Brekings: रुवाड़ पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना बना भ्रष्टाचार का गढ़, मंत्री के निर्देश पर जांच तेज़, 25 जून को होगी खुली जांच

 

छुरा (गंगा प्रकाश)। रुवाड़ पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना बना भ्रष्टाचार का गढ़, गरियाबंद जिले की आदिवासी बहुल पंचायत रुवाड़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का जो खुलासा हुआ है, उसने सरकार और प्रशासन दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पहले कागजों में पूरे हो चुके दर्जनों अधूरे मकानों ने ग्रामीणों की उम्मीदों को तोड़ा, अब जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।

लेकिन जब इस घोटाले की गूंज प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल तक पहुँची, तो प्रशासन हरकत में आ गया। मंत्री के निर्देश पर 24 घंटे के भीतर जांच का आदेश जारी किया गया और अब यह तय हो गया है कि 25 जून 2025 को सुबह 11 बजे पंचायत कार्यालय रुवाड़ में खुली जांच की कार्यवाही होगी।

यह खबर अब गरियाबंद जिले से निकलकर राजधानी तक चर्चा का विषय बन चुकी है।

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भ्रष्टाचार की फाइल खुली, जांच की घड़ी आई

ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब उन्होंने हार मानने के बजाय लड़ाई आगे बढ़ाई। ग्रामवासियों ने मंत्री बघेल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें फर्जी जियो टैगिंग, रिश्वतखोरी, अधूरे निर्माण और दस्तावेजी हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए गए।

मंत्री ने तुरंत कलेक्टर को निर्देश दिए कि इस मामले की गहराई से जांच की जाए और दोषियों को बख्शा न जाए। इसके बाद ही जिला पंचायत के उप संचालक पंचायत कार्यालय, गरियाबंद ने जांच आदेश जारी किया और 25 जून की तारीख मुकर्रर की।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच रुवाड़ पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 30 से अधिक मकान स्वीकृत किए गए थे। हर मकान पर लगभग ₹1.20 लाख की राशि स्वीकृत हुई, लेकिन ज़मीनी सच्चाई बेहद चौंकाने वाली निकली।

  • कई मकान शुरू ही नहीं हुए, लेकिन कागजों में “पूर्ण” दिखा दिए गए।
  • कई मकान अधूरे छोड़ दिए गए, फिर भी किश्त की पूरी राशि जारी कर दी गई।
  • फर्जी जियो टैगिंग कर पोर्टल पर पुराने घरों की तस्वीरें और ग़लत लोकेशन अपलोड की गईं।
  • लाभार्थियों से ₹5,000 तक की रिश्वत खुलेआम मांगी गई।

जांच की तैयारी, लेकिन निष्पक्षता पर शंका

जांच आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि 25 जून को सुबह 11 बजे पंचायत कार्यालय रुवाड़ में सचिव, सरपंच, रोजगार सहायक, आवास मित्र, तकनीकी सहायक, और शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति अनिवार्य होगी। वहीं जांच टीम दस्तावेज़ों, पोर्टल डाटा, किश्तों के भुगतान, लाभार्थियों के बयान और निर्माण स्थलों का सत्यापन करेगी।

लेकिन ग्रामीणों को इस जांच की पारदर्शिता पर शक है। उनका सवाल है कि अगर जांच उन्हीं विभागीय अधिकारियों के ज़रिए कराई जा रही है जो अब तक चुप रहे, तो क्या वे खुद के खिलाफ निष्पक्ष जांच करेंगे?

दोषियों की लिस्ट लंबी, लेकिन कार्रवाई शून्य

पद भूमिका:

  1. आवास मित्र फर्जी जियो टैगिंग
  2. लाभार्थियों से रिश्वत
  3. रोजगार सहायक मस्टर रोल और निर्माण रिकॉर्ड में गड़बड़ी
  4. तकनीकी सहायक मूल्यांकन रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा
  5. जनपद पंचायत सीईओ सत्यापन प्रक्रिया की अनदेखी
  6. जिला पंचायत अधिकारी निगरानी में विफलता
  7. कलेक्टर गरियाबंद प्रशासनिक जिम्मेदारी तय नहीं

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जनता का सवाल – क्या होगा सिर्फ दिखावा?

गांव के लोगों ने साफ कहा है कि वे 25 जून को पंचायत कार्यालय में बड़ी संख्या में उपस्थित होंगे और सामूहिक रूप से पूछेंगे कि:

  • क्यों उनके सपनों का घर अधूरा छोड़ दिया गया?
  • जो पैसे निकाले गए, वह वापस कौन करेगा?
  • क्या छोटे कर्मचारी ही बलि का बकरा बनेंगे या बड़े अफसरों पर भी कार्रवाई होगी?
  • जिनके नाम पर मकान बने, क्या उन्हें दोबारा आवास मिलेगा?

 अब नहीं रुकी तो हर योजना का भरोसा टूटेगा

यह मामला अब केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रह गया है, यह जनता के विश्वास का सवाल बन चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना अगर सिस्टम की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ेगी, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं लोगों का होगा, जिनके लिए यह योजना बनी थी – गरीब, वंचित, आदिवासी।

अब देखना यह होगा कि 25 जून को होने वाली जांच सिर्फ औपचारिकता बनती है या कोई ठोस कार्रवाई का रास्ता खुलता है।


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