साथ समन्वय बनाकर मिशन को गाँव में लागू किया।

लेकिन आज वही दीदी संगठन में उपेक्षित हैं। उनके अनुसार:

“जिन्होंने कभी इस मिशन को हाथों से उठाया था, आज उन्हीं के सामने ऊँची आवाज़ में आदेश दिए जा रहे हैं। हमारे अधिकार अब अमीर दीदियों की बपौती बन गए हैं।”

बिहान मिशन की मूल भावना का उल्लंघन

बिहान योजना का मूल सिद्धांत है कि गरीब, दलित, वंचित और आदिवासी महिलाएँ ही समूह की कर्णधार होंगी। नौकरीपेशा या संपन्न वर्ग की महिलाएं केवल सदस्य बन सकती हैं, न कि पदाधिकारी।

लेकिन कनसिंधी CLF में यह पूरा नियम धज्जियाँ उड़ाता दिखाई दे रहा है। अमीर दीदियों को संगठन का चेहरा बना दिया गया है, जबकि असली हितग्राहियों को किनारे कर दिया गया है।

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प्रशासन की चुप्पी: सीईओ से कोई जवाब नहीं

इस गंभीर मामले पर जब हमारे गंगा प्रकाश मीडिया प्रतिनिधि ने जनपद पंचायत छुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सतीश चंद्रवंशी से संपर्क करने की कोशिश की —

तो उन्होंने ना कॉल उठाया और ना ही वॉट्सऐप पर भेजे गए संदेश का कोई उत्तर दिया।

प्रशासन की यह चुप्पी दीदियों के आक्रोश को और बढ़ा रही है। सोशल मीडिया पर भी लोग पूछ रहे हैं:

“जब शासन की योजनाओं में घोटाला होता है, तब जिम्मेदार अफसर गायब क्यों हो जाते हैं?”

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विरोध, उठीं न्याय की मांगें

सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके इस पत्र के शब्द बेहद सख्त हैं। उसमें लिखा गया है:

“यहाँ के बिहान के अधिकारी देशी मुर्गा में बिक गये हैं। सहेंगे नहीं कहेंगे — चुप्पी तोड़ेंगे न्याय के खातिर!”

इसने गांव-गांव में बहस को जन्म दे दिया है। सैकड़ों दीदियाँ इसे अपना अपमान मान रही हैं और कार्यवाही की मांग कर रही हैं।

अब क्या होगा आगे?

दीदियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि जल्द ही:

  • CLF में निष्पक्ष जांच नहीं होती,
  • अमीर दीदियों को संगठन से हटाया नहीं जाता,
  • PRP द्वारा किए गए व्यवहार की जांच नहीं होती,

तो वे प्रशासनिक कार्यालयों के घेराव से लेकर बिहान कार्यालय के सामने धरने तक का रास्ता अख्तियार करेंगी।

निष्कर्ष:

बिहान योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, यह महिलाओं की आवाज़ है। यदि उन्हीं की आवाज़ को कुचला गया तो यह न केवल योजना का अपमान है, बल्कि समाज में भरोसे और न्याय के मूलभूत मूल्य पर आघात है।

अब यह शासन-प्रशासन पर निर्भर है कि वह इसे एक ‘आम शिकायत’ माने या एक ‘जन चेतावनी’।

सवाल बड़ा है: क्या गरीब की आवाज़ केवल कागज़ पर सुनने लायक है, या धरातल पर भी?


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