नई दिल्ली: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा भीषण युद्ध आज अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है। ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने पूरे मध्य पूर्व (Middle East) को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात तो कर दी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है— ईरान के सबसे भरोसेमंद दोस्त रूस और चीन आखिर कहां हैं?

1. रूस की मजबूरी: खुद की जंग में उलझा मास्को

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस चाहकर भी ईरान की सीधी सैन्य मदद नहीं कर पा रहा है।

Chhattisgarh News : होली का जश्न बदला मातम में युवक ने मासूमों को दी नशीली कोल्ड ड्रिंक, जिला अस्पताल में भर्ती

  • यूक्रेन संकट: रूस पिछले लंबे समय से यूक्रेन के साथ युद्ध में फंसा हुआ है। उसके संसाधन और सैन्य ताकत वहीं केंद्रित हैं।

  • सीमित समर्थन: रूस ने खामेनेई की मौत को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन’ बताकर कड़ी निंदा तो की, लेकिन वह अमेरिका के साथ सीधे टकराकर एक और नया मोर्चा खोलने का जोखिम नहीं उठाना चाहता।

2. चीन की कूटनीति: ‘कारोबार पहले, जंग बाद में’

चीन ने हमेशा खुद को एक शांतिदूत के रूप में पेश किया है, लेकिन उसकी चुप्पी के पीछे गहरे आर्थिक हित हैं:

  • आर्थिक निवेश: मिडिल ईस्ट में चीन के अरबों डॉलर के प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। वह नहीं चाहता कि इस युद्ध में सीधे कूदकर वह अपने व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंचाए।

  • अमेरिका से सीधा टकराव टालना: चीन फिलहाल अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने में लगा है और अमेरिका के साथ सीधे सैन्य मुकाबले से बच रहा है। वह केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित रहकर ‘वेट एंड वॉच’ (इंतजार करो और देखो) की नीति अपना रहा है।

3. ईरान की आक्रामक जवाबी कार्रवाई

खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने जिस तरह से अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं, उससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल है। ईरान यह जताना चाहता है कि वह बिना किसी बाहरी मदद के भी पलटवार करने में सक्षम है। हालांकि, आधुनिक हथियारों और खुफिया जानकारी के मामले में रूस-चीन का साथ न मिलना ईरान के लिए भारी पड़ सकता है।

4. क्या अकेले टिक पाएगा ईरान?

बिना किसी महाशक्ति के सीधे सैन्य सहयोग के, ईरान का इजराइल और अमेरिका जैसे तकनीकी रूप से उन्नत देशों के सामने लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो सकता है। लेबनान, यमन और सीरिया के प्रॉक्सी संगठन ईरान के साथ जरूर हैं, लेकिन स्टेट-टू-स्टेट वॉर में रूस और चीन की खामोशी ईरान को अलग-थलग कर रही है।


There is no ads to display, Please add some
WhatsApp Facebook 0 Twitter 0 0Shares
Share.

About Us

Chif Editor – Prakash Kumar yadav

Founder – Gangaprakash

Contact us

📍 Address:
Ward No. 12, Jhulelal Para, Chhura, District Gariyaband (C.G.) – 493996

📞 Mobile: +91-95891 54969
📧 Email: gangaprakashnews@gmail.com
🌐 Website: www.gangaprakash.com

🆔 RNI No.: CHHHIN/2022/83766
🆔 UDYAM No.: CG-25-0001205

Disclaimer

गंगा प्रकाश छत्तीसगढ के गरियाबंद जिले छुरा(न.प.) से दैनिक समाचार पत्रिका/वेब पोर्टल है। गंगा प्रकाश का उद्देश्य सच्ची खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का है। जिसके लिए अनुभवी संवाददाताओं की टीम हमारे साथ जुड़कर कार्य कर रही है। समाचार पत्र/वेब पोर्टल में प्रकाशित समाचार, लेख, विज्ञापन संवाददाताओं द्वारा लिखी कलम व संकलन कर्ता के है। इसके लिए प्रकाशक, मुद्रक, स्वामी, संपादक की कोई जवाबदारी नहीं है। न्यायिक क्षेत्र गरियाबंद जिला है।

Ganga Prakash Copyright © 2025. Designed by Nimble Technology

You cannot copy content of this page

WhatsApp us

Exit mobile version