खबर प्रकाशित होने के बाद भी निर्माण जारी, क्या अतिक्रमण के मामलों में कार्रवाई के अलग-अलग पैमाने हैं?
छुरा (गंगा प्रकाश)। पंडरीपानीडीह, ग्राम पंचायत खरखरा क्षेत्र में कथित सरकारी भूमि पर मकान निर्माण का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई और समान कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि सरकारी जमीन पर निर्माण के इस मामले में एक शासकीय कर्मचारी की संलिप्तता है। शिकायत किए जाने और खबर प्रकाशित होने के बाद भी यदि निर्माण कार्य बेधड़क जारी है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर संबंधित विभागीय अधिकारी कार्रवाई करने से पीछे क्यों हट रहे हैं?
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि यही स्थिति किसी गरीब परिवार के मामले में सामने आती, तो क्या विभागीय अमला इतनी ही धीमी गति से कार्रवाई करता? आमतौर पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतों में गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को नोटिस, बेदखली या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कथित तौर पर शासकीय कर्मचारी से जुड़े इस मामले में कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होना प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
खबर के बाद भी निर्माण जारी, आखिर किसका संरक्षण?
बताया गया है कि संबंधित भूमि के संबंध में शिकायत के बाद पटवारी ने स्थल निरीक्षण किया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, निरीक्षण में निर्माणाधीन मकान सरकारी भूमि पर होने की बात सामने आई थी और संबंधित कृषि भूमि के स्वामी को विभागीय नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
👉 जरूर पढ़ें : जंगल में पत्ते तोड़ने गए ग्रामीण के सामने अचानक आ गया भालू! फिर जो हुआ, उससे गांव में दहशत
यदि राजस्व अभिलेखों और विधिवत सीमांकन से सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि निर्माण रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और कथित अतिक्रमण के बावजूद काम जारी रहने की स्थिति कैसे बनी हुई है।
शासकीय कर्मचारी होने से क्या कार्रवाई में मिल रही है छूट?
सरकारी सेवा में कार्यरत व्यक्ति से कानून और नियमों के पालन की अपेक्षा और अधिक होती है। यदि कोई शासकीय कर्मचारी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे या निर्माण में संलिप्त पाया जाता है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। पद या प्रभाव के आधार पर किसी को भी अनुचित लाभ नहीं मिलना चाहिए।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजस्व विभाग सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार कर रहा है? गरीब परिवार के अतिक्रमण पर त्वरित कार्रवाई और कथित रूप से शासकीय कर्मचारी से जुड़े मामले में देरी—यदि ऐसी स्थिति है, तो इसकी वजह सामने आनी चाहिए।
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, छुरा की भूमिका पर नजर
अब निगाहें अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), छुरा और संबंधित राजस्व अमले की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति, सीमांकन, निर्माण की वर्तमान अवस्था और जारी नोटिस के पालन की जांच कर नियमानुसार कदम उठाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
👉 जरूर पढ़ें : राजिम की सियासत में किसके किले में लगेगी सेंध? कांग्रेस-भाजपा के बीच ‘आप’ की दस्तक से बढ़ी चुनावी हलचल
सवाल सीधा है—क्या सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामले में कानून सभी के लिए समान है, या कार्रवाई व्यक्ति की हैसियत देखकर होती है? पंडरीपानीडीह का यह मामला प्रशासन की निष्पक्षता और सरकारी भूमि की सुरक्षा के प्रति उसकी गंभीरता की परीक्षा बनता जा रहा है।
