Gayatri mantra’s :  वैदिक परंपरा में प्रत्येक देवी-देवता के लिए एक विशेष गायत्री मंत्र होता है. “गायत्री” का अर्थ है – वह मंत्र जो त्रिपदा (तीन चरणों) में है और जो चित्त को प्रकाशित करे. “गायत्री मंत्र” मूलतः 24 अक्षरों का होता है, और उसमें किसी देवता का ध्यान करके उनके गुणों का स्मरण कर प्रार्थना की जाती है कि वे हमें सद्बुद्धि दें. इस मंत्र की ऊर्जा में ही सभी देवताओं की आराधना है. हर अक्षर में कोई न कोई देवता अपनी ऊर्जा के साथ है. आज के इस आर्टिकल में हम ज्योतिषाचार्य और माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी कॉलेज के वास्तु और ज्योतिष संस्थान की एचओडी  डॉ.अलकनंदा शर्मा से जानेंगे कौन सा गायत्री मंत्र किस देवी-देवता को समर्पित है, ताकि आप सही मंत्रों का जाप करके अपने प्रिय भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें…

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कौन सा गायत्री मंत्र किस देवी-देवता के लिए है – Which Gayatri Mantra is for which deity

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सूर्य के लिए (आदित्य गायत्री मंत्र):

ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि।
तन्नो आदित्यः प्रचोदयात्॥

चन्द्रमा (सौम्य गायत्री मंत्र):

ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृतात्मने धीमहि।
तन्नो सोमः प्रचोदयात्॥

अग्नि (अग्नि गायत्री मंत्र):

ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि।
तन्नो अग्निः प्रचोदयात्॥

इंद्र (इंद्र गायत्री मंत्र):

ॐ वज्रधारिणे विद्महे अमरनाथाय धीमहि।
तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात्॥

शेषनाग (अनन्त गायत्री मंत्र):

ॐ अनन्ताय विद्महे शेषनागाय धीमहि।
तन्नः सर्पः प्रचोदयात्॥

गणेश (गणपति गायत्री मंत्र):

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्॥

शिव (रुद्र गायत्री मंत्र):

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

देवी दुर्गा (दुर्गा गायत्री मंत्र):

ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि।
तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥

लक्ष्मी (श्री गायत्री मंत्र):

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

सरस्वती (सरस्वती गायत्री मंत्र):

ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि।
तन्नः सरस्वती प्रचोदयात्॥

विष्णु (नारायण गायत्री मंत्र):

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

हनुमान (हनुमत गायत्री मंत्र):

ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि।
तन्नो हनुमानः प्रचोदयात्॥

कृष्ण (गोपाल गायत्री मंत्र):

ॐ वासुदेवाय विद्महे भक्‍तवस्‍वलाय धीमहि।
तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्॥


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