छुरा (गंगा प्रकाश)। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (PMAY) गरीब और बेघर परिवारों को पक्का घर दिलाने के लिए चलाई जाती है। लेकिन गरियाबंद जिले के छुरा जनपद पंचायत में यह योजना गरीबों का सहारा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचारियों के लिए “नोट छापने की मशीन” बन चुकी है।

मामले छोटे नहीं हैं, बल्कि इतने बड़े हैं कि अब सवाल केवल पंचायत सचिव या आवास मित्र तक सीमित नहीं रहे। पूरे मामले में जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर, जिला कलेक्टर बी.एस. उईके और राजिम विधानसभा के विधायक रोहित साहू तक पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय : अगर पीएम आवास में एक रुपया भी वसूला गया, तो कलेक्टर जिम्मेदार होंगे

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह उद्धृत किया गया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशभर में यह घोषणा की है कि यदि प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर कोई भी वसूली या भ्रष्टाचार हुआ है, तो कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

उसी रिपोर्ट में कहा गया कि 5 मई 2025 को पाली ब्लॉक के मदनपुर में मुख्यमंत्री ने यह कठोर चेतावनी दी थी कि “अगर एक रुपया भी मांगा गया, तो जिले का कलेक्टर जवाबदेह होगा।”

यह कथन अब छुरा जनपद के हितग्राहियों और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच रिकॉर्ड पर दांव बन गया है। यदि वास्तव में कलेक्टर को इस स्तर की जवाबदेही देना है, तो छुरा की लूट-खसोट पर जांच और कार्रवाई पहले पायदान पर होनी चाहिए।

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पंचायत मंत्री (उप मुख्यमंत्री) विजय शर्मा : हमने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति बनाई है

पार्टियों की घोषणाओं में अक्सर उत्साह भरी बातें सुनने को मिलती हैं। मीडिया में एक वीडियो एवं अन्य स्रोतों में यह दावा किया गया है कि उप मुख्यमंत्री / पंचायत मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि “छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना में धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी; हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति बनाई है।”

वहीँ, एक अन्य रिपोर्ट कहती है कि मुख्यमंत्री की चेतावनी के 24 घंटे भीतर ही छुरा के रूवाड पंचायत के आश्रित गांव से अवैध वसूली की शिकायत सामने आई, जिससे स्पष्ट है कि मंत्री और मुख्यमंत्री के कथन और जमीन की जमीनी हकीकत में खाई गहरी है।

विकसित मीडिया स्रोतों में यह आरोप है कि प्रदेश में “पीएम आवास योजना के नाम पर वसूली और भ्रष्टाचार” को उजागर करने वालों को दबाने के लिए संचालन किया जा रहा है, और मंत्री-वक्तव्य मात्र ज़ुबानी स्तर पर रह जाते हैं।

भ्रष्टाचार की ऊँची दीवारें और संरक्षण का खेल

छुरा इलाके में भ्रष्टाचार की मीडिया रिपोर्ट्स लगातार सामने आ रही हैं।अधिकारियों और नेताओं की चुप्पी इसी संरक्षण की ताजगी को बातों-से-आवाज देती है।अगर मुख्यमंत्री का कथन सही माना जाए कि कलेक्टर को जवाबदेह किया जाएगा, तो कलेक्टर बी.एस. उईके की निष्क्रियता अब स्वीकार नहीं हो सकती। इसी तरह, जब मंत्री विजय शर्मा “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करते हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी सरकार के नीचे के अधिकारी वही नीति अमल में लाएं।

एकीकृत पड़ताल रिपोर्ट (संभावित कथन सहित)

नीचे मैं इस मामले की एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर रहा हूँ, जिसमें आपके बताए केस — हिराबतर, रसेला, लादाबाहरा, सोरिद और 40,000 वसूली का मामला — और संबंधित अधिकारियों, संरक्षकों व नेताओं के कथन एक साथ बिंदुवार दिये गए हैं:

चार केस, एक ही पैटर्न – भ्रष्टाचार का गढ़ बना छुरा

केस नंबर 1 : हिराबतर का बिसाहू राम

2017-18 में आदिवासी किसान बिसाहू राम गोंड के नाम पर ₹1.30 लाख स्वीकृत दिखाया गया और कागजों में आवास पूर्ण। मगर ज़मीन पर मकान नहीं। गरीब का आरोप – पंचायत सचिव और आवास मित्र ने धमकाकर फर्जी दस्तखत कराए, पैसा हड़प लिया।

केस नंबर 1 के भाग 2 : 40,000 की घूसनुमा चाल

जब मीडिया ने बिसाहू राम का मामला उठाया तो अचानक उसके खाते में ₹40,000 डलवा दिए गए। फिर उसे जबरन नया कागज साइन कराया गया – “2025-26 में नया आवास मिलेगा।” यह खुला धोखा था, जिसका मकसद केवल घोटाले पर पर्दा डालना था।

केस नंबर 2 : रसेला का बसंत सेन

नगर पंचायत का स्थायी निवासी होते हुए भी बसंत सेन को ग्रामीण आवास का लाभ मिला। दो किश्तों में ₹95,000 जारी, मगर मकान अधूरा। खुद हितग्राही ने माना कि उसने पैसा “ग्राम समिति को दान” कर दिया। यानी, आवास योजना की राशि भी खुलेआम लूटी गई।

केस नंबर 3 : लादाबाहरा का घनसाय नेताम

2020-21 में स्वीकृत आवास अधूरा पड़ा है। हितग्राही का आरोप – सरपंच ने ₹15,500 रिश्वत वसूली। जनदर्शन में शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। जिला और जनपद पंचायत सीईओ ने बयान दिए मगर नतीजा वही – “जांच करेंगे।”

केस नंबर 4: सोरिद पंचायत – पत्नी हेडमास्टर, फिर भी मिल गया आवास

ग्राम पंचायत सोरिद का मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां कांग्रेस नेता और किराना व्यापारी चित्रसेन डड़सेना ने खुद मीडिया के सामने खुलासा किया कि उनकी पत्नी हिरा बाई डड़सेना, जो प्राथमिक विद्यालय सोरिद में प्रधान पाठक (हेडमास्टर) के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ दिला दिया गया।

चित्रसेन का कहना है कि उन्होंने जनपद पंचायत और पंचायत सचिव को पहले ही बता दिया था कि उनकी पत्नी सरकारी सेवा में हैं और वे योजना की पात्रता में नहीं आते। इसके बावजूद नाम सूची में जोड़कर मकान स्वीकृत कर दिया गया।

आवास बन भी गया और राशि भी जारी हो गई। बाद में अधिकारियों ने चुपचाप पत्नी का नाम हटाकर मेरे माता-पिता का नाम डाल दिया। यह सीधा-सीधा खेल है, आखिर किसके दबाव में यह हेराफेरी हुई? – चित्रसेन डड़सेना

उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी का पक्का मकान का सपना अफसरों और कर्मचारियों ने मजाक बना दिया है।

संरक्षण और चुप्पी — अफसरों से ले कर पार्टी नेतृत्व तक

  • जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर : जनपद योजनाओं की निगरानी इनके दायित्व में है। इतने बड़े भ्रष्टाचार उजागर होने पर भी वे कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे संदेह है कि उन्हें ऊपर से संरक्षण मिला है।
  • जिला कलेक्टर बी.एस. उईके : मुख्यमंत्री की चेतावनी में उनका नाम विशेष रूप से लिया गया है कि कलेक्टर को जवाबदेह ठहराया जाएगा। लेकिन छुरा मामले में कलेक्टर की निष्क्रियता स्पष्ट है।
  • विधायक रोहित साहू : स्थानीय प्रदर्शनों और शिकायतों के बावजूद विधायक आज तक सक्रिय धरना या मोर्चा नहीं ले रहे। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या विधायक भी संरक्षण का हिस्सा हैं?
  • मुख्यमंत्री विष्णु देव साय : कथित भरोसे के कथन कि कलेक्टर जिम्मेदार होंगे, लेकिन छुरा मामलों में कार्रवाई की कमी उनकी बातों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है।
  • पंचायत मंत्री विजय शर्मा : उनकी “जीरो टॉलरेंस” नीति की घोषणा उच्च वादे हैं, लेकिन यदि निचले स्तर पर भ्रष्टाचार नियंत्रित नहीं हो पा रहा, तो यह नीति केवल कागजों में ही सिमटी हुई दिखती है।

घोटाले की मिलीभगत का खेल

1. फर्जी जियो टैगिंग : कागजों में मकान पूर्ण, फोटोशॉप या पुराने फोटो से जियो टैगिंग।

2. फर्जी पात्रता प्रमाणपत्र : नगर पंचायत निवासी को ग्रामीण आवास देना।

3. लाभार्थी को धमकाना : बिसाहू राम और अन्य गरीबों को धमकी देकर झूठे कागज साइन कराना।

4. मुआवजा बनाम रिश्वत : अधूरे मकान और रिश्वत की कहानी हर पंचायत में आम।

5. ऊपरी संरक्षण : शिकायतों के बावजूद कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की चुप्पी।

जनता के सवाल

1. अगर हर आवास की जियो टैगिंग वेबसाइट पर है, तो जमीनी हकीकत क्यों नहीं दिखती?

2. नगर पंचायत निवासी को ग्रामीण आवास का पैसा किसकी मंजूरी से मिला?

3. सरपंच और सचिव खुलेआम रिश्वत वसूलते हैं, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

4. जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर ने इतने बड़े मामलों को दबा क्यों दिया?

5. विधायक रोहित साहू इस मुद्दे पर क्यों चुप हैं? क्या उनका भी कोई हित जुड़ा है?

Bhaadi Village : डायरिया की शिकायत पर हड़कंप: कलेक्टर ने स्वास्थ्य टीम को तत्काल गांव रवाना किया https://gangaprakash.com/on-the-complaint-of-bhaadi-village-diarrhea-the-collector-immediately-sent-the-health-team-to-the-village/

जनता का गुस्सा – यह भ्रष्टाचार नहीं, गरीबों से धोखा है

स्थानीय लोगों का कहना है – सरकार गरीबों के लिए योजनाएं लाती है, मगर यहां अफसर और नेता मिलकर गरीबों का हक लूट लेते हैं। बिसाहू राम और घनसाय नेताम जैसे लोग आज भी छत के लिए तरस रहे हैं, जबकि उनके नाम पर लाखों की राशि निकाली जा चुकी है। यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि गरीब के सपनों के साथ किया गया धोखा है।

क्या कलेक्टर और जिला सीईओ कुंभकर्णीय नींद में हैं?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब ये खबरें लगातार मीडिया में प्रकाशित हो रही हैं, तो भी जिला कलेक्टर बी.एस. उईके और जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर कुंभकर्णीय नींद में सोए हैं।

 न जांच कमेटी, न एफआईआर, न दोषियों पर सस्पेंशन, न हितग्राहियों को मुआवजा यह चुप्पी खुद ही बहुत कुछ बयां कर देती है।

जनता की मांग

छुरा जनपद पंचायत के सभी आवास मामलों की उच्च स्तरीय जांच हो।

  • जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर और जनपद पंचायत सीईओ पर एफआईआर दर्ज हो।
  • दोषी पंचायत सचिव, आवास मित्र और सरपंचों की तुरंत निलंबन व गिरफ्तारी हो।
  • पीड़ित हितग्राहियों को तुरंत नया आवास और मुआवजा दिया जाए।
  • कलेक्टर बी.एस. उईके और विधायक रोहित साहू को भी इस मामले पर जवाब देना चाहिए।

संरक्षण में पल रहा है आवास घोटाला

प्रधानमंत्री आवास योजना का सपना था कि हर गरीब को पक्का घर मिले। लेकिन छुरा जनपद पंचायत में यह सपना टूट गया है। यहां गरीब के नाम पर योजनाओं की रकम निकालकर अफसर और नेताओं के संरक्षित अधिकारी मौज उड़ा रहे हैं।

जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर, जिला कलेक्टर बी.एस. उईके और विधायक रोहित साहू की चुप्पी और संरक्षण इस पूरे मामले को और भी संगीन बनाता है। जनता अब पूछ रही है – क्या गरीब का हक मारकर भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए ही ये अधिकारी और नेता बैठे हैं?

अगर सरकार ने अब भी कड़ा कदम नहीं उठाया तो यह घोटाला सिर्फ छुरा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें और गहरी करेगा।


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