गरियाबंद/राजिम (गंगा प्रकाश)। बढ़ते तापमान, घटते भू-जल स्तर और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच ग्राम किरवई स्थित पुजेरिन दाई माता मंदिर प्रांगण शनिवार को एक प्रेरणादायी सामाजिक अभियान का साक्षी बना। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिला साहू संघ गरियाबंद द्वारा आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में समाज के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों ने एकजुट होकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।
प्रदेश साहू संघ के निर्देशानुसार जिले के विभिन्न तहसील, परिक्षेत्र, नगर एवं ग्रामीण इकाइयों में चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत ग्राम किरवई में यह विशेष आयोजन किया गया। पुजेरिन दाई माता मंदिर परिसर में फलदार, छायादार एवं पर्यावरण के लिए उपयोगी पौधे लगाए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण तैयार करना भी था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ समाजसेवी चुन्नीलाल साहू ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे समय में वृक्षारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व से जुड़ा अभियान बन चुका है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे धरती का श्रृंगार ही नहीं, बल्कि जीवन के आधार हैं। वृक्ष वातावरण को शुद्ध करते हैं, वर्षा चक्र को संतुलित रखते हैं और भू-जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल को अपनी जिम्मेदारी समझे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला साहू संघ के अध्यक्ष प्रवीण साहू ने अपने संबोधन में कहा कि पेड़ धरती के फेफड़े हैं। जिस प्रकार मनुष्य बिना सांस लिए जीवित नहीं रह सकता, उसी प्रकार पेड़ों के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और विकास की दौड़ में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है, जिसका परिणाम बढ़ते प्रदूषण और प्राकृतिक असंतुलन के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे में समाज के प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता है।
जिला साहू संघ की महिला उपाध्यक्ष श्रीमती पुष्पा साहू ने कहा कि अक्सर लोग पौधे तो लगा देते हैं, लेकिन उनकी देखभाल नहीं कर पाते। इससे वृक्षारोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाना पहला कदम है, जबकि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना और नियमित देखभाल करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने महिलाओं और युवाओं से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जिला साहू संघ के उपाध्यक्ष देवराज साहू, तहसील अध्यक्ष जगदीश साहू, संरक्षक सोम प्रकाश साहू, राजेश साहू, गुंजन साहू तथा मुख्य सलाहकार डॉ. महेंद्र साहू सहित समाज के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
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कार्यक्रम का संचालन जिला साहू संघ के संगठन सचिव ठाकुर राम साहू ने किया। उन्होंने समाज द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न जनकल्याणकारी अभियानों की जानकारी देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। जब समाज स्वयं आगे बढ़कर ऐसे अभियान चलाता है, तब उसके सकारात्मक परिणाम दूरगामी होते हैं।
इस अवसर पर जिला कोषाध्यक्ष मुकेश साहू, संयुक्त सचिव शेखर साहू, संयोजिका मोमिन साहू, जिला उपाध्यक्ष ईश्वर साहू, मनोहर लाल साहू, सलाहकार गैंदलाल साहू, नारायण लाल साहू, राजिम भक्तिन समिति के महासचिव मिंजून साहू, ग्राम पंचायत किरवई की सरपंच देवकुमारी हेमंत साहू, ग्रामीण साहू समाज किरवई के अध्यक्ष कमलेश साहू, भसेरा परिक्षेत्र साहू समाज के अध्यक्ष रमेश साहू सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं, युवा एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
मंदिर परिसर में एक साथ सैकड़ों लोगों द्वारा पौधरोपण किए जाने से पूरा वातावरण हरियाली और प्रकृति संरक्षण के संदेश से सराबोर हो गया। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पौधों की सुरक्षा और नियमित देखभाल का संकल्प लिया। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि आने वाले समय में भी इस तरह के अभियान निरंतर चलाए जाएंगे, ताकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में समाज की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित हो सके।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि यदि समाज, संगठन और आमजन मिलकर प्रकृति संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण तैयार किया जा सकता है। ग्राम किरवई में हुआ यह पौधरोपण कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक चेतना और सामाजिक प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
