तीन घंटे से अधिक इंतजार, भीषण गर्मी में पानी और भोजन की व्यवस्था पर उठे सवाल; प्रशासनिक प्रबंधन बना चर्चा का विषय
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गरियाबंद प्रवास के दौरान बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और कार्यक्रम प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए। जिले के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित 600 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल छोड़कर वापस लौटे। शुरुआत में हजारों लोगों से खचाखच भरा पंडाल देखते ही देखते खाली होने लगा, जिससे मौके पर मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चिंता भी बढ़ गई।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गरियाबंद जिले में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित था। प्रशासन द्वारा इस आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं। जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों और ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। बताया जा रहा है कि करीब 200 वाहनों के माध्यम से हजारों लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाया गया था।
सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। कई ग्रामीण और आम नागरिक सुबह 11 बजे से पहले ही पुलिस परेड ग्राउंड पहुंच गए थे। शुरुआत में पूरा पंडाल लोगों से भरा हुआ दिखाई दे रहा था और लोगों में मुख्यमंत्री को सुनने तथा विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त करने को लेकर उत्साह भी नजर आ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और मुख्यमंत्री का आगमन नहीं हुआ, लोगों का उत्साह धीरे-धीरे निराशा में बदलने लगा।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार निर्धारित समय निकल जाने के बाद भी कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंचने में लगातार हो रही देरी के कारण लोगों का धैर्य जवाब देने लगा। पहले कुछ लोग पंडाल से बाहर निकले, फिर धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई। देखते ही देखते सैकड़ों लोग कार्यक्रम स्थल छोड़कर घरों की ओर लौटने लगे। हालात ऐसे बन गए कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही पंडाल का बड़ा हिस्सा खाली नजर आने लगा।
भीषण गर्मी बनी सबसे बड़ी परेशानी
कार्यक्रम में शामिल होने आए लोगों ने सबसे ज्यादा नाराजगी गर्मी और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर जाहिर की। उपस्थित ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें कई घंटों तक पंडाल में बैठकर मुख्यमंत्री का इंतजार करना पड़ा, लेकिन इस दौरान न तो पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था दिखाई दी और न ही भोजन की समुचित व्यवस्था की गई।
कई ग्रामीणों ने बताया कि वे सुबह 11 बजे से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे। दोपहर की तेज धूप और उमस भरे मौसम में घंटों तक बैठे रहने से लोगों को शारीरिक परेशानी होने लगी। बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जिन्हें लंबे समय तक इंतजार करना काफी कठिन लग रहा था।
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एक ग्रामीण ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, हम सुबह 11 बजे से यहां बैठे हुए हैं। अब शाम होने को आ गई है, लेकिन कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ। न खाने की व्यवस्था है और न पीने के पानी की पर्याप्त सुविधा। इतनी गर्मी में घंटों इंतजार करने से स्वास्थ्य खराब होने का डर लग रहा है। अब कार्यक्रम में रुकना संभव नहीं है, इसलिए हम वापस जा रहे हैं।
कई लोगों ने यह भी कहा कि यदि प्रशासन ने हजारों लोगों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया था, तो उनके लिए न्यूनतम सुविधाओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।
अधिकारियों की बढ़ी चिंता
जैसे-जैसे भीड़ कम होती गई, वैसे-वैसे प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता भी बढ़ती दिखाई दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई अधिकारी पंडाल और प्रवेश द्वार के आसपास स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। कुछ स्थानों पर लोगों को रुकने और कार्यक्रम समाप्त होने तक इंतजार करने की अपील भी की गई, लेकिन अधिकांश लोग वापस लौटने का निर्णय ले चुके थे।
मंच के सामने की खाली होती कुर्सियां और बाहर निकलते लोगों की भीड़ कार्यक्रम की बदलती तस्वीर को साफ बयां कर रही थी। शुरुआत में जहां पूरा पंडाल भरा हुआ नजर आ रहा था, वहीं कुछ घंटों बाद बड़ी संख्या में सीटें खाली दिखाई देने लगीं।
प्रशासनिक प्रबंधन पर उठे सवाल
घटना के बाद जिला प्रशासन की तैयारियों और समय प्रबंधन को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर के कार्यक्रम में समय का बेहतर समन्वय और जनता को सही जानकारी देना आवश्यक था। यदि मुख्यमंत्री के आगमन में विलंब हो रहा था, तो लोगों को समय-समय पर इसकी जानकारी देकर स्थिति को संभाला जा सकता था।
राजनीतिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक प्रबंधन की परीक्षा बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि विकास कार्यों के बड़े कार्यक्रमों में जनता की सुविधा और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
गौरतलब है कि कार्यक्रम में 600 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन का आयोजन किया गया था, जिसे जिले के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था। हालांकि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही बड़ी संख्या में लोगों का कार्यक्रम स्थल छोड़कर चले जाना पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की घोषणाओं से अधिक प्रभावी वह व्यवस्था होती है, जो जनता को सम्मानपूर्वक कार्यक्रम में शामिल होने का अनुभव दे सके। फिलहाल यह पूरा घटनाक्रम गरियाबंद जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं और समय प्रबंधन को लेकर बहस का विषय बना हुआ है।
