नई दिल्ली | भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 2007 से चली आ रही व्यापारिक तनातनी आखिरकार खत्म हो गई है। मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को 16वें भारत-EU समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के लागू होते ही विदेशी कारों, शराब, चॉकलेट और मशीनों पर लगने वाला भारी-भरकम टैक्स (इंपोर्ट ड्यूटी) लगभग खत्म या बेहद कम हो जाएगा।
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प्रमुख बदलाव: क्या-क्या हुआ सस्ता?
इस समझौते के तहत भारत ने यूरोपीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ में भारी कटौती की है। मुख्य बदलाव नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं:
| उत्पाद | पुराना टैक्स (टैरिफ) | नया टैक्स (FTA के बाद) |
| लग्जरी कारें (Imported) | 110% | 10% (2.5 लाख कार सालाना कोटा) |
| प्रीमियम शराब (Wine) | 150% | 20% |
| बीयर (Beer) | 110% | 50% |
| ऑलिव ऑयल/वेजिटेबल ऑयल | 45% | 0% (Free) |
| चॉकलेट, बिस्किट, पास्ता | 50% | 0% (Free) |
| मेडिकल और सर्जिकल उपकरण | 27.5% | 0% (Free) |
लग्जरी कारों के शौकीनों की ‘लॉटरी’
अब तक मर्सिडीज-बेंज, BMW और ऑडी जैसी कारें जो सीधे विदेश से (CBU यूनिट के रूप में) भारत आती थीं, उन पर 110% टैक्स लगता था। यानी 1 करोड़ की कार भारत में 2.10 करोड़ से ज्यादा की पड़ती थी। अब यह टैक्स घटकर मात्र 10% रह जाएगा। हालांकि, यह छूट सालाना 2,50,000 गाड़ियों के कोटा तक ही सीमित रहेगी।
विशेष नोट: घरेलू कंपनियों को सुरक्षा देने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को शुरुआती 5 सालों के लिए इस टैक्स कटौती से बाहर रखा गया है।
पीएम मोदी ने बताया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
हैदराबाद हाउस में आयोजित समिट के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक शानदार उदाहरण है। यह डील ग्लोबल जीडीपी के करीब 25% और वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को प्रभावित करेगी।
भारतीय निर्यातकों के लिए खुले द्वार
सिर्फ विदेशी सामान सस्ता नहीं होगा, बल्कि भारत के कपड़ा (Textiles), चमड़ा (Leather), और रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery) जैसे क्षेत्रों को यूरोप के 27 देशों के विशाल बाजार में ‘जीरो-ड्यूटी’ एक्सेस मिलेगा। इससे भारतीय निर्यात में करीब 75 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
18 साल का संघर्ष और सफलता
यह वार्ता 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन शराब पर टैक्स, ऑटोमोबाइल टैरिफ और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर फंसी रही। 2022 में बातचीत फिर से शुरू हुई और आखिरकार 2026 में यह समझौता मुकाम तक पहुँचा।
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