भैरमगढ़ ब्लॉक के नेलस्नार स्वास्थ्य केंद्र का हाल, जिम्मेदार अधिकारी के गोलमोल जवाब से उठे सवाल
एक तरफ जिले में मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इससे निपटने की जिम्मेदारी संभाल रहे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। भैरमगढ़ विकासखंड के नेलस्नार स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती मरीजों को मच्छरदानी तक नसीब नहीं हो रही है। वार्ड में लगे एक भी बेड पर मच्छरदानी नहीं मिली, जबकि यही क्षेत्र मलेरिया के लिहाज से अतिसंवेदनशील माना जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में मच्छरों से बचाव का कोई इंतजाम नहीं है। मरीज पहले से ही बीमारी से जूझ रहे हैं, ऊपर से मच्छरों का प्रकोप उनकी तकलीफ और बढ़ा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में ही मच्छरों से सुरक्षा नहीं मिलेगी, तो मलेरिया पर नियंत्रण कैसे होगा।
पक्ष जानने पर मिला गोलमोल जवाब
जब इस संबंध में नेलस्नार के खंड चिकित्सा अधिकारी आदित्य साहू से बात करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने संतोषजनक जवाब देने के बजाय गोलमोल बातें कहीं। उनका कहना था कि मच्छरदानियां सुखाने के लिए भेजी गई हैं।
लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या मच्छरदानी सूखने में 5 से 7 दिन लग जाते हैं? जबकि विगत 2 से 3 दिनों में क्षेत्र में बारिश भी नहीं हुई है। ऐसे में मच्छरदानियों का न सूख पाना विभागीय कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों और मरीजों के परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की इस लापरवाही से मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में मच्छरदानी जैसी बुनियादी सुविधा का न होना गंभीर चिंता का विषय है। लोगों ने कहा कि शासन मलेरिया उन्मूलन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से मांग की है कि नेलस्नार स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण कराया जाए और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही वार्डों में तत्काल मच्छरदानी सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को मजबूती मिल सके।
