बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे प्रशासनिक अधिकारियों की जान लेने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। ताजा मामला जिले के रतनपुर क्षेत्र का है, जहाँ अवैध रेत उत्खनन रोकने गए एक नायब तहसीलदार को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया गया। हालांकि, अधिकारी बाल-बाल बच गए, लेकिन इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग को लगातार सूचना मिल रही थी कि क्षेत्र की नदियों से अवैध रूप से रेत का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। सूचना की तस्दीक और कार्रवाई के लिए नायब तहसीलदार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। जैसे ही टीम ने अवैध रेत से लदे एक ट्रैक्टर को रोकने का प्रयास किया, चालक ने रुकने के बजाय ट्रैक्टर की रफ्तार बढ़ा दी और सीधे अधिकारी की ओर मोड़ दिया। नायब तहसीलदार ने तत्परता दिखाते हुए अपनी जान बचाई।
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कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति?
इस जानलेवा हमले के बाद राजस्व अधिकारी ने पुलिस में लिखित आवेदन दिया। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला पहलू यह है कि:
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ट्रैक्टर की जब्ती नहीं: घटना में प्रयुक्त ट्रैक्टर को पुलिस या राजस्व विभाग ने जब्त नहीं किया है।
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रेत पर कार्रवाई नहीं: अवैध रूप से ले जाई जा रही रेत को भी मौके पर नहीं रोका गया।
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सख्ती का अभाव: सरकारी अधिकारी पर हमले जैसे गंभीर मामले में भी कड़ी धाराओं के बजाय हल्की धाराओं का इस्तेमाल चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रशासनिक अमले में रोष
इस घटना के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अगर फील्ड पर तैनात कर्मियों की सुरक्षा ही सुनिश्चित नहीं होगी, तो अवैध कारोबारों पर अंकुश लगाना नामुमकिन होगा।
बड़ी लापरवाही: अवैध रेत खनन रोकने गए अमले के पास न तो पर्याप्त सुरक्षा बल था और न ही घटना के बाद पुलिस ने साक्ष्यों (ट्रैक्टर और रेत) को सुरक्षित करने की जहमत उठाई।
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