प्रकाश कुमार यादव

गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। शहर के हृदय स्थल गांधी मैदान के सामने प्रस्तावित 48 दुकानों के दो मंजिला व्यवसायिक परिसर निर्माण को लेकर नगर में विरोध तेज हो गया है। नगर पालिका परिषद द्वारा गौरव पथ मार्ग स्थित मैदान के सामने डीएमएफ मद से विकसित रोपण एवं सौंदर्याकरण स्थल पर व्यावसायिक परिसर निर्माण हेतु भूमि नीलामी प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आते ही शहरवासियों में असंतोष व्याप्त है।

नागरिकों ने एकजुट होकर नगर पालिका अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपते हुए प्रस्ताव पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि गांधी मैदान केवल एक सार्वजनिक स्थल नहीं, बल्कि गरियाबंद की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक है।

वर्षभर धड़कता है गांधी मैदान

गांधी मैदान वर्षभर शहर की गतिविधियों का केंद्र बना रहता है। यहां दुर्गा पूजा, दशहरा उत्सव, श्रीमद्भागवत कथा, राम कथा, खेल प्रतियोगिताएं, शैक्षणिक आयोजन, जनसभाएं और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। चुनावी सभाओं से लेकर सामाजिक आंदोलनों तक, जनभावनाओं की अभिव्यक्ति का यह प्रमुख मंच रहा है। बड़ी संख्या में नागरिक गौरव पथ मार्ग से इन आयोजनों को देखते और सुनते हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मैदान के सामने दो मंजिला व्यवसायिक परिसर बन गया तो इसकी खुली संरचना, दृश्य सौंदर्य और ऐतिहासिक गरिमा प्रभावित होगी। एक नागरिक ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा आज जो मैदान दूर से दिखाई देता है, कल दुकानों की दीवारों में कैद हो जाएगा।

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पार्किंग और यातायात की चिंता

प्रस्तावित 48 दुकानों के निर्माण के बाद पार्किंग की समस्या विकराल रूप ले सकती है। आशंका जताई जा रही है कि व्यापारी एवं ग्राहक अपने वाहन मैदान के आसपास या मैदान परिसर में ही खड़े करेंगे, जिससे यातायात बाधित होगा। बड़े आयोजनों के दौरान जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

शहर पहले से ही सीमित यातायात व्यवस्था की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में बड़े व्यवसायिक परिसर का निर्माण स्थिति को और जटिल बना सकता है।

स्वच्छता और सुरक्षा पर भी सवाल

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि दुकानों के पीछे कचरा फेंके जाने, गंदगी फैलने और असामाजिक गतिविधियों के बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। नागरिकों का तर्क है कि सार्वजनिक स्थलों के समीप व्यावसायिक निर्माण से अक्सर पर्यावरणीय और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ती हैं।

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मैदान जमीन नहीं, शहर की आत्मा है

नगरवासियों ने स्पष्ट किया है कि गांधी मैदान उनके लिए मात्र भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि शहर की आत्मा है। पीढ़ियों की स्मृतियां इस मैदान से जुड़ी हैं। यह वह स्थान है जहां से जनआवाज उठी है और लोकतंत्र को मजबूती मिली है।

ज्ञापन के माध्यम से नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि गांधी मैदान के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा व्यवसायिक परिसर निर्माण के लिए वैकल्पिक स्थान चिन्हित किया जाए। उनका कहना है कि विकल्प उपलब्ध हैं, आवश्यकता केवल इच्छाशक्ति और दूरदृष्टि की है।

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख नाम

ज्ञापन सौंपने वालों में रितिक सिन्हा, बसंत मिश्रा, सन्नी मेमन, अमित मिरी, मुकेश रामटेके, अमित पटेल, प्रदीप कुमार, सूरज नंदी, धारू, महेश राम, भोजराम जैन, कुमार, अनिल सिंह, सतीश देवनारायण एवं महेंद्र सिंह सहित अन्य नागरिक उपस्थित रहे।

अब पूरा शहर प्रशासन के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है। देखना होगा कि विकास और राजस्व के बीच संतुलन साधते हुए जनभावनाओं का सम्मान किया जाता है या नहीं। आने वाले दिनों में लिया गया निर्णय गरियाबंद की दिशा और दशा तय करेगा।

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