गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। सुखा नदी फिंगेश्वर में अधिकारियों के भ्रश्टाचार के कारण मनमाने ढंग से नदी किनारों को खोदकर अवैध ढंग से लाखों की संख्या में लाल ईट का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। भुक्त भोगी कृषकों नेहरूराम साहू, रमेश निषाद, बहादुर निषाद, संजय चक्रधारी, घनश्याम ध्रुव आदि से 25 से 30 ग्रामीणों, कृषकों ने बताया कि सुखा नदी फिंगेश्वर के किनारे किनारे गदहीडीह कर्रा झाटी खार चार को अवैध रूप से 10-12 फीट खुदाई कर मिट्टी निकाल ईट बनाने बड़े बड़े गड्ढ़ा कर देने से जहां उनके खेतां में पानी भरने की संभावना है वहीं उन्हें खेत आने जाने में बहु ज्यादा कठिनाई हो रही है। यहां आसपास बिना किसी शासकीय अनुमति के कई लोग लाखों की संख्या में लाल ईट का निर्माण क लाखों करोड़ो रूपये की अवैध कमाई कर जहां सरकार को लाखों रूपयों की टैक्स चोरी के साथ रास्तों का अवैध खनन कर रहे हैं। सुखा नदी के आसपास किनारों के खेतों के कृषकों ने बताया कि गत वर्ष भी हम लोगों ने इस संबंध में शिकायत की थी परंतु भ्रष्टचार के चलते खनिज एवं राजस्व विभाग द्वारा कार्यवाही न कर अवैध खनन करने वालों के हौसलें काफी बुलंद हो गए। पूरे क्षेत्र में लाल ईट बनाने वाले में होड़ लगी हुई है। प्रधानमंत्री आवास के कारण लाल ईट की भारी मांग चल रही है जिससे अवैध खनन करने वालों की बाढ़ आ गई है। पूरे अंचल में बन रहे लाखों लाल ईटों के अवैध निर्माण एवं मनमाने दर में बिक्री के कारण गलत तरीके से पैसा कमाने युवाओं में होड़ लगी हुई है। बताया जाता है लाल ईट बनाने किसी के पास भी वैध दस्तावेज नहीं है। ईट बनाने के लिए जहां भी सरकारी खाली जगह दिखती है वहां खुदाई शुरूकर मिट्टी निकालकर ईट बनाने लगते हैं। कहीं किसी को भी शासकीय नियम कानून का कोई खौफ या डर नहीं होता। यही कारण है कि फिंगेश्वर सुखा नदी के किनारे किनारे राजस्व जमीन में मनमाने स्तर पर मिट्टी खोदकर ईट बनाई जा रही है और लाखों रूपयों का भ्रष्टाचार बेधड़क किया जा रहा है। नदी किनारे के खेतों में बरसात में पानी भरेगा और पूरी फसल चौपट हो जायेगी। इसके साथ ही इन मार्गो से होकर खेत जाने का रास्ता भी ब्लाक हो गया है। पीड़ित किसान एसडीएम, तहसीलदार, थाना आदि में आवेदन देते देते परेशान हो गए है। जिला प्रशासन से तत्काल अवैध ईट निर्माण भट्टों पर छापामार कार्यवाही की मांग करते हुए किसानों ने चेतावनी दी है कि अवैध ईट बनाने वालों पर कार्यवाही नही हुई तो सड़क का आंदोलन करेंगे। जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन की होगी।
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