गंगा प्रकाश की जमीनी पड़ताल में सामने आए कई तथ्य, विभागीय सूत्रों के दावे के बाद निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज

यदिन्द्रन नायर की रिपोर्ट

 

यदिंद्रन नायर सलाहकार संपादक स्थानीय संवाददाता बीजापुर

बीजापुर (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य अब कई गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। सड़क निर्माण, क्रशर प्लांट के संचालन, गिट्टी के उपयोग, खनिज परिवहन और निर्माण स्थल पर पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इन सवालों की पड़ताल के लिए गंगा प्रकाश के सलाहकार संपादक एवं वरिष्ठ संवाददाता यदिन्द्रन नायर ने निर्माण स्थलों का भौतिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मिले तथ्यों, स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी तथा विभागीय सूत्रों के दावों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

40 किलोमीटर सड़क निर्माण की अनुमति, लेकिन सवाल कई

नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर विभागीय सूत्रों ने गंगा प्रकाश को बताया कि BRO को लगभग 40 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य के लिए आवश्यक निर्माण सामग्री तैयार करने और उसका उपयोग करने की अनुमति प्रदान की गई है। सूत्रों का दावा है कि परियोजना के लिए स्थापित क्रशर प्लांट से तैयार की जा रही गिट्टी का उपयोग कथित रूप से अन्य निर्माण कार्यों में भी किया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित एजेंसी या अन्य ठेकेदारों के पास उसके लिए अलग से वैधानिक अनुमति, रॉयल्टी और परिवहन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

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बस्ती के बीच स्थापित क्रशर प्लांट

पड़ताल के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कोंटा रोड स्थित थाना तररेम से लगभग 50 मीटर की दूरी पर तथा आबादी वाले क्षेत्र के बीच क्रशर प्लांट संचालित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिनभर चलने वाली भारी मशीनों से धूल और शोर का प्रदूषण फैलता है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या इस स्थान पर क्रशर प्लांट स्थापित करने के लिए सभी आवश्यक पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक स्वीकृतियां प्राप्त की गई थीं? यदि स्वीकृति मिली थी, तो उसकी शर्तें क्या थीं और उनका पालन किया जा रहा है या नहीं?

 

निर्माण स्थल पर नहीं मिला कोई सूचना बोर्ड

गंगा प्रकाश की टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया। जिस निर्माण स्थल का निरीक्षण किया गया, वहां BRO अथवा संबंधित ठेकेदार द्वारा परियोजना का कोई सूचना बोर्ड प्रदर्शित नहीं मिला।

सामान्यतः किसी भी सरकारी निर्माण कार्य स्थल पर परियोजना का नाम, स्वीकृत लागत, कार्य की लंबाई, कार्य प्रारंभ एवं समाप्ति तिथि, कार्यदायी संस्था और ठेकेदार का नाम अंकित सूचना बोर्ड लगाया जाता है ताकि आम नागरिकों को परियोजना की जानकारी मिल सके।

लेकिन निरीक्षण के दौरान ऐसा कोई बोर्ड दिखाई नहीं दिया। इससे यह सवाल उठता है कि क्या परियोजना की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने के नियमों का पालन किया गया?

क्रशर मैनेजर से मुलाकात, लेकिन मालिक तक नहीं पहुंच सकी बात

पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए गंगा प्रकाश की टीम ने संबंधित पक्ष का पक्ष जानने का प्रयास भी किया।
निरीक्षण के दौरान क्रशर प्लांट पर मौजूद मैनेजर से बातचीत की गई। मैनेजर ने बताया कि क्रशर का मालिक कोरबा का निवासी है और अधिक जानकारी के लिए उसका मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया।

लेकिन जब उसी नंबर पर संपर्क किया गया, तो कॉल रिसीव करने वाले व्यक्ति ने कहा कि यह “रॉन्ग नंबर” है।
इस घटनाक्रम ने स्वाभाविस्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार 20 जुलाई को बिना वैध खनिज परिवहन दस्तावेजों के गिट्टी लेकर जा रहे कुछ ट्रकों को पुलिस ने रोककर थाना तुमनार में खड़ा कराया था। बाद में उन्हें छोड़ दिए जाने की चर्चा भी रही।क रूप से कई सवाल खड़े कर दिए। यदि मैनेजर नियमित रूप से अपने मालिक के निर्देशों पर कार्य करता है, तो फिर ऐसा नंबर क्यों दिया गया जिससे संपर्क नहीं हो सका? हालांकि, इसका कारण केवल संबंधित पक्ष ही स्पष्ट कर सकता है।

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20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई भी चर्चा में

स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार 20 जुलाई को बिना वैध खनिज परिवहन दस्तावेजों के गिट्टी लेकर जा रहे कुछ ट्रकों को पुलिस ने रोककर थाना तुमनार में खड़ा कराया था। बाद में उन्हें छोड़ दिए जाने की चर्चा भी रही।
इस संबंध में अभी तक पुलिस अथवा संबंधित विभाग का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि ट्रकों की जांच में क्या पाया गया और यदि उन्हें छोड़ा गया तो किन दस्तावेजों अथवा कानूनी आधार पर छोड़ा गया।

विभागीय सूत्रों का दावा

नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर विभागीय सूत्रों ने दावा किया कि पूरे मामले की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों तक पहले से पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इस संबंध में संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

तस्वीरें भी खड़े कर रही हैं सवाल

गंगा प्रकाश को उपलब्ध तस्वीरों में सड़क निर्माण कार्य के कई दृश्य दिखाई देते हैं। कहीं सड़क की सतह पर गिट्टी बिखरी हुई है, कहीं निर्माण कार्य अधूरा दिखाई देता है, तो कहीं बड़े पैमाने पर गिट्टी का भंडारण और भारी मशीनरी नजर आती है। एक तस्वीर में BRO परियोजना का बोर्ड भी दिखाई देता है, जबकि कार्यस्थलों पर परियोजना संबंधी सूचना बोर्ड का अभाव दिखाई दिया।

तस्वीरें अपने आप में अंतिम प्रमाण नहीं होतीं, लेकिन वे संबंधित विभागों द्वारा तकनीकी और प्रशासनिक जांच की आवश्यकता अवश्य दर्शाती हैं।

करोड़ों की परियोजना, इसलिए पारदर्शिता भी जरूरी

सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि किसी परियोजना को लेकर सामग्री के उपयोग, निर्माण गुणवत्ता, खनिज परिवहन और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं, तो उनका समयबद्ध और निष्पक्ष जवाब भी मिलना चाहिए।
सरकारी परियोजनाओं में खर्च होने वाला धन जनता के कर से आता है। इसलिए प्रत्येक परियोजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

इन सवालों का जवाब कौन देगा?

अब इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न प्रशासन के सामने खड़े हैं—

  • BRO को जारी कार्यादेश की वास्तविक शर्तें क्या हैं?
  • क्या क्रशर प्लांट केवल BRO परियोजना के लिए स्वीकृत है?
  • क्या उसी प्लांट से अन्य निर्माण कार्यों के लिए भी गिट्टी उपलब्ध कराई जा रही है?
  • यदि हाँ, तो उसके लिए अलग अनुमति और रॉयल्टी का प्रावधान पूरा किया गया है या नहीं?
  • बस्ती के बीच क्रशर प्लांट संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई?
  • निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया?
  • 20 जुलाई को रोके गए ट्रकों के संबंध में पुलिस और खनिज विभाग की आधिकारिक कार्रवाई क्या रही?
  • यदि शिकायतें पहले से विभागों के संज्ञान में थीं, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई?

निष्पक्ष जांच ही दूर करेगी संशय

गंगा प्रकाश का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े उन सवालों को सामने लाना है जिनका उत्तर जनता जानना चाहती है। यदि सभी कार्य नियमों के अनुरूप हुए हैं, तो संबंधित विभागों और एजेंसियों को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होना भी उतना ही आवश्यक है।

गंगा प्रकाश इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि BRO, संबंधित ठेकेदार, क्रशर संचालक, पुलिस विभाग, खनिज विभाग या जिला प्रशासन अपना आधिकारिक पक्ष उपलब्ध कराते हैं, तो उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने तथ्य का पूर्ण और संतुलित चित्र प्रस्तुत किया जा सके।

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