न्याय की आस में छुरा पहुंचा गरीब परिवार, वन विभाग के चार कर्मचारियों पर लगाए गंभीर आरोप, कार्रवाई नहीं होने से बढ़ा आक्रोश
छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले के छुरा मुख्यालय में सोमवार को एक आदिवासी किसान अपने परिवार सहित अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गया। ग्राम खुड़ियाडीह निवासी किसान हेमेन्द्र कंवर ने वन विभाग के कर्मचारियों पर 35 हजार रुपये की कथित अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की है। किसान का कहना है कि उसने मामले की शिकायत कलेक्टर, वनमंडलाधिकारी, जनप्रतिनिधियों तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक की, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर उसने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया है।
अनशन स्थल पर लगाए गए बैनर और पोस्टरों में किसान ने दावा किया है कि वन विभाग के कुछ कर्मचारियों ने उससे कथित रूप से 35 हजार रुपये की वसूली की थी। किसान का आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उससे दबाव बनाकर राशि ली गई और जब उसने इसकी शिकायत की तो मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।
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परिवार सहित धरने पर बैठा किसान
आमरण अनशन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसान अकेला नहीं, बल्कि अपने परिवार के साथ धरना स्थल पर बैठा है। परिवार का कहना है कि न्याय पाने के लिए उन्होंने प्रशासन के हर दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर अब उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया है।
अनशनकारी किसान का कहना है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। परिवार ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी दर्ज है शिकायत
किसान ने बताया कि उसने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई है। बैनर में शिकायत क्रमांक CC260600004419 का उल्लेख किया गया है। किसान का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी न तो जांच की गई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी ने उनसे संपर्क किया।
चार कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप
अनशन स्थल पर लगाए गए पोस्टर में वन विभाग छुरा के चार कर्मचारियों के नामों का उल्लेख करते हुए उन पर कथित अवैध वसूली का आरोप लगाया गया है। किसान की मुख्य मांग है कि आरोपित कर्मचारियों को तत्काल पद से हटाया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोष सिद्ध होने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
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क्षेत्र में बना चर्चा का विषय
छुरा मुख्यालय में शुरू हुए इस आमरण अनशन की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की नजर भी इस मामले पर बनी हुई है। कई लोगों का कहना है कि यदि शिकायतें पहले ही गंभीरता से सुनी जातीं तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती।
प्रशासन की परीक्षा
एक ओर प्रदेश सरकार सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर एक आदिवासी किसान का परिवार सहित आमरण अनशन पर बैठना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और अनशनकारी परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार अधिकारी
समाचार लिखे जाने तक वन विभाग अथवा प्रशासन की ओर से मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
