छुरा अंचल में सुबह से पहले ही शुरू हो जाती है रेत की ढुलाई, सूखा नदी समेत कई घाटों पर उत्खनन की शिकायत; जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर सवाल
छुरा (गंगा प्रकाश)। बारिश के मौसम में नदी-नालों में जलभराव के बीच छुरा अंचल में रेत उत्खनन और परिवहन का मामला सामने आया है। सूखा नदी समेत आसपास के कई नदी घाटों पर सुबह होने से पहले ही ट्रैक्टरों के पहुंचने और रेत भरकर परिवहन किए जाने की शिकायत स्थानीय लोगों ने की है। मौके से सामने आई तस्वीरों में नदी के रेत क्षेत्र में बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और रेत भरते मजदूर दिखाई दे रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह करीब पांच बजे से पहले ही नदी घाटों पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाती है। इसके बाद रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां अलग-अलग ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों की ओर रवाना होती हैं। सूखा नदी, एनीकट क्षेत्र, हरदी, बोड़राबांधा, रानीपरतेवा, मुड़ागांव और रक्सी सहित आसपास के क्षेत्रों में रेत उत्खनन की गतिविधियां होने की बात कही जा रही है।
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तस्वीरों में नदी के भीतर ट्रैक्टर
मौके से प्राप्त तस्वीरों में नदी के रेत क्षेत्र में एक साथ कई ट्रैक्टर खड़े दिखाई दे रहे हैं। कुछ ट्रॉलियों में रेत भरी जा रही है, जबकि मजदूर भी रेत उठाते नजर आ रहे हैं। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रेत उठाने की गतिविधि होने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
हालांकि संबंधित घाट पर उत्खनन वैध है अथवा नहीं, यह संबंधित विभाग के रिकॉर्ड, अनुमति और अभिवहन दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
निगरानी पर उठ रहे सवाल
नदी क्षेत्र में इतनी संख्या में वाहनों की मौजूदगी के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से राजस्व और खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित रूप से घाटों का निरीक्षण किया जाए तो रेत उत्खनन और परिवहन की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि संबंधित घाट पर उत्खनन की अनुमति नहीं है तो नदी के भीतर तक इतने वाहन कैसे पहुंच रहे हैं? वहीं यदि अनुमति है तो उसकी निर्धारित मात्रा और परिवहन व्यवस्था की जांच क्यों नहीं की जा रही?
कार्रवाई की भनक लगते ही गतिविधियां बंद होने का दावा
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि विभागीय अमले की कार्रवाई की जानकारी मिलते ही कुछ समय के लिए रेत परिवहन बंद कर दिया जाता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह भी जांच का विषय है कि कार्रवाई की सूचना संबंधित लोगों तक कैसे पहुंचती है।
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नदी और सड़कों दोनों पर असर
अनियंत्रित रेत उत्खनन से नदी के प्राकृतिक स्वरूप और तटों पर असर पड़ने की आशंका है। वहीं रेत से लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों पर धूल उड़ने और राहगीरों को परेशानी होने की शिकायत भी सामने आ रही है। धूल के कारण वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ने की आशंका बनी रहती है।
जांच से साफ होगी तस्वीर
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, एसडीएम, तहसीलदार और खनिज विभाग से संबंधित नदी घाटों का निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मौके पर पहुंचकर वाहनों के ई-टीपी, अभिवहन पास, रेत के स्रोत और उत्खनन की अनुमति की जांच की जाए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधितों पर कार्रवाई की जाए।
