छुरा (गंगा प्रकाश)। तहसीलदार की निष्क्रियता से भू-माफियाओं के हौसले बुलंद – नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर कब्जा जमाए बैठे भू-माफिया और भूमि दलालों के खिलाफ आखिरकार स्थानीय समाजसेवियों और पत्रकारों का सब्र टूट गया। उन्होंने बुधवार को अनुविभागीय राजस्व अधिकारी (एसडीएम) ऋचा ठाकुर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और तत्काल कार्रवाई की मांग की। एसडीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि “आवेदकों की शिकायत पर शीघ्र ही जांच कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।”
20 वर्षों से कार्रवाई लंबित, भू-माफियाओं का मनोबल चरम पर
छुरा विकासखंड में 74 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से ग्राम पंचायत खरखरा की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। यहां पिछले दो दशक से शासकीय भूमि पर कब्जा बना हुआ है, लेकिन तहसीलदारों ने अब तक किसी भी कब्जाधारी को बेदखल करने की हिम्मत नहीं दिखाई।
जानकारी के अनुसार, नगर मुख्यालय से सटे भू-तस्कर, जमीन दलाल और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त तत्वों ने सरकारी जमीनों पर तार-बाड़ लगाकर कब्जा कर रखा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सरपंच और पंचायत सचिवों की निष्क्रियता, तथा तहसील प्रशासन की लापरवाही के चलते ये कब्जे दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं।
हर साल ज्ञापन, मगर कार्रवाई शून्य
स्थानीय पत्रकारों और समाजसेवियों ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से लगातार तहसीलदार को ज्ञापन दिए जा रहे हैं, परंतु प्रशासन की तरफ से सिर्फ “आश्वासन” के अलावा कुछ भी नहीं मिला।
“हर बार अधिकारी कहते हैं — जांच होगी, रिपोर्ट बनेगी — मगर धरातल पर कुछ नहीं होता। ये प्रशासनिक मौन ही भू-माफियाओं को ताकत देता है,” — एक स्थानीय समाजसेवी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा।
शासकीय कॉलेज के पास भी अवैध कब्जा
गरियाबंद-छुरा मुख्य मार्ग के किनारे शासकीय महाविद्यालय के पास लगभग तीन एकड़ शासकीय भूमि वर्षों से सुरक्षित पड़ी थी। लेकिन अब उस पर भी भू-माफियाओं ने तार का घेरा लगाकर कब्जा जमा लिया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस कब्जे की जानकारी प्रशासन, राजनैतिक दलों के नेताओं और विभागीय अधिकारियों सभी को है, लेकिन किसी ने भी कार्रवाई की जहमत नहीं उठाई।
“कब्जाधारियों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उनके खिलाफ बोलने की हिम्मत किसी राजनैतिक दल के नेता में नहीं है, चाहे वे भाजपा के हों या कांग्रेस के,” — छुरा के एक वरिष्ठ नागरिक ने बताया।
भू-माफिया के कारण शासकीय भवनों के निर्माण में बाधा
नगर पंचायत के आसपास शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे इतने बढ़ चुके हैं कि अब सरकारी कार्यालयों के लिए जगह नहीं बची। यही कारण है कि प्रशासन को मजबूर होकर 5 से 6 किलोमीटर दूर जंगलों के बीच भवन निर्माण करने पड़ रहे हैं।
उदाहरण के लिए, वर्तमान में नगर मुख्यालय से लगभग 5 किलोमीटर दूरी पर आईटीआई भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि इसे नगर के भीतर आसानी से बनाया जा सकता था। इसी तरह छुरा से कोमखान मार्ग पर सड़क किनारे शासकीय एकलव्य विद्यालय का निर्माण भी विवादों के घेरे में है, क्योंकि विद्यालय के लिए उपयुक्त भूमि नगर क्षेत्र में उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
राजनैतिक मौन पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि कब्जेधारियों में कई प्रभावशाली जमीन दलाल हैं, जिनका संबंध सत्ता और विपक्ष दोनों से जुड़ा हुआ है। इसीलिए प्रशासनिक और राजनैतिक स्तर पर मौन साध लिया गया है।
“जहां आम किसान की झोपड़ी पर बुलडोजर चलाने में देर नहीं लगती, वहीं करोड़ों की सरकारी जमीन पर बैठे कब्जाधारी वर्षों से खुलेआम घूम रहे हैं,” — एक स्थानीय किसान ने व्यंग्य करते हुए कहा।
एसडीएम ने दिलाया आश्वासन
ज्ञापन देने पहुंचे पत्रकारों और समाजसेवियों से एसडीएम ऋचा ठाकुर ने कहा कि प्रशासन मामले की जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भविष्य की दिशा
अब सबकी निगाहें एसडीएम कार्यालय और तहसील प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना बाकी है कि क्या वाकई इस बार दशकों से चले आ रहे कब्जों पर बुलडोजर चलेगा या फिर एक और ज्ञापन “फाइलों में दफन” होकर रह जाएगा।
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