स्कूल सूने… दफ्तर गुलज़ार! शिक्षा विभाग का आदेश कचरे में, बच्चों की पढ़ाई अटैचमेंट की भेंट

 

गरियाबंद/छुरा (गंगा प्रकाश)।स्कूल सूने… दफ्तर गुलज़ार! प्रदेश की कांग्रेस सरकार हो या मौजूदा भाजपा सरकार— दोनों ने ही शिक्षकों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पर रोक लगाने के आदेश जारी किए। शासन ने यह साफ कर दिया था कि किसी भी शिक्षक को लंबे समय तक विद्यालय से हटाकर कार्यालयों में पदस्थ नहीं रखा जाएगा। वजह भी साफ थी— बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

लेकिन हकीकत देखिए, गरियाबंद जिले में शासन के इन आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। स्कूलों में ताले लटक रहे हैं, बच्चे गुरुजी को तरस रहे हैं… और जिला शिक्षा कार्यालय गुलज़ार है!

दोनों गुरुजी दफ्तर में, स्कूल खाली

  1. बुद्धविलास सिंह – मूल पदस्थापना छुरा गजानंद हायर सेकंडरी स्कूल (जीवविज्ञान विषय), लेकिन वर्षों से जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में जमे हुए हैं।
  2. विल्सन पी. थॉमस – मूल पदस्थापना पूर्व माध्यमिक शाला लादाबाहरा, लेकिन ये भी आजकल जिला शिक्षा कार्यालय में ही हाज़िरी बजा रहे हैं।

दोनों का वेतन स्कूल से निकलता है, लेकिन सेवा का लाभ दफ्तर उठा रहा है। यह न सिर्फ शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन है बल्कि शासन के संलग्नीकरण समाप्ति आदेश (2019 और 2022) की सीधी अवहेलना भी है।

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स्कूलों में पढ़ाई चौपट

  • छुरा हायर सेकंडरी स्कूल में जीवविज्ञान विषय पढ़ाने वाला कोई शिक्षक मौजूद नहीं है।
  • ग्रामीण अंचल की पूर्व माध्यमिक शाला लादाबाहरा में भी यही हालत है।
  • विज्ञान जैसे गंभीर विषय बच्चों के भविष्य से मज़ाक बनकर रह गए हैं।

अभिभावक कहते हैं— “अगर वेतन स्कूल से मिलता है तो पढ़ाई भी स्कूल में होनी चाहिए। हमारे बच्चों को गुरुजी चाहिए, बाबू नहीं!”

कानून और आदेश क्या कहते हैं?

  • छत्तीसगढ़ सेवा नियमावली और शिक्षा विभाग के परिपत्र:किसी भी शिक्षक को स्थायी रूप से कार्यालय में नहीं बैठाया जा सकता।
  • संविलियन शिक्षक नियम: हर विषय का शिक्षक विद्यालय में अनिवार्य है।
  • शासन का संलग्नीकरण समाप्ति आदेश (2019, 2022):“शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हो, इसलिए किसी भी परिस्थिति में विद्यालयीन शिक्षकों को कार्यालयों में संलग्न न किया जाए।”

यानि कि गरियाबंद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय ने शासन के आदेश को ही ठेंगा दिखा दिया है।

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बड़ा सवाल

  • क्या जिला शिक्षा अधिकारी का दफ्तर शासन से ऊपर है?
  • कब तक बच्चों की पढ़ाई अटैचमेंट की भेंट चढ़ती रहेगी?
  • शिक्षकों को कार्यालय का बाबू बनाने की साजिश के पीछे कौन-सी ताकतें हैं?

विरोध की आहट

अभिभावकों और छात्रों में भारी आक्रोश है। वे कहते हैं—“अगर हालात ऐसे ही रहे तो हमें मजबूरन तालाबंदी, चक्काजाम, हड़ताल और सड़कों पर उतरकर आंदोलन करना पड़ेगा। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

शासन की नीतियां कहती हैं कि शिक्षक का स्थान केवल स्कूल है। लेकिन गरियाबंद जिले में यह नियम कागज़ पर ही रह गया है। स्कूल वीरान हैं, दफ्तर गुलज़ार! सवाल अब यह है कि क्या शासन अपने ही आदेश को लागू करने की हिम्मत दिखाएगा या बच्चों की पढ़ाई यूं ही अटैचमेंट की बलि चढ़ती रहेगी?


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