नई दिल्ली | मध्य पूर्व (West Asia) में जारी भीषण सैन्य संघर्ष का सीधा असर अब दुनिया भर की जेब पर पड़ता दिख रहा है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के तेल ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। मार्च की शुरुआत में जहाँ तेल $70 के आसपास था, वहीं अब यह $85 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है।
भारत, जो अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है, के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। आइए जानते हैं कि क्या देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने वाली हैं।
भारत के पास कितना है बैकअप?
युद्ध के बीच बढ़ती महंगाई की आशंकाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने देश को आश्वस्त किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार:
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8 सप्ताह का रिजर्व: भारत के पास वर्तमान में लगभग 25 करोड़ बैरल कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है। यह स्टॉक अगले 7 से 8 हफ्तों (करीब 2 महीने) के लिए पर्याप्त है।
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रणनीतिक भंडार (SPR): विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पाडुर स्थित भूमिगत गुफाओं में भारत ने आपात स्थिति के लिए लाखों टन तेल सुरक्षित रखा है।
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OMCs का बफर: तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) के पास मौजूद स्टॉक भी सप्लाई चेन में किसी भी तात्कालिक रुकावट को झेलने में सक्षम है।
क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
हालाँकि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन फिलहाल घरेलू स्तर पर कीमतें स्थिर रहने की संभावना है:
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सरकार का आश्वासन: पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल बढ़ोतरी का कोई इरादा नहीं है।
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LPG पर दिखा असर: ध्यान देने वाली बात यह है कि 7 मार्च 2026 से घरेलू रसोई गैस (LPG) के दाम में ₹60 प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है, जो वैश्विक ऊर्जा संकट का शुरुआती संकेत माना जा रहा है।
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कंपनियों का मार्जिन: विशेषज्ञ मानते हैं कि तेल कंपनियां कुछ समय तक कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का बोझ खुद उठाएंगी (Absorb करेंगी), ताकि आम जनता पर महंगाई की मार न पड़े।
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