CG: पाली वन परिक्षेत्र में हाथियों का खौफ, गांवों में पसरा डर और दहशत

जंगल में शौच के लिए गए बालक को दौड़ाया, गांवों में मुनादी – ‘जंगल की ओर न जाएं’

कोरबा/पाली (गंगा प्रकाश)। पाली/कटघोरा वनमंडल के पाली वन परिक्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जंगली हाथियों की आमद से डर का ऐसा माहौल बन गया है कि गांवों के बच्चे और महिलाएं घर से बाहर निकलने में भी हिचक रहे हैं। बीते कुछ दिनों से जेमरा, बतरा और कोडार गांव के बीच के जंगलों में दो दंतैल हाथियों का विचरण देखा गया है, जिसने पूरे क्षेत्र में दहशत फैला दी है।

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ग्रामीणों के मुताबिक ये दोनों हाथी अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहे हैं। जेमरा के खरौंजी पारा से लेकर कोडार और बतरा से सटे जंगलों में इनके पैरों के ताजे निशान मिले हैं। सबसे भयावह घटना बतरा गांव में घटी, जब एक नाबालिग बालक शौच के लिए जंगल की ओर गया था। वहां अचानक हाथी ने उसे देख लिया और दौड़ा लिया। बालक घबराकर तेजी से भागा और किसी तरह जान बचाकर गांव पहुंचा। घटना के बाद पूरे गांव में बच्चों और महिलाओं में डर बैठ गया है। अब ग्रामीणों ने बच्चों का अकेले बाहर निकलना बंद कर दिया है।

पाली रेंजर संजय लकड़ा ने बताया कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। कक्ष क्रमांक एओ 565 और पी 105 में हाथियों के पैरों के ताजे निशान मिले। विभाग की ओर से तत्काल प्रभावित गांवों में मुनादी कराई गई। ग्रामीणों से साफ कहा गया है कि वे जंगल की ओर न जाएं, मुख्य मार्ग से ही आवागमन करें और समूह में ही बाहर निकले।

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वन विभाग ने अपनी टीम को हाथियों की निगरानी में लगा दिया है। ड्रोन कैमरे के जरिए भी उनकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है ताकि उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। रेंजर लकड़ा ने कहा, “ये हाथी केंदई, एतमानगर और पसान रेंज के झुंड से अलग होकर आबादी के नजदीक आ गए हैं। गांवों में खतरे की आशंका को देखते हुए पूरी तैयारी कर ली गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फॉरेस्ट टीम अलर्ट मोड पर है।”

ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता है। लोग खेतों और बाड़ी में जाना छोड़ चुके हैं। मवेशियों को भी लोग जंगल की ओर नहीं ले जा रहे हैं। जेमरा के किसान मोहनलाल कंवर कहते हैं, “हमने कई बार दो हाथियों को एक साथ घूमते देखा है। उनके डर से लोग न तो खेतों में काम कर पा रहे हैं और न ही मवेशी चरा पा रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजने तक में डर लग रहा है।”

विशेषज्ञों की मानें तो इस वक्त जंगलों में भोजन और पानी की कमी के चलते हाथी रिहायशी इलाकों की ओर पहुंच जाते हैं। मानसून पूर्व की इस अवधि में उनके मूवमेंट का दायरा बढ़ जाता है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. राकेश तिवारी के मुताबिक, “गर्मियों के बाद और बरसात की शुरुआत से पहले हाथी जलस्रोत और भोजन की तलाश में झुंड छोड़कर भी विचरण करने लगते हैं। अकेले घूम रहे दंतैल ज्यादा आक्रामक होते हैं क्योंकि वे असुरक्षित महसूस करते हैं।”

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पाली वन परिक्षेत्र का यह इलाका कटघोरा, केंदई और एतमानगर रेंज के हाथी कॉरिडोर से जुड़ा है। इस कारण यहां हाथियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन दो दंतैलों का लगातार गांवों के समीप घूमना वन विभाग के लिए भी चुनौती बन गया है। विभाग का कहना है कि फिलहाल किसी तरह की जनहानि या बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन खतरे को देखते हुए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों को देखकर शोर न मचाएं, न ही पत्थर फेंकें। ऐसा करने पर हाथी आक्रामक हो जाते हैं। विभाग की टीम लगातार गांवों का दौरा कर रही है और लोगों को हाथियों से बचाव के उपाय बता रही है।

ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि यदि हाथियों को जल्द गांव के इलाकों से दूर नहीं भेजा गया, तो फसलें और घर भी खतरे में आ सकते हैं। पिछले साल भी हाथियों के झुंड ने कोरबा के आसपास कई गांवों में धान और सब्जी की फसल को नुकसान पहुंचाया था।

सावधानी ही बचाव

  1. जंगल की ओर अकेले न जाएं।
  2. शाम के बाद खेतों और बाड़ी में न रहें।
  3. हाथी दिखे तो शांत रहें, शोर न मचाएं।
  4. वन विभाग की टीम को तुरंत सूचना दें।

फिलहाल पाली रेंज के जेमरा, बतरा और कोडार गांव के लोग घरों में सिमट गए हैं। उनका कहना है कि जब तक हाथी इलाके से वापस नहीं लौटते, तब तक डर और दहशत का यह दौर जारी रहेगा। वन विभाग भी इन हाथियों को वापस सुरक्षित जंगल क्षेत्र की ओर भेजने की कोशिश में पूरी ताकत झोंक रहा है।


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