नारायणपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के रसद और विस्फोटक नेटवर्क पर करारा प्रहार किया है। जानकारी के अनुसार, एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखा गया एक विशाल डंप (सामग्री का भंडार) बरामद किया है। इस कार्रवाई से नक्सलियों की एक बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया गया है।
दुर्गम जंगलों में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
यह कार्रवाई नारायणपुर पुलिस की जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 53वीं वाहिनी द्वारा संयुक्त रूप से की गई।
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ऑपरेशन का केंद्र: ग्राम मडोड़ा और भोटोर के बीच स्थित घने और पहाड़ी इलाके।
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नेतृत्व: ITBP के सेनानी संजय कुमार और उप सेनानी तेजवीर सिंह के मार्गदर्शन में जवानों ने नक्सलियों के इस ‘सप्लाई डिपो’ तक पहुंचने में सफलता पाई।
क्या-क्या हुआ बरामद?
जवानों ने जब इलाके की सघन तलाशी ली, तो जमीन में दबाकर और झाड़ियों में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में सामग्री मिली, जिसमें शामिल हैं:
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विस्फोटक सामग्री: एक घातक प्रेशर कुकर IED बरामद किया गया, जिसे ITBP की बम निरोधक टीम (BDS) ने सुरक्षा कारणों से मौके पर ही नष्ट कर दिया।
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रसद और राशन: नक्सलियों के लंबे समय तक टिकने के लिए जमा किया गया राशन, बड़े प्लास्टिक ड्रम और दैनिक उपयोग का सामान।
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तकनीकी उपकरण: आईईडी बनाने के लिए आवश्यक तार, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे।
नक्सलवाद के खात्मे की ओर निर्णायक कदम
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की है। नारायणपुर के एसपी राबिंसन गुड़िया ने पुष्टि की है कि यह डंप नक्सलियों की लॉजिस्टिक लाइफलाइन (आपूर्ति श्रृंखला) को तोड़ने में एक बड़ी सफलता है। अबूझमाड़, जिसे कभी नक्सलियों का ‘अभेद्य किला’ माना जाता था, अब वहां सुरक्षा बलों के नए बेस कैंप स्थापित होने से नक्सलियों के पैर उखड़ रहे हैं।
अधिकारी का बयान: “नक्सली इस सामग्री का उपयोग सुरक्षा बलों पर बड़े हमले की साजिश रचने के लिए कर रहे थे। हमारी सतर्कता ने उनके मंसूबों को नाकाम कर दिया है। ऑपरेशन के बाद सभी जवान सुरक्षित कैंप वापस लौट आए हैं।”
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