यदिन्द्रन नायर 

बीजापुर (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी परंपराओं और लोक आस्था के प्रतीक चिकटराज देव मंडई (मेला) 2026 का भव्य आगाज़ आज पारंपरिक रस्म ‘डेरी गढ़ाई’ के साथ हुआ। भीमगुड़ी देव स्थल में पूरे विधि-विधान और श्रद्धा-भक्ति के माहौल में पूजा-अर्चना कर बाबा चिकटराज से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और समृद्ध आयोजन के लिए आशीर्वाद लिया गया। इस अवसर पर देव स्थल जयकारों से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
कार्यक्रम में क्षेत्र के पुजारीगण, देवगुड़ी से जुड़े सेवक, ग्राम प्रमुख, जनप्रतिनिधि तथा दूर-दराज के गांवों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और आस्था के साथ पूजा-अर्चना में भाग लिया। विधिवत रूप से देवी-देवताओं का आह्वान कर पूजा संपन्न की गई, जिसमें क्षेत्र की समृद्ध लोक परंपराओं की झलक साफ दिखाई दी।


‘डेरी गढ़ाई’ रस्म को मंडई की शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र चरण माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में उत्सव के प्रारंभ का संकेत भी है। जैसे ही यह रस्म संपन्न होती है, वैसे ही गांव-गांव में मंडई को लेकर तैयारियां तेज हो जाती हैं और लोगों के बीच उल्लास और उमंग का संचार होने लगता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो आज भी उतनी ही आस्था और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है।
भीमगुड़ी देव स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की ध्वनि और जयकारों ने माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया। श्रद्धालुओं ने बाबा चिकटराज के समक्ष अपनी मनोकामनाएं रखीं और परिवार एवं समाज की खुशहाली की कामना की। इस दौरान कई श्रद्धालु विशेष रूप से अपने पारिवारिक और सामाजिक कार्यों की सफलता के लिए आशीर्वाद लेने पहुंचे थे।

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आयोजन समिति के सदस्यों ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष चिकटराज देव मंडई 2026 को और अधिक भव्य, व्यवस्थित और पारंपरिक स्वरूप में आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। मेले में विभिन्न देवी-देवताओं की झांकियां, पारंपरिक पूजा-अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और ग्रामीण अंचल की लोक कला की प्रस्तुति प्रमुख आकर्षण रहेंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय जनजातीय संस्कृति की झलक भी पूरे आयोजन में देखने को मिलेगी।


समिति ने बताया कि मंडई केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। इस आयोजन में हर वर्ग और समुदाय के लोग मिलकर भाग लेते हैं, जिससे आपसी भाईचारा और सामाजिक सौहार्द मजबूत होता है। मंडई के दौरान आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, जिससे यह आयोजन एक विशाल जनसमूह का रूप ले लेता है।
समिति द्वारा आयोजन की तैयारियों को लेकर विभिन्न स्तरों पर बैठकें भी की जा रही हैं, ताकि सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी की जा सकें। सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, आवागमन और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से भी समन्वय किया जा रहा है।

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अंत में चिकटराज देव समिति एवं समस्त कार्यकारिणी ने क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पारंपरिक और ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाएं तथा अपनी भागीदारी से इसे और अधिक भव्य स्वरूप प्रदान करें।


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