गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। पंचायती राज में पंचायतों में लंबे समय से चल रही वह परंपरा, जिसमें महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति या अन्य रिश्तेदार वास्तविक शक्ति का संचालन करते थे, अब प्रशासन की सख्त नजर में आ गई है। शासन ने स्पश्ट निर्देश जारी किया है कि महिला जनप्रतिनिधियों के कार्यो में किसी भी रिश्तेदार चाहे पति ही क्यों न हो हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि ऐसा पाया गया तो कार्यवाही महिला प्रतिनिधि पर की जाएगी। यह निर्देश इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इसे दूसरी बार जारी करना पड़ा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि पहले जारी निर्देशों के बावजूद कई पंचायतों में स्थिति नहीं बदली थी। क्षेत्र से मिल रही लगातार शिकायतां के आधार पर शासन-प्रशासन ने इस बार अधिक कठोर रूप अपनाया है। फिंगेश्वर विकासखंड के कई पंचायत क्षेत्रों में ऐसे मामले देखे गए, जहां महिला प्रतिनिधि केवल नाम मात्र की मुखिया है जबकि वास्तविक निर्णय उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य लेते है। बैठकों में उपस्थित होकर निर्देश देना, फाइल चेक करना और अधिकायिं से बातचीत करना ये सब कार्य चुनी हुई महिला की जगह कोई रिश्तेदार कर रहा है। प्रशासन के अनुसार यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मूल भावना के भी खिलाफ है। जिला पंचायत स्त्रोतां का कहना है कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का उद्देश्य उन्हें नेतृत्व में भागीदारी दिलाना है, लेकिन कई स्थानों पर इसे पुरूश नेताओं ने वैकल्पिक प्रवेश का रास्ता बना लिया था। नए निर्देश जारी होने के बाद ऐसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। पंचायत सचिवों को भी कहा गया है कि किसी भी बैठक या सर्वेक्षण में अधिकृत प्रतिनिधि के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को हस्तक्षेप न करने दिया जाए। यह भी जानकारी सामने आई है कि फिंगेश्वर विकासखंड और आसपास के क्षेत्रों में कई पुरूश जनप्रतिनिधि अपनी पत्नी को चुनाव जिताकर स्वयं पूरे क्षेत्र में प्रभाव बनाए हुए थे। अब नए आदेश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि यह प्रवृत्ति नियंत्रित होगी और महिला जनप्रतिनिधि स्वयं अपने अधिकारां का उपयोग कर पाएंगी। प्रशासन का साफ संदेश है कि महिला आरक्षण केवल कागज पर नहीं, बल्कि व्यवहार में भी प्रभावी होना चाहिए। इसके लिए यदि आवश्यक हुआ तो विभागीय जांच और दंडात्मक कार्यवाही भी की जाएगी।
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