निजी भूमि पर नलकूप खनन की अनुशंसा के बाद खेत में उत्खनन का मामला चर्चा में, प्रशासन ने कहा- जानकारी मिलने पर होगी जांच

छुरा (गंगा प्रकाश)। विकासखंड छुरा क्षेत्र के ग्राम खट्टी लोहझर में पेयजल व्यवस्था के नाम पर कराए गए बोर खनन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला एक निजी भूमि पर नलकूप खनन से जुड़ा है, जहां पेयजल संकट का हवाला देते हुए अनुमति की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब स्थानीय स्तर पर यह चर्चा का विषय बन गया है कि जिस उद्देश्य से आवेदन किया गया था, क्या उसी उद्देश्य के अनुरूप बोर खनन की कार्रवाई की गई या नहीं। पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया और अनुमति संबंधी नियमों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम लोहार निवासी खेमराज पिता मूलचंद द्वारा ग्राम खट्टी लोहझर स्थित अपनी निजी भूमि, खसरा नंबर 202/2 रकबा 0.30 हेक्टेयर में पेयजल व्यवस्था हेतु नलकूप खनन की अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन के आधार पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग उपखंड राजिम के सहायक अभियंता द्वारा एक पत्र जारी कर ग्राम खट्टी में पेयजल समस्या का उल्लेख करते हुए हितग्राही की निजी भूमि पर पेयजल व्यवस्था के लिए नलकूप खनन की अनुशंसा की गई। विभागीय पत्र में ग्राम की पेयजल समस्या को देखते हुए आवश्यक कार्यवाही करने का उल्लेख किया गया है।

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मामले में विवाद तब सामने आया जब स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पेयजल संकट का हवाला देकर प्राप्त की गई अनुशंसा के बाद खेत के भीतर बोर खनन कराया गया। बताया जा रहा है कि मां गायत्री बोरवेल, कनेसर छुरा की मशीन एवं वाहन क्रमांक सीजी 23 पी 6530 द्वारा मौके पर बोर उत्खनन किया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बोर खनन के दौरान मौके पर अंतिम वैधानिक अनुमति और आवश्यक दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं थी, जिसके कारण पूरे मामले को लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में भूजल संरक्षण और जल संकट को देखते हुए बोर खनन संबंधी मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि संबंधित मामले में सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गई थीं या नहीं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि आवेदन पेयजल व्यवस्था के लिए किया गया था, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसका उपयोग उसी उद्देश्य के लिए हो तथा नियमों के अनुरूप ही कार्यवाही की गई हो।

जानकारों के अनुसार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा दी गई अनुशंसा अंतिम अनुमति नहीं मानी जाती। नलकूप खनन के लिए सक्षम राजस्व अधिकारी द्वारा आवश्यक जांच, परीक्षण और नियमानुसार अनुमति जारी किए जाने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में अब पूरे मामले में यह बिंदु प्रमुख बन गया है कि क्या संबंधित प्रक्रिया का पूर्ण रूप से पालन किया गया था अथवा नहीं। इसी कारण क्षेत्र के लोगों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आवेदन से लेकर अनुशंसा, अनुमति और बोर खनन तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि यदि सभी कार्य नियमानुसार हुए हैं तो स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित पक्षों पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) राजिम विशाल महाराणा ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई मामला है तो जानकारी प्राप्त कर जांच कराई जाएगी तथा तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग उपखंड राजिम के एसडीओ नवीन साहू से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका, जिसके कारण उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया।

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