गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)।इन दिनों धान खरीदी केन्द्रों में धान बेच पाना काफी कठिन एवं दुर्वभ हो गया है। धान बेचने टोकन के लिए जावों तो टोकन कटवाना बहुत ज्यादा कठिन करदिया गया है। न आनलाइन सहूलियत से टोकन कट रहा है और न ही आफलाइन प्रतिदिन धान क्रय करने की काफी कम लिमिट से भी परेशानी हो रही है। क्षेत्र में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हुई है। धान खरीदी प्रक्रिया को करीब 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन किसान अब भी गंभीर अव्यवस्था का सामना कर रहे हैं। जिस पर जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुखचंद बैसरा ने भाजपा की विश्णुदेव साय सरकार को कसान विरोधी बताते हुए श्री बैसरा ने कहा कि किसान आज टोकन के लिए दर दर भटक रहे हैं, जबकि सरकार केवल आश्वासन देने में व्यस्त है। किसान सुबह से ही केंद्रों में लंबी कतारां में खड़े हो जाते हैं, मगर न तो आनलाइन और न ही आफलाइन टोकन आसानी से उपलब्ध हो पा रहा है। कई किसान हफ्तों से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सिस्टम में टोकन स्लाट खुल ही नहीं रही है। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में साय सरकार के गठन के बाद से ही किसानों की परेशानिया लगातार बढ़ती जा रही हैं। कभी खाद वितरण की समस्या, तो कभी पटवारी कार्यालयों के चक्कर-किसानों का कोई भी काम समय पर पूरा नहीं हो पा रही है। धान खरीदी केन्द्रों में खरीदी की लिमिट को न्यूनतम स्तर पर ला दिया गया है। यह स्थिति सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। श्री बैसरा ने कहा कि यह सरकार किसानों की नहीं, व्यापारियों की सरकार साबित हो रही है। किसानों की धान कटकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन बेचने के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है। लगभग 15 दिन से धान खरीदी जारी है, लेकिन अब तक खरीदी केन्द्रां से धान उठाव प्रारंभ नहीं हो पाया है। यदि उठाव में और देरी हुई तो उपार्जन केन्द्रों में जाम की स्थिति बनेगी और इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि नमी और अन्य तकनीकी बहाने बनाकर किसानां का धान वापस किया जा रहा है, जिससे उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर रहा है। यह सब दर्शाता है कि साय सरकार पारदर्शी तरीके से धान खरीदी कराने में पूरी तरह असफल रही है। अंत में कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुखचंद बैसरा ने मांग की है कि सरकार तत्काल टोकन व्यवस्था दुरूस्त करें, धान उठाव में तेजी लाए, खरीदी केन्द्रों में लिमिट को बढ़ाए और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करें, ताकि उन्हें राहत मिल सके और खरीदी कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके। बैसरा ने आगे कहा की किसानों के उपरोक्त मांगे जल्द से जल्द पूरी नहीं होने की स्थिति में किसानों के अधिकारां के लिए सड़क से सदन तक की लड़ाई लड़ी जाएगी।
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