कलेक्टर के आदेश का हवाला, ग्रामीण स्कूल में शिक्षक की कमी के बीच उठे सवाल; 36 घंटे बाद भी डीईओ की प्रतिक्रिया का इंतजार
छुरा (गंगा प्रकाश)। स्कूल शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण की व्यवस्था समाप्त किए जाने के बावजूद मैदानी स्तर पर शिक्षकों को मूल पदस्थापना से अलग विद्यालयों में ‘व्यवस्था’ के नाम पर सेवाएं दिए जाने का मामला सामने आया है। छुरा विकासखंड के पेंड्रा हाईस्कूल में पदस्थ शिक्षिका मधुबाला साहू वर्तमान में रानीपरतेवा हायर सेकंडरी स्कूल में व्यवस्था के तहत कार्य कर रही हैं। मामले में प्रशासनिक आदेश का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन व्यवस्था की जरूरत, नियम और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पेंड्रा हाईस्कूल में पदस्थ शिक्षिका मधुबाला साहू को कलेक्टर के आदेश के आधार पर रानीपरतेवा हायर सेकंडरी स्कूल में व्यवस्था दी गई है। दोनों विद्यालयों के बीच लगभग 20 किलोमीटर की दूरी बताई जा रही है। पेंड्रा हाईस्कूल की प्राचार्य सुश्री थदाणी ने शिक्षिका के कलेक्टर आदेश के तहत रानीपरतेवा में व्यवस्था पर होने की पुष्टि की है। वहीं रानीपरतेवा हायर सेकंडरी स्कूल के प्राचार्य एमआर खान ने भी उनके वहां व्यवस्था के तहत कार्यरत होने की बात कही है। उनका कहना है कि वापस भेजने का आदेश प्राप्त होने पर शिक्षिका को मूल संस्था में भेज दिया जाएगा।
शिकायत के बाद व्यवस्था, लेकिन सवाल शिक्षक की जरूरत पर
बताया जा रहा है कि पेंड्रा गांव के ग्रामीणों की शिकायत के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से नोटशीट के माध्यम से प्रस्ताव तैयार किया गया और इसके आधार पर कलेक्टर स्तर से व्यवस्था संबंधी आदेश जारी हुआ। हालांकि अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी विद्यालय में किसी शिक्षक को लेकर शिकायत या प्रशासनिक आवश्यकता उत्पन्न हुई थी, तो वैकल्पिक व्यवस्था के लिए ऐसे विद्यालय का चयन किस आधार पर किया गया, जहां शिक्षकों की वास्तविक आवश्यकता कितनी है, यह सार्वजनिक नहीं है।
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स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि छुरा विकासखंड के कई दूरस्थ विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता बनी हुई है। रुवाड, रसेला, कनसिंघी और कोठीगांव जैसे विद्यालयों में स्वीकृत पदों के मुकाबले कार्यरत शिक्षकों की संख्या की जानकारी सामने आने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि व्यवस्था का निर्णय शैक्षणिक आवश्यकता के अनुरूप था या नहीं।
‘संलग्नीकरण बंद’ तो फिर व्यवस्था का आधार क्या?
मामले का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण की व्यवस्था समाप्त किए जाने की बात कही जा रही है, तो किसी कर्मचारी को मूल पदस्थापना से अलग विद्यालय में ‘व्यवस्था’ के नाम पर कार्य करने की अनुमति किस नियम, आदेश अथवा प्रशासनिक प्रावधान के तहत दी जा रही है।
प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर अस्थायी व्यवस्था का प्रावधान अलग विषय हो सकता है, लेकिन ऐसी व्यवस्था की अवधि, आदेश का आधार, संबंधित विद्यालय की आवश्यकता और मूल विद्यालय पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी सार्वजनिक होने से ही प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकती है।
रिश्ते का उल्लेख, इसलिए उठी निष्पक्षता पर चर्चा
मधुबाला साहू, छुरा हायर सेकंडरी बालक विद्यालय के प्राचार्य नेमीचंद साहू की पत्नी हैं। इस तथ्य के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर व्यवस्था संबंधी निर्णय की प्रक्रिया और निष्पक्षता को लेकर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर किसी प्रशासनिक निर्णय को अनुचित नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति जानने के लिए आदेश जारी करने की प्रक्रिया, नोटशीट और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच जरूरी होगी।
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इसी क्रम में नेमीचंद साहू से संबंधित पंडरीपानीडीह पटवारी हल्का नंबर 25, खसरा नंबर 82/17 की कृषि भूमि पर भवन निर्माण एवं उसके उपयोग को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए भूमि एवं भवन संबंधी दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
दस्तावेज सामने आए तो खुल जाएगा ‘व्यवस्था’ का राज
पेंड्रा हाईस्कूल से रानीपरतेवा हायर सेकंडरी स्कूल में शिक्षिका की व्यवस्था के मामले में यदि जिला प्रशासन कलेक्टर का आदेश, डीईओ कार्यालय की नोटशीट, व्यवस्था की अवधि तथा दोनों विद्यालयों की स्वीकृत और कार्यरत शिक्षक संख्या सार्वजनिक करता है, तो पूरे मामले की तस्वीर स्वतः स्पष्ट हो सकती है।
वहीं इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चन्द्राकर से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक 36 घंटे बाद भी उनकी ओर से संलग्नीकरण/व्यवस्था संबंधी मामले पर कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।
अब निगाह इस बात पर है कि जिला प्रशासन इस व्यवस्था को किस नियम के तहत मान्य मानता है और क्या जिले में मूल पदस्थापना से अलग विद्यालयों में ‘व्यवस्था’ पर कार्यरत सभी शिक्षकों की समीक्षा की जाएगी। ग्रामीण और दूरस्थ विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में पेंड्रा-रानीपरतेवा प्रकरण ने जिले में चल रही अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग को भी हवा दे दी है।
