नई दिल्ली। भारतीय शिक्षा प्रणाली में पाठ्यपुस्तकों की सामग्री को लेकर मचे बवाल के बीच नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) बैकफुट पर आ गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा कक्षा 8 की सोशल साइंस टेक्स्टबुक में न्यायपालिका के खिलाफ की गई टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताने के बाद, परिषद ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए पुस्तक के वितरण पर रोक लगा दी है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में प्रकाशित कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, खंड II’ के अध्याय 4 में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई थी। इस अध्याय में “ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार” (Corruption in Judiciary) का संदर्भ दिया गया था।
जब यह मामला देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। इसे न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और छात्रों के मन में गलत धारणा बनाने वाला बताया गया।
NCERT की सफाई: ‘निर्णय की बड़ी चूक’
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद NCERT ने बुधवार देर शाम एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की। अपनी गलती स्वीकार करते हुए परिषद ने कहा:
“24 फरवरी को प्रकाशित पुस्तक के अध्याय ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ में अनजाने में कुछ अनुचित पाठ्य सामग्री शामिल हो गई थी। यह पूरी तरह से ‘एरर ऑफ जजमेंट’ (निर्णय की त्रुटि) है, जिसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।”
उठाए गए कड़े कदम
NCERT ने स्थिति को संभालने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने का ऐलान किया है:
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वितरण पर रोक: इस पुस्तक के डिस्ट्रीब्यूशन पर तत्काल प्रभाव से ‘सख्त रोक’ लगा दी गई है।
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संशोधन की प्रक्रिया: विवादित सामग्री और चैप्टर की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी गलती न दोहराई जाए।
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आंतरिक जांच: परिषद इस बात की भी जांच करेगी कि यह सामग्री फाइनल ड्राफ्ट तक कैसे पहुंची।
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