Brekings: नक्सल मोर्चे पर गरियाबंद पुलिस की बड़ी कामयाबी, जंगल में डंप किया गया नक्सली राशन ज़ब्त — कोबरा और जिला बल की संयुक्त कार्रवाई

 

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त कार्रवाई लगातार रंग ला रही है। सोमवार को गरियाबंद जिले के घने जंगलों में जिला बल और कोबरा 207 बटालियन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में राशन सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं बरामद कीं। इस कार्रवाई को नक्सलियों की रसद सप्लाई लाइन पर एक सटीक और मजबूत प्रहार माना जा रहा है।

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गुप्त सूचना पर चली सर्चिंग, नक्सली भाग खड़े हुए

मामला गरियाबंद जिले के थाना मैनपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तौरेंगा जंगल का है। सुरक्षा एजेंसियों को खुफिया तंत्र से जानकारी मिली थी कि इंदागांव एरिया के घने जंगलों में नक्सलियों की हलचल देखी गई है और वहां उनके द्वारा राशन व अन्य जरूरी सामान डंप किया गया है। सूचना के सत्यापन और कार्रवाई के उद्देश्य से जिला बल गरियाबंद (E-30) और सीआरपीएफ की कोबरा 207 बटालियन की संयुक्त टीम को रवाना किया गया।

टीम जैसे ही जंगल के अंदरूनी हिस्से में पहुँची, उन्होंने कुछ संदिग्ध गतिविधियाँ नोट कीं। सुरक्षाबलों को अपनी ओर आता देख नक्सली घने जंगलों का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। हालांकि इस दौरान टीम को नक्सलियों के डंप किए गए राशन स्टॉक और अन्य सामग्री का पता चल गया।

क्या-क्या मिला जंगल से?

जंगल में चलाए गए व्यापक सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को जो सामग्री बरामद हुई, उसमें बड़ी मात्रा में चावल, दाल, तेल, नमक जैसी राशन सामग्री शामिल है। इसके अलावा कुछ प्राथमिक चिकित्सा सामग्री, सोलर टॉर्च, बैटरी, नक्सली पर्चे और दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं भी बरामद हुई हैं।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह राशन स्टॉक नक्सलियों ने आगामी महीनों की योजना के तहत छिपाकर रखा था। इससे यह संकेत मिलता है कि इलाके में बड़ी नक्सली बैठक या कैम्प स्थापित करने की तैयारी चल रही थी, जिसे सुरक्षाबलों की सतर्कता ने समय रहते नाकाम कर दिया।

गरियाबंद पुलिस की माओवादियों को खुली चेतावनी और भावनात्मक अपील

कार्रवाई के पश्चात गरियाबंद पुलिस ने माओवादियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि हिंसा और अवैध गतिविधियों के लिए अब इस ज़मीन पर कोई जगह नहीं बची है। साथ ही, पुलिस ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सभी सक्रिय माओवादियों और उनके सहयोगियों से हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की है।

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पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है:

“जो लोग जंगल में हिंसा और भय के बीच जीवन बिता रहे हैं, वे आत्मसमर्पण करें और शासन की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। आज समाज बदल रहा है, सरकार उन्हें आत्मसमर्पण के बाद सुरक्षित, सम्मानजनक और खुशहाल जीवन की सभी सुविधाएं प्रदान करती है।”

शासन की आत्मसमर्पण नीति क्या है?

छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को कई लाभ दिए जाते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • भयमुक्त और स्वतंत्र जीवन
  • स्वरोजगार एवं प्रशिक्षण की सुविधा
  • निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं
  • आवासीय सहायता
  • पात्रता अनुसार शासकीय नौकरी

इसके लिए इच्छुक व्यक्ति निकटवर्ती थाना, पुलिस चौकी, सुरक्षा कैंप या हेल्पलाइन नंबर 94792-27805 पर संपर्क कर सकते हैं।

विशेष संदेश: बंदूक नहीं, अब विकास चाहिए

इस पूरी कार्रवाई ने एक बार फिर साबित किया है कि राज्य सरकार और सुरक्षाबल अब किसी भी नक्सली गतिविधि को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। अब विकास की राह में रुकावट डालने वाले हर तत्व को कड़ी जवाबदेही झेलनी पड़ेगी।

लेकिन साथ ही यह भी एक अवसर है उन युवाओं के लिए, जो भ्रम में आकर हथियार थाम चुके हैं — कि वे लौट सकते हैं। जंगल से निकलकर, अपने घर-गाँव में लौटकर, अपने माता-पिता, भाई-बहनों और बच्चों के साथ एक सामान्य और शांतिपूर्ण जीवन जी सकते हैं।


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