CG BREKINGS: बिहान विवाद: दीदी की शिकायत, वायरल पत्र, फिर माफीनामा – आखिर क्या था सच?

 

छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। बिहान विवाद : छत्तीसगढ़ सरकार की महिला सशक्तिकरण की प्रमुख योजना “बिहान मिशन” को लेकर गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड में बीते दिनों एक ऐसा विवाद सामने आया, जिसने सिस्टम, संगठन और साख — तीनों को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया।

कनसिंधी संकुल संगठन (CLF) की एक महिला सदस्य द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल किए गए शिकायती पत्र ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी। लेकिन जब अगले ही दिन उसी दीदी ने लिखित माफीनामा देकर “गलती मान ली”, तो कई नए सवाल जन्म लेने लगे।

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आखिर ये शिकायत असली थी या रणनीतिक? माफीनामा आत्म-चिंतन का परिणाम था या दबाव का? क्या बिहान जैसे संवेदनशील अभियान में अब भी पारदर्शिता की ज़रूरत बाकी है?

सबसे पहले सवाल: शिकायत सही थी या सिर्फ आपसी मतभेद?

वायरल शिकायत पत्र में सीधे-सीधे आरोप लगाए गए कि:

  • अमीर और प्रभावशाली दीदियाँ समूहों पर हावी हैं।
  • गरीब महिलाओं को डराकर चुप कराया जा रहा है।
  • PRP (प्रगतिशील ग्रामीण प्रोफेशनल) पद पर मनमानी हो रही है।
  • बिहान योजना के प्रशिक्षण में जो सिद्धांत सिखाए जाते हैं, ज़मीन पर उनका पालन नहीं होता।

दीदी ने यहां तक लिखा कि “यहां के बिहान अधिकारी देशी मुर्गा में बिक गए हैं।” ऐसे वाक्य भावनात्मक ही नहीं, बल्कि सिस्टम पर तीखा हमला माने जा रहे थे।

दूसरा सवाल: क्या शिकायत को दबाया गया?

इस पत्र की खबर प्रकाशित होते ही जनपद पंचायत के सीईओ सतीश चंद्रवंशी हरकत में आए। उन्होंने अपने बीपीएम (ब्लॉक परियोजना प्रबंधक) को तुरंत मौके पर भेजा और वस्तुस्थिति की जानकारी ली।

श्री चंद्रवंशी ने गंगा प्रकाश संवाददाता से बातचीत में कहा:

 “जांच में पाया गया कि दीदियों के बीच आपसी गलतफहमियां थीं। हमारे बीपीएम ने समझाइश दी, संवाद स्थापित हुआ और शिकायतकर्ता दीदी ने अपनी गलती मानी।”

यहां सवाल यह भी उठता है:

क्या संवाद ने समाधान दिया, या दीदी को चुप कर दिया गया?

तीसरा सवाल: माफीनामा की टाइमिंग क्या कहती है?

शिकायत पत्र वायरल होने के अगले ही दिन माफीनामा सामने आ गया। दीदी ने लिखा कि वो भावनात्मक आवेश में थीं, जो बातें लिखीं वो अतिरंजना थी और वे अब क्षमा चाहती हैं।

  • क्या यह माफीनामा आत्म-प्रेरित था?
  • या फिर किसी सामाजिक या संगठनात्मक दबाव में आया?

इन सवालों के बीच जनता और समूह की अन्य महिलाएं अभी भी मौन हैं, लेकिन हलचलें जारी हैं।

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प्रशासन का पक्ष – शांतिपूर्ण समाधान की मिसाल

जहां पूरे मामले में कई सवाल उठ रहे हैं, वहीं जनपद पंचायत छुरा के सीईओ सतीश चंद्रवंशी ने प्रशंसनीय कार्य किया। न कोई आरोप प्रत्यारोप, न कोई राजनीतिक रंग – उन्होंने शांति, संवाद और तत्परता के साथ स्थिति को संभाला।

उन्होंने साफ कहा:

“बिहान योजना सशक्तिकरण की योजना है, हम किसी भी दीदी की बात अनसुनी नहीं करते। किसी को डरने की ज़रूरत नहीं। शिकायत हो तो प्रशासन तत्पर है।”

यह बयान भरोसेमंद भी है और उम्मीद बढ़ाने वाला भी।

चौथा सवाल: क्या ये मामला यहीं थम जाएगा?

बिहान योजना की जड़ें गांव-गांव में हैं, और यह केवल वित्तीय मदद नहीं बल्कि सम्मान और नेतृत्व की भावना से जुड़ा है।

इस घटना ने एक बात साफ कर दी है कि –

अब महिलाएं सवाल उठाना जान गई हैं, और जवाब देने के लिए सिस्टम को तैयार रहना पड़ेगा।

निष्कर्ष: सवाल उठे, समाधान मिला, पर निगरानी ज़रूरी

जनपद प्रशासन ने समय रहते मामले को संभाल लिया, जिससे विवाद बढ़ने से बच गया। श्री चंद्रवंशी का रवैया शांतिपूर्ण, समन्वयकारी और निष्पक्ष रहा – यही किसी योजना के संचालन के लिए ज़रूरी है।

लेकिन शिकायत पत्र से उठे सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं।

बिहान को “भीषण विवाद” बनने से रोक लिया गया, लेकिन अब ज़रूरत है – पारदर्शिता, संवाद और सतर्क निगरानी की।


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