केरल का पारंपरिक ‘अप्पम’ बना उत्तर भारतीय फूड प्रेमियों की पसंद— दक्षिण भारतीय व्यंजनों की बात हो तो डोसा और इडली के बाद जो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आता है, वह है **अप्पम**। केरल और तमिलनाडु की गलियों से निकलकर यह डिश अब देश के हर बड़े शहर के मेन्यू का हिस्सा बन चुकी है। अपनी अनोखी बनावट और हल्केपन के कारण इसे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों और स्वाद के शौकीनों, दोनों द्वारा पसंद किया जा रहा है।
केरल का पारंपरिक ‘अप्पम’ बना उत्तर भारतीय फूड प्रेमियों की पसंद: जानें इसकी खासियत

मुलायम केंद्र और कुरकुरे किनारे: अप्पम की पहचान
अप्पम कोई साधारण पैनकेक नहीं है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी जटिल बनावट है। इसे एक विशेष गहरे बर्तन में बनाया जाता है जिसे **’अप्पम चट्टी’** कहते हैं। पकने के बाद, यह बीच में से **सफेद, स्पंजी और काफी नरम** रहता है, जबकि इसके बाहरी किनारे **कागज की तरह पतले और बेहद कुरकुरे** होते हैं।
इस व्यंजन को मुख्य रूप से चावल के घोल और नारियल के दूध से तैयार किया जाता है। खमीर उठाने की प्रक्रिया इसे वह जालीदार बनावट देती है, जो इसे अन्य दक्षिण भारतीय व्यंजनों से अलग बनाती है। स्थानीय स्तर पर इसे सुबह के नाश्ते या रात के खाने में सबसे अधिक प्राथमिकता दी जाती है।
विशेषज्ञों की राय और पारंपरिक स्वाद
“अप्पम की असलियत उसकी ताजगी में है। अगर घोल को सही तरीके से फर्मेंट (खमीर) न किया जाए, तो वह स्पंजी अहसास नहीं आता। केरल में इसे ‘इस्ट’ के बजाय प्राकृतिक ‘कल्लु’ (ताड़ी) से खमीर उठाने की परंपरा रही है, जो इसे एक खास स्वाद देता है।”
— शेफ के. राघवन, दक्षिण भारतीय व्यंजन विशेषज्ञ
बदलते खान-पान में अप्पम का स्थान
हाल के वर्षों में, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में ‘अप्पम स्टॉल’ की संख्या में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह डिश न केवल शाकाहारी बल्कि मांसाहारी लोगों के बीच भी समान रूप से लोकप्रिय है। इसे आमतौर पर **वेजिटेबल स्टू**, **नारियल के दूध** या **चिकन करी** के साथ परोसा जाता है।
पोषण के नजरिए से देखें तो यह तेल में कम पका होने के कारण पचने में आसान है। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण भारतीय खान-पान की यह विविधता ही इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिला रही है।
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