फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। फिंगेश्वर जल संसाधन विभाग में करोड़ों का खेल –किसानों के पसीने से सींचे जाने वाले खेतों तक पानी पहुँचाने वाली नहरों में इस बार पानी नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की गहरी धाराएँ बह रही हैं। फिंगेश्वर जल संसाधन विभाग पर गंभीर आरोप लगे हैं कि कागजों में नहरों की मरम्मत पूरी कर दी गई, लेकिन जमीन पर एक गड्ढा भी नहीं भरा गया। नतीजा – किसानों को पानी नहीं, सिर्फ भ्रष्टाचार का जख्म मिला।

किसानों का बड़ा खुलासा

ग्राम रोबा, पेंड्रा, भसेरा, पाली, फूलकर्रा, सिर्रीकला और पसौद के किसानों ने बताया कि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बिना कोई काम किए ही 467622 रुपये का भुगतान कर दिया।

  • एक ठेकेदार फर्म को 2,34,466 रुपये,
  • और दूसरी फर्म को 2,33,156 रुपये का भुगतान दिखाया गया।

दावा किया गया कि मरम्मत कार्य में 2300 बोरियों का उपयोग हुआ, लेकिन नहरें ज्यों की त्यों टूटी पड़ी हैं।

यादराम साहू, किसान (ग्राम रोबा) ने सूचना के अधिकार (RTI) से जब कागज निकलवाए, तो सारा खेल सामने आया। उन्होंने बताया कि नहरों में घास खड़ी है, कई जगह मिट्टी भरकर पानी का बहाव रोका गया है, लेकिन सफाई तक नहीं की गई।

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कागज़ में खेल, हकीकत में धोखा

दस्तावेज़ों के अनुसार –

  • भेसरा माइनर 1 और 2: चैन 1380 से 1464 तक 4.80 मीटर की 4 जगह टूटना बताया गया।
  • चैन 1465 से 1470 तक 3.60 मीटर की 5 जगह,
  • चैन 1471 से 1478 तक 3 मीटर की 6 जगह टूटी दिखा दी गई।
  • पेंड्रा, फूलकर्रा, भसेरा माइनर – कई जगह टूटना कागज़ में लिखा गया।

इसी तरह, सिर्रीकला, पाली और पसौद माइनर में भी मीटर-दर-मीटर टूटने की लंबी फेहरिस्त बना दी गई और कोरबा के ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया। लेकिन किसानों का आरोप है कि नहरें आज भी टूटी-फूटी हैं।

किसानों का गुस्सा – प्रदर्शन और मांग

गुस्साए किसानों ने विभागीय कार्यालय पहुँचकर जोरदार प्रदर्शन किया और नहरों की तुरंत सफाई व मरम्मत की मांग की। किसान बोले – “हमारे खेतों तक पानी नहीं पहुँच रहा, अधिकारी और ठेकेदार कागज़ों में खेलकर पैसा डकार गए।”

यादराम साहू ने गरियाबंद पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

अधिकारियों का बचाव

एसडीओ वी.वी. मलैया, सिंचाई अनुविभाग फिंगेश्वर ने सफाई दी –

  • “किसानों की मांग पर स्थल निरीक्षण किया गया।
  • मौके पर इतने बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त नहर होना संभव नहीं है।
  • अगर उतनी लंबाई टूटी होती तो नहरें ही गायब हो जातीं।”

उन्होंने यह भी कहा कि डिवीजन कार्यालय से जांच के लिए मार्गदर्शन मांगा गया है, लेकिन अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।

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बड़ा सवाल – संरक्षण किसका?

किसानों का आरोप है कि विभाग के अधिकारियों को “ऊपर से संरक्षण” मिला हुआ है। यही कारण है कि मरम्मत कार्य बिना काम के ही भुगतान कर दिया गया।

गौरतलब है कि वर्तमान में जल संसाधन विभाग मुख्यमंत्री विष्णु देव (साय) के पास है। ऐसे में इस घोटाले से विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

पूर्व मुख्यमंत्री पंडित श्यामाचरण शुक्ल को राजिम विधानसभा में नहरों का जाल बिछाने के लिए जाना जाता था, ताकि किसानों को खेतों में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा मिल सके। लेकिन आज उन्हीं नहरों में भ्रष्टाचार की गंदगी बह रही है।

किसानों का सवाल

  • जब कागज़ में लाखों का काम पूरा हो गया, तो नहरों में पानी क्यों नहीं बह रहा?
  • किसानों की मेहनत और सरकारी राशि का हिसाब कौन देगा?
  • क्या दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?

किसानों ने साफ कहा है कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।


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