विकास की गंगा या कमीशन का खेल, जनता मांग रही पारदर्शिता

गरियाबंद/छुरा(गंगा प्रकाश)। जिले की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल के एक विधायक द्वारा सत्ता पक्ष से जुड़े जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं और उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों में लगातार विकास कार्यों के लिए लाखों-करोड़ों रुपये की स्वीकृति दिए जाने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार विधायक निधि तथा विभिन्न विकास मदों से पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, सीसी रोड, मंच निर्माण, सांस्कृतिक भवन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए बड़ी राशि स्वीकृत की जा रही है। इन स्वीकृतियों का लाभ मुख्य रूप से सत्ता पक्ष से जुड़े क्षेत्रों को मिलने की चर्चाएं राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तेज हो गई हैं।

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राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, लेकिन जिले में सामने आ रही तस्वीर कुछ अलग संकेत दे रही है। विपक्षी विधायक द्वारा सत्ता पक्ष के प्रभाव वाले क्षेत्रों में लगातार विकास कार्य स्वीकृत किए जाने से कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कार्य कर रहे हैं तो यह स्वागत योग्य कदम है। वहीं दूसरी ओर लोगों का यह भी मानना है कि विकास कार्यों के चयन, राशि आवंटन और लाभार्थी क्षेत्रों को लेकर पूर्ण पारदर्शिता आवश्यक है ताकि किसी प्रकार की शंका या विवाद की स्थिति न बने।

जनता के बीच यह चर्चा भी है कि विकास कार्यों के नाम पर कहीं राजनीतिक समझौते, कमीशनखोरी अथवा किसी प्रकार की सांठगांठ तो नहीं चल रही है। हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बढ़ती चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को गर्म जरूर कर दिया है।
उधर विपक्षी खेमे के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी की चर्चा है। उनका मानना है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और समर्थकों की अपेक्षाओं को नजरअंदाज कर सत्ता पक्ष से जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता देना संगठनात्मक दृष्टि से उचित संदेश नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम का एक पहलू आगामी चुनावी समीकरणों और राजनीतिक संभावनाओं से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चाओं का बाजार गर्म है कि कहीं यह विकास कार्यों के माध्यम से भविष्य की किसी राजनीतिक रणनीति की जमीन तो तैयार नहीं की जा रही है।

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फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यह कदम क्षेत्र के संतुलित विकास की सोच का हिस्सा है या इसके पीछे कोई अन्य राजनीतिक अथवा आर्थिक कारण मौजूद हैं। जनता अब विकास कार्यों के आवंटन, स्वीकृत राशि और चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रही है। जानकारों का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही ही इन तमाम सवालों का सबसे सटीक जवाब साबित हो सकती है।

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