छुरा (गंगा प्रकाश)। जिस तहसील कार्यालय पर राजस्व संपत्तियों की सुरक्षा और अवैध उत्खनन पर निगरानी की जिम्मेदारी है, उसी कार्यालय के सामने अवैध मुरूम खनन का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर में निर्माण कार्यों के लिए खुलेआम मुरूम की आपूर्ति किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि छुरा क्षेत्र में कोई भी स्वीकृत मुरूम खदान संचालित नहीं होने के बावजूद बड़ी मात्रा में मुरूम निकाला और खपाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार तहसील कार्यालय के सामने कन्या शाला भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी निर्माण कार्य के लिए उपयोग किए जा रहे मुरूम को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि निर्माण स्थल से लगभग 200 मीटर दूर धान मंडी के पीछे लगातार मुरूम की खुदाई की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान से मुरूम निकाला जा रहा है, वहां धीरे-धीरे गहरे गड्ढे बनते जा रहे हैं और क्षेत्र को खदान का स्वरूप दिया जा रहा है।
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क्षेत्रवासियों का आरोप है कि खनन करने वालों को न तो किसी कार्रवाई का डर है और न ही विभागीय जांच की चिंता। यही वजह है कि दिनदहाड़े मुरूम निकालकर विभिन्न निर्माण स्थलों तक पहुंचाया जा रहा है। इससे शासन को राजस्व का नुकसान होने की आशंका भी जताई जा रही है।
स्वीकृत खदान नहीं, फिर कहां से आ रहा मुरूम?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि छुरा परिक्षेत्र में वर्तमान समय में कोई भी प्रमाणित या स्वीकृत मुरूम खदान संचालित नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि नगर और आसपास के निर्माण कार्यों में उपयोग हो रहा मुरूम आखिर कहां से लाया जा रहा है। यदि मुरूम का उत्खनन वैध है तो संबंधित अनुमति और रॉयल्टी के दस्तावेज सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे?
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तहसीलदार बोले- बयान देने के लिए अधिकृत नहीं
मामले में तहसीलदार मयंक अग्रवाल से मोबाइल फोन पर संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान देने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है, इसलिए वे कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकते।
खनिज विभाग ने नहीं उठाया फोन
वहीं खनिज विभाग के अधिकारियों से भी मोबाइल पर लगातार संपर्क साधने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी ने मामले को लेकर और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों की मांग- हो जांच, तय हो जिम्मेदारी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि क्षेत्र में अवैध उत्खनन हो रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि निर्माण कार्यों में उपयोग हो रहा मुरूम वैध स्रोतों से आया है या नहीं। लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
